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Castor Plant Benefit: हथेली जैसी पत्तियां, बीजों से निकलता है तेल, जानिए अरंडी के पौधे की खासियत

Last Updated:October 23, 2026, 22:30 IST

Lakhimpur Kheri News: खेतों के किनारे या खाली जगहों पर उगने वाला अरंडी का पौधा अपनी बड़ी, हथेली जैसी पत्तियों के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है. ग्रामीण इलाकों में इसके बीजों से निकाले जाने वाले तेल का लंबे समय से पारंपरिक इस्तेमाल होता रहा है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के मुताबिक, जानिए अरंडी के पौधे की खासियत, इसके तेल के उपयोग और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां.

लखीमपुर खीरी. खेतों के किनारे या खाली जगहों पर आपने अरंडी का पौधा जरूर देखा होगा. इसकी पत्तियां हथेली की तरह फैली होती हैं. कई लोग इसे सामान्य झाड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसका इस्तेमाल लंबे समय से पारंपरिक तरीकों से किया जाता रहा है. खासकर इसके बीजों से निकाले जाने वाले अरंडी के तेल का आयुर्वेद में भी उपयोग होता है.

तराई क्षेत्र में खेतों, खाली स्थानों और ग्रामीण इलाकों के आसपास अरंडी का पौधा आसानी से मिल जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Ricinus communis है. यह आमतौर पर झाड़ी के रूप में उगता है. इसकी पत्तियां बड़ी और चमकदार होती हैं, जिनमें सामान्य तौर पर 5 से 12 खंड होते हैं. अरंडी की कुछ किस्मों में पत्तियों का रंग गहरा हरा, लाल या गहरा बैंगनी भी दिखाई देता है.

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, अरंडी चौड़ी पत्तियों वाला एक झाड़ीदार पौधा है. इसके बीजों से तेल निकाला जाता है, जिसका आयुर्वेदिक चिकित्सा में कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी अरंडी का तेल काफी जाना-पहचाना है. इसके पारंपरिक इस्तेमाल के कारण आज भी कई घरों में इसे रखा जाता है.

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ग्रामीण इलाकों में अरंडी की पत्तियों का इस्तेमाल दर्द और सूजन जैसी समस्याओं के लिए घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता रहा है. कई जगहों पर पत्ते को हल्का गर्म करके उस पर तेल लगाया जाता है और प्रभावित हिस्से पर बांधा जाता है. जोड़ों के दर्द, मोच या शरीर के किसी हिस्से में स्थानीय सूजन होने पर भी कुछ लोग इस तरीके को अपनाते हैं. हालांकि, यह किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं है और इसके इस्तेमाल से राहत मिलने की गारंटी नहीं है.

अरंडी का तेल लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग इसे बालों की जड़ों और सिर की त्वचा पर लगाते हैं. इसका इस्तेमाल बालों को मुलायम रखने और कंडीशनिंग के लिए किया जाता है. इसमें मौजूद वसायुक्त तत्व बालों और स्कैल्प को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, अरंडी का तेल बालों को तेजी से बढ़ाने का प्रमाणित इलाज नहीं है. कुछ लोग इसे नारियल तेल या दूसरे हेयर ऑयल के साथ मिलाकर भी लगाते हैं.

अरंडी के पौधे के सभी हिस्से खाने या सीधे इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित नहीं हैं. खासकर इसके बीजों में विषैला पदार्थ पाया जाता है, जो गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए अरंडी के बीजों को कभी न खाएं और न ही घरेलू उपचार के तौर पर इस्तेमाल करें. किसी स्वास्थ्य समस्या के लिए अरंडी या इसके तेल का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है.

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October 23, 2026, 22:30 IST

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