Bikaner News: ऊंटनी के दूध में गाय-भैंस की मिलावट अब पकड़ेगी DNA किट, राजस्थान वेटरनरी यूनिवर्सिटी को पेटेंट

Last Updated:August 23, 2026, 14:58 IST
Bikaner News: बीकानेर स्थित राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में गाय या भैंस के दूध की मिलावट पकड़ने के लिए अभिनव DNA किट तकनीक विकसित की है. भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से इस तकनीक को पेटेंट भी मिल गया है. इससे ऊंटनी के दूध की शुद्धता, गुणवत्ता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
बीकानेर. ऊंटनी के दूध में गाय अथवा भैंस के दूध की मिलावट अब आसानी से पकड़ी जा सकेगी. राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक अभिनव डीएनए किट तकनीक विकसित की है. वैज्ञानिकों की इस तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट प्रदान किया है. विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि ऊंटनी के दूध की शुद्धता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में ऊंटनी के दूध की मांग लगातार बढ़ रही है. ऊंटनी के दूध से अलग-अलग प्रकार के दुग्ध उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं. मांग बढ़ने के साथ ही दूध में दूसरी प्रजातियों के पशुओं के दूध की मिलावट की आशंका भी बनी रहती है. अब तक इसकी पहचान के लिए सरल, तेज और उपयोगी जांच तकनीक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित डीएनए किट इस समस्या के समाधान में उपयोगी साबित हो सकती है.
इस तकनीक के माध्यम से पता चलेगा मिलावट का
इस तकनीक के माध्यम से ऊंटनी के दूध के नमूने की जांच कर यह पता लगाया जा सकेगा कि उसमें गाय अथवा भैंस का दूध मिलाया गया है या नहीं. इससे न केवल उपभोक्ताओं को शुद्ध ऊंटनी का दूध उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी, बल्कि दूध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी. पशुपालकों और ऊंटनी के दूध से जुड़े उद्योगों के लिए भी यह तकनीक लाभकारी मानी जा रही है. यह पेटेंट डॉ. अमित कुमार पाण्डेय, डॉ. प्रमोद मोहता, प्रो. बी.एन. श्रृंगी, स्वर्गीय डॉ. सुनील माहेरचंदानी, डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. कृतिका गहलोत, डॉ. चैत्री शर्मा और डॉ. वेद प्रकाश के लंबे समय से किए जा रहे शोध का परिणाम है. वैज्ञानिकों की टीम ने ऊंटनी के दूध में दूसरी प्रजाति के पशुओं के दूध की मिलावट की सटीक पहचान के उद्देश्य से इस तकनीक को विकसित किया है.
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से विकसित यह अनुसंधान प्रयोगशाला से आगे बढ़कर पशुपालकों, उपभोक्ताओं और संबंधित उद्योगों के लिए उपयोगी तकनीक के रूप में विशेष महत्व साबित होगा. इससे ऊंटनी के दूध की शुद्धता की जांच आसान होने के साथ उसके विपणन में भी विश्वसनीयता बढ़ेगी. कुलगुरु ने वैज्ञानिकों से भविष्य में शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने का आह्वान किया. विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि से ऊंटपालन और ऊंटनी के दूध से जुड़े व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है. साथ ही मिलावट रोकने और उपभोक्ताओं तक प्रमाणित दूध पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी. यह पेटेंट ऊंट अनुसंधान के क्षेत्र में बीकानेर और विश्वविद्यालय की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगा.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 23, 2026, 14:58 IST



