संकष्टी चतुर्थी पर करें इस मंत्र का जाप, विघ्न-बाधाएं होंगी दूर, खुलेगा सुख-समृद्धि का मार्ग, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

Last Updated:June 23, 2026, 16:53 IST
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक गणपति बप्पा की उपासना करता है, उसके जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा का विधान बताया गया है.
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अयोध्या: वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. जो इस वर्ष 3 जुलाई को मनाया जाएगा. यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है और धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्रीगणेश की पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट, बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं. पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 3 जुलाई को सुबह 11:20 बजे से प्रारंभ होगी और 4 जुलाई को दोपहर 12:39 बजे तक रहेगी. इस बार संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है, जिसे पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक गणपति बप्पा की उपासना करता है, उसके जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा का विधान बताया गया है. संकष्टी चतुर्थी के दिन उनका व्रत और पूजन करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और कार्यों में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है.
ऐसे रखें व्रत
पंडित कल्कि राम ने बताया कि इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए.इसके बाद पूजा स्थान को साफ-सुथरा कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पूजा में दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें लाल फूल, अक्षत, धूप, दीप, चंदन, दूर्वा तथा मोदक या लड्डू अर्पित करें.गणेश मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है. दिनभर व्रत रखते हुए भक्तों को भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए और शाम के समय पुनः पूजा-अर्चना करनी चाहिए.संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा भी मानी जाती है.
इस मंत्र का करें जाप
धार्मिक दृष्टि से संकष्टी चतुर्थी का व्रत केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और आस्था का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से संतान सुख, धन-धान्य, बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है. जिन लोगों के जीवन में लगातार बाधाएं, आर्थिक परेशानियां या मानसिक तनाव बने रहते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है. इस दिन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप, गणेश चालीसा का पाठ और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना भी शुभ माना गया है.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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