World

India Mexico Trade : ट्रंप के जानी दुश्मन को भारत ने बनाया ‘पार्टनर’, कहीं ये पाकिस्तान का जवाब तो नहीं?

जियोपॉलिटिक्स में कई बार ऐसे फैसले लिए जाते हैं जो बाहर से दिखने में तो व्यापार लगते हैं. लेकिन उनका इंटरनल मैसेज बहुत तगड़ा होता है. भारत ने कुछ ऐसा ही दांव अमेरिका के विरोधी मेक्सिको के साथ खेला है. दोनों देशों ने ट्रेड समझौते पर बातचीत का रास्ता साफ कर दिया है. देखने में ये सिर्फ दो देशों के बीच कारोबार बढ़ाने वाली डील लग सकती है, लेकिन जिस टाइमिंग ये फैसला लिया गया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. अमेरिका के साथ मेक्सिको की तनातनी के बीच भारत का ये कदम कूटनीति के लिहाज से बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है.

क्या है भारत-मैक्सिको का ये समझौता और क्यों है इतना खास?

एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मेक्सिको पर अपनी सीमाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं और उसे अपना सबसे बड़ा सिरदर्द मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत का मेक्सिको के साथ हाथ मिलाना एक कूटनीतिक मैसेज के रूप में देखा जा रहा है.

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का कहना है कि ये समझौता दोनों देशों के बीच कारोबार, निवेश और सप्लाई चेन को मजबूत करने का एक नया रास्ता तैयार करेगा. इस बातचीत में सामानों के लिए मार्केट तक पहुंच, कस्टम के नियम, आपसी विवादों को सुलझाना और व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटों को दूर करना शामिल है.

भारत के निर्यातकों के लिए मेक्सिको एक बहुत बड़ा और रणनीतिक बाजार है, क्योंकि मेक्सिको सीधे तौर पर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका की ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ा हुआ है. दोनों देश मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.

ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स: गाड़ियां, स्पेयर पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान.
फार्मास्युटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज: भारतीय दवा कंपनियों के लिए मेक्सिको एक बड़ा मार्केट बन सकता है.
एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल्स: क्लीन एनर्जी और आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी खनिज.
केमिकल्स और एग्री-फूड: रसायन उद्योग और कृषि उत्पाद.

साथ ही, दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को स्पीड देने के लिए 2027 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च में मेक्सिको के बड़े कारोबारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर आने वाला है, जहां बी2बी बैठकें होंगी.

ट्रंप, मेक्सिको और अमेरिका की खींचतान

इस समझौते की टाइमिंग का खेल समझने के लिए अमेरिका और मेक्सिको के मौजूदा रिश्तों पर नजर डालना जरूरी है. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मेक्सिको से सटी सीमा पर कड़े नियम लागू किए हैं. शरणार्थियों के आने पर रोक लगा दी गई है, बॉर्डर पर फौज तैनात कर दी गई है और मेक्सिको पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वो अपने यहां से अमेरिका जाने वाले लोगों को रोके.

ट्रंप सरकार के इन कड़े तेवरों की वजह से मेक्सिको ग्लोबल लेवल पर अपने कारोबार और पैसे बढ़ाने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है. ऐसे में, भारत जैसी तेजी से उभरती हुई आर्थिक ताकत मेक्सिको के लिए एक बहुत ही मजबूत और भरोसेमंद साथी बनकर सामने आ रही है.

पीएम मोदी और राष्ट्रपति क्लॉडिया शेनबाम की कूटनीति

इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते की नींव असल में जून 2025 में कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पड़ी थी. वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेक्सिको की राष्ट्रपति डॉ क्लॉडिया शेनबाम के बीच एक द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी. दोनों नेताओं ने भारत-मेक्सिको साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया था और उसी का नतीजा है कि आज दोनों देश औपचारिक ट्रेड पैक्ट की मेज पर आमने-सामने बैठे हैं.

कहीं ये पाकिस्तान का जवाब तो नहीं?

अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या भारत के इस कदम का कोई छिपा हुआ रणनीतिक संदेश भी है? अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट्स इस कदम को कई मायनों में बेहद अहम मान रहे हैं.

अमेरिका और पाकिस्तान का समीकरण: अमेरिका एशिया पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है. अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान मिलने वाली मदद का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए करता है, फिर भी वो उसे फंडिंग देने से बाज नहीं आता. अब अमेरिका को भी अपने ही पड़ोस से कड़ा सबक मिलने वाला है. अमेरिका चाहे दक्षिण एशिया या पाकिस्तान को लेकर कोई भी रुख अपनाए, भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति पूरी तरह से आजाद है. भारत किसी के दबाव में काम करने के बजाय हमेशा अपने देश के हितों को सबसे ऊपर रखता है.
‘ग्लोबल साउथ’ को एकजुट करने का भारत का विजन : मेक्सिको लैटिन अमेरिका की एक बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत लंबे समय से ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आवाज बनता रहा है. मेक्सिको के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाकर भारत लैटिन अमेरिका में अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत कर रहा है.
चीन के प्रभाव को चुनौती : लैटिन अमेरिका के कई देशों में चीन अपनी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) और भारी कर्ज कूटनीति के जरिए पैठ बनाने की कोशिश करता रहा है. भारत का ये कदम मेक्सिको जैसे बड़े देश को एक पारदर्शी, संतुलित और भरोसेमंद विकल्प प्रदान करता है.

एक नया अध्याय और भारत के लिए बड़े अवसर

भारत-मेक्सिको व्यापार वार्ता सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि ये बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था का एक स्पष्ट संकेत है. जहां एक तरफ दुनिया के कई बड़े देश संरक्षणवाद और सीमाएं सील करने में लगे हैं, वहीं भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक दायरे को लगातार फैला रहा है.

मेक्सिको के साथ ये समझौता भारतीय कारोबारियों, फार्मा कंपनियों और टेक सेक्टर के लिए लैटिन अमेरिका के दरवाजे खोलेगा और साथ ही दुनिया को ये संदेश भी देगा कि भारत अपनी कूटनीतिक चालें अपने हिसाब से ही चलता है!

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj