Bharatpur News: गोबर और मिट्टी से बन रहे दीपक, भरतपुर की महिलाएं दीपावली पर दे रहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Last Updated:October 28, 2026, 11:43 IST
Clay Diya: भरतपुर में दीपावली से पहले महिलाएं गाय के गोबर और मिट्टी से पारंपरिक दीपक तैयार करने में जुटी है. इन दीपकों के जरिए धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है. प्राकृतिक सामग्री से बने ये दीपक भारतीय संस्कृति और हस्तकला को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल बन रहे हैं.
भरतपुर. दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों से लेकर बाजारों तक इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बीच पारंपरिक दीपक बनाने का काम भी जोर पकड़ने लगा है. महिलाएं गाय के गोबर और मिट्टी से दीपक तैयार करने में जुटी हुई हैं. हाथों से बनाए जा रहे ये पारंपरिक दीपक न केवल दीपावली की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं. बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं. इन दीपकों के जरिए महिलाएं लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं. दीपावली पर घरों में दीप जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, पहले के समय में मिट्टी के दीपकों का विशेष महत्व हुआ करता था आज भी अनेक परिवार दीपावली के अवसर पर पारंपरिक दीपकों से घरों को रोशन करना पसंद करते हैं.
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महिलाएं गाय के गोबर और मिट्टी की मदद से दीपक बनाने में लगी हुई हैं. इन दीपकों को तैयार करने के लिए महिलाएं मेहनत और लगन के साथ काम कर रही हैं. गाय के गोबर से तैयार किए जाने वाले दीपकों को प्राकृतिक सामग्री के उपयोग की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, मिट्टी से बने दीपक भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माने जाते हैं. दीपावली के अवसर पर इनका उपयोग करने से स्थानीय स्तर पर पारंपरिक हस्तकला को भी प्रोत्साहन मिल सकता है. साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी इस तरह की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
महिलाओं का यह प्रयास केवल दीपक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दे रही हैं. आधुनिकता के दौर में प्राकृतिक सामग्री से बनी वस्तुओं को अपनाने की पहल पारंपरिक जीवनशैली के महत्व को सामने लाती हैं. दीपावली रोशनी खुशियों और सकारात्मकता का त्योहार है.ऐसे में गाय के गोबर और मिट्टी से बने दीपकों का उपयोग त्योहार की पारंपरिक भावना को मजबूत करने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है. महिलाओं की यह पहल परंपरा प्रकृति और संस्कृति के सुंदर संगम का उदाहरण बन रही है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
October 28, 2026, 11:43 IST



