Rajasthan Primary School | Rajasthan Government School

जयपुर. राजस्थान में एक तरफ सरकार खुद 611 स्कूलों के पास भवन नहीं होने की बात मान रही है. कहीं बच्चे पिंजरेनुमा जगह में पढ़ रहे हैं, कहीं तबेले में स्कूल चल रहा है, तो कहीं दुकान या पेड़ों के नीचे बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं. दूसरी तरफ जयपुर में सिस्टम की लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां करीब 32 लाख रुपये खर्च कर नया स्कूल भवन तो बना दिया गया, लेकिन पिछले करीब तीन साल से उस पर ताला लगा हुआ है. हैरानी की बात यह है कि यह बंद स्कूल भवन उस पिंजरेनुमा स्कूल से महज 500 मीटर की दूरी पर है, जहां बच्चों के पास पढ़ने के लिए अपना भवन ही नहीं है.
जयपुर की भट्टा बस्ती के न्यू संजय नगर का यह मामला अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है. यहां बच्चों को पढ़ने के लिए भवन की जरूरत है, लेकिन लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया सरकारी स्कूल खाली पड़ा है. एक तरफ बच्चे जगह की कमी से जूझ रहे हैं और दूसरी तरफ तैयार भवन का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा.
तीन साल पहले बनकर तैयार हुई बिल्डिंग, फिर भी लगा रहा तालान्यू संजय नगर में स्कूल की नई बिल्डिंग करीब तीन साल पहले बनकर तैयार हो गई थी. इससे पहले यहां स्कूल में करीब 166 बच्चे पढ़ते थे. पुराने स्कूल भवन के जर्जर होने के बाद बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया. इसके बाद नई बिल्डिंग बन गई, लेकिन उसमें बच्चों की कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं और भवन पर ताला लग गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके बच्चे पहले इसी स्कूल में पढ़ते थे. पुराने भवन की हालत खराब होने के बाद बच्चों को दूसरे स्कूल में भेज दिया गया था. उम्मीद थी कि नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद बच्चे फिर से अपने इलाके के स्कूल में पढ़ सकेंगे. लेकिन भवन बनने के बाद भी स्कूल शुरू नहीं हुआ. अब तीन साल बीत चुके हैं और बच्चे आज भी दूसरे स्कूलों में जाने को मजबूर हैं.
500 मीटर दूर पिंजरे में पढ़ रहे बच्चेमामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस बंद पड़े स्कूल भवन से करीब 500 मीटर दूर एक स्कूल पिंजरेनुमा जगह में चल रहा है. वहां बच्चों के पास अपना स्कूल भवन नहीं है. यानी एक ही इलाके में एक तरफ भवन के बिना बच्चे पढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ लाखों रुपये से बना नया सरकारी स्कूल खाली पड़ा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में बच्चों के लिए पास में स्कूल नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है. छोटे बच्चों को दूर के स्कूलों में जाना पड़ रहा है. दूरी की वजह से कुछ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है और स्थानीय लोगों के अनुसार कई बच्चों को पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी. जिस भवन का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई के लिए होना चाहिए था, वह लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है.
बंद भवन को नशे का अड्डा बनाने का आरोपस्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबे समय से बंद पड़े इस स्कूल भवन का कुछ लोगों ने नशा करने के अड्डे के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. जिस जगह पर बच्चों की कक्षाएं लगनी चाहिए थीं, वहां ताला लटका रहने से आसपास के लोगों में भी नाराजगी है.
सरकार के आंकड़े और जमीन की तस्वीर में बड़ा फर्क
राजस्थान में स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर सरकार के सामने पहले से सवाल खड़े हैं. सरकार ने विधानसभा में माना है कि प्रदेश में 611 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं. ऐसे में जयपुर में बना-बनाया स्कूल भवन तीन साल तक बंद रहना सिस्टम की योजना और कामकाज दोनों पर सवाल खड़े करता है. मामले को लेकर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी सवाल उठाए. वहीं हवामहल क्षेत्र के विधायक बालमुकुंदाचार्य से जब इस बारे में पूछा गया कि एक तरफ पास में बच्चे पिंजरेनुमा स्कूल में पढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ नया सरकारी भवन खाली पड़ा है, तो उन्होंने इसे गलत माना. विधायक ने इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया और कहा कि जल्द ही बच्चों को इस स्कूल में भेजने की व्यवस्था शुरू की जाएगी.
यदि भवन तैयार हैं तो कमरे बंद क्यों?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब करीब 32 लाख रुपये खर्च कर स्कूल भवन तैयार हो चुका था, तो वह तीन साल तक बंद क्यों रहा. ढाई साल से प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बावजूद इस भवन को शुरू करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की गई. भट्टा बस्ती के न्यू संजय नगर की यह तस्वीर सिर्फ एक बंद स्कूल की नहीं है. यह उस व्यवस्था का सवाल है, जहां एक तरफ बच्चे भवन के इंतजार में पिंजरे जैसी जगह में पढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ उनके पास ही लाखों रुपये से बना स्कूल बच्चों के बजाय ताले के भरोसे पड़ा है.



