Chach se sabji kaise banaye | Dholpur Famous Food | छाछ से बनती हैं ये 5 देसी सब्जियां | Rajasthani Traditional Sabji |

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धौलपुर की रसोई में छाछ से बनती हैं 5 देसी सब्जियां, नाम और स्वाद दोनों खास
Last Updated:September 11, 2026, 08:46 IST
Chach Se Sabji Kaise Banaye: धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में छाछ यानी मही से कई पारंपरिक सब्जियां बनाई जाती हैं. आलन की सब्जी, लौकी के कोफ्ते, मही आलू, अरबी के पत्तों की सब्जी और बेसन मीड़ा ऐसी ही पांच देसी डिश हैं. इनमें छाछ के साथ स्थानीय सब्जियों, बेसन, बाजरे के आटे और देसी मसालों का इस्तेमाल होता है. मौसम के अनुसार बनने वाली इन सब्जियों का स्वाद आज भी ग्रामीण रसोई की खास पहचान है.
सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात, अगर कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन हो तो छाछ से कई तरह की देसी सब्जियां बनाई जा सकती हैं. धौलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में छाछ से बनने वाली इन पारंपरिक सब्जियों का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. गांवों में छाछ का इस्तेमाल सिर्फ पीने के लिए ही नहीं, बल्कि कई लाजवाब व्यंजन और सब्जियां बनाने के लिए भी किया जाता है. आलन की सब्जी, लौकी के कोफ्ते, मही आलू, अरबी के पत्तों की सब्जी और बेसन मीड़ा ऐसी ही पांच देसी सब्जियां हैं, जिन्हें ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर पसंद किया जाता है. इन सब्जियों की खासियत यह है कि इनमें देसी स्वाद के साथ घर में आसानी से मिलने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि आज भी गांवों की रसोई में छाछ से बनने वाली इन पारंपरिक सब्जियों का स्वाद बरकरार है.
सर्दियों के मौसम में धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आलन की सब्जी बड़े चाव से बनाई जाती है. इसे बथुआ, पालक, मूली के पत्ते और सरसों के पत्तों से तैयार किया जाता है. इसमें बाजरे का आटा और छाछ मिलाई जाती है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देती है. गरमा-गरम बाजरे की रोटी के साथ आलन की सब्जी का स्वाद बेहद शानदार लगता है. ग्रामीण इलाकों में यह सब्जी खास तौर पर बुजुर्गों को पसंद आती है. मान्यता है कि सर्दियों में इसे खाने से शरीर को भीतर से गर्माहट महसूस होती है.
धौलपुर के गांवों में लौकी के कोफ्ते की सब्जी आज भी पारंपरिक पसंद बनी हुई है. लौकी, बेसन और छाछ से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ हल्की भी होती है. इसे रोटी, पराठे या गरमा-गरम बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है. खास बात यह है कि इसका स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को पसंद आता है. गांवों की पारंपरिक रसोई में बनने वाली यह सब्जी कम सामग्री में तैयार हो जाती है और देसी स्वाद की वजह से आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है.
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धौलपुर के गांवों में लौकी के कोफ्ते की सब्जी आज भी पारंपरिक पसंद बनी हुई है. लौकी, बेसन और छाछ से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ हल्की भी होती है. इसे रोटी, पराठे या गरमा-गरम बाजरे की रोटी के साथ परोसा जाता है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को इसका देसी स्वाद पसंद आता है. खास बात यह है कि गांवों की पारंपरिक रसोई में कम सामग्री से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वाद और सादगी का बेहतरीन मेल मानी जाती है.
बरसात के मौसम में धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में अरबी के पत्तों की सब्जी खूब पसंद की जाती है. इसे बेसन, दही और देसी मसालों के साथ तैयार किया जाता है. गृहिणी गीता शर्मा के मुताबिक, इसमें कसूरी मेथी और सूखा पुदीना डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गरमा-गरम रोटी या पराठे के साथ अरबी के पत्तों की यह सब्जी बेहद स्वादिष्ट लगती है. बरसात के मौसम में बनने वाली यह पारंपरिक सब्जी गांवों की रसोई में आज भी अपनी खास जगह बनाए हुए है.
धौलपुर की पारंपरिक रसोई में बेसन मीड़ा की सब्जी भी अपनी खास पहचान रखती है. इसे बेसन, छाछ, देसी मसालों और तड़के के साथ तैयार किया जाता है. कम सामग्री में जल्दी तैयार होने वाली यह देसी सब्जी गांवों में आज भी खूब पसंद की जाती है. गरमा-गरम बाजरे या गेहूं की रोटी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. सादगी से तैयार होने के बावजूद इसका देसी स्वाद इसे ग्रामीण इलाकों के पसंदीदा पारंपरिक व्यंजनों में शामिल करता है.
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September 11, 2026, 08:46 IST



