30 लाख का कर्ज लेकर एवरेस्ट फतह किया, अब एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराएंगी झुंझुनूं की बेटी

Last Updated:August 08, 2026, 11:58 IST
Mountaineer Dr. Asha Jhajharia Success Story: झुंझुनूं की बेटी और एवरेस्ट विजेता डॉ. आशा झाझड़िया एक बार फिर देश का तिरंगा दुनिया की ऊंची चोटियों पर फहराने की तैयारी में हैं. नारी शक्ति तिरंगा अभियान-2026 के तहत वे अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ाई करेंगी. खास तौर पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 5642 मीटर ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य है. आशा ने 22 मई 2017 को माउंट एवरेस्ट फतह कर तिरंगा फहराया था. करीब 7000 मीटर की ऊंचाई पर खतरनाक हालात और पर्वतारोहियों के शव देखने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. अब पिता के निधन के बाद उनकी यादों और आशीर्वाद को ताकत बनाकर वे नई चुनौती के लिए तैयार हैं.
झुंझुनूं की बेटी और एवरेस्ट विजेता डॉ. आशा झाझड़िया एक बार फिर देश का तिरंगा दुनिया की ऊंची चोटियों पर फहराने की तैयारी में हैं. नारी शक्ति तिरंगा अभियान-2026 के तहत वे अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ाई करेंगी. खास बात यह है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वे माउंट एल्ब्रुस की 5642 मीटर ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और नारी सशक्तिकरण का संदेश देंगी.
आपको बता दें कि माउंट किलिमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस कि ऊंचाई 5642 मीटर है. डॉ. आशा के लिए पर्वतारोहण सिर्फ ऊंची चोटियों को फतह करने का जुनून नहीं, बल्कि महिलाओं की क्षमता को दुनिया के सामने साबित करने का माध्यम भी रहा है. 22 मई 2017 को उन्होंने 8848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था. एवरेस्ट अभियान से पहले उन्होंने दार्जिलिंग में बेसिक और एडवांस माउंटनियरिंग का प्रशिक्षण लिया था. कठिन तैयारियों के बाद 8 अप्रैल 2017 को अभियान शुरू किया.
आशा झाझड़िया ने बताया कि एवरेस्ट की चढ़ाई के दौरान आशा को ऐसे हालातों का सामना करना पड़ा, जहां बड़े-बड़े पर्वतारोहियों का हौसला टूट सकता था. करीब 7000 मीटर की ऊंचाई पर उन्हें रास्ते में कई पर्वतारोहियों के शव दिखाई दिए. खतरा सामने था और वापस लौटने का विकल्प भी मौजूद था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. परिवार और अपनी बेटी के भविष्य को याद करते हुए उन्होंने कदम आगे बढ़ाए और आखिरकार एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहरा दिया.
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आज जब डॉ. आशा नई चोटियों की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही हैं, इसी दौरान उनके पिता मोहरसिंह झाझड़िया का निधन हो गया. सिंघाना स्थित अपने पीहर पहुंचीं आशा ने अपने पिता को याद करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा उनके सपनों को पूरा करने के लिए हौसला दिया. अब अगली चुनौती के लिए वे पिता की स्मृतियों और आशीर्वाद को अपनी ताकत मान रही हैं.
पर्वतारोहण के साथ डॉ. आशा ने खेल की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई है. एवरेस्ट फतह करने के बाद उन्होंने एयर पिस्टल शूटिंग को अपना नया लक्ष्य बनाया. राजस्थान प्री-स्टेट पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता में जयपुर में 10 और 25 मीटर वर्ग में स्वर्ण पदक जीते. राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 10 मीटर में कांस्य और 25 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया. नार्थ जोन चैंपियनशिप में भी उन्होंने 10 मीटर वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया.
आशा के पर्वतारोहण के सफर की शुरुआत भी एक दिलचस्प घटना से जुड़ी है. वर्ष 2015 में अमरनाथ यात्रा के दौरान भारतीय सेना के एक अधिकारी ने उनकी तेज गति और क्षमता की तारीफ की थी. यही छोटी-सी बात उनके मन में घर कर गई और उन्होंने खुद से बड़ा लक्ष्य तय किया. इसके बाद प्रशिक्षण और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने एवरेस्ट अभियान की तैयारी की. आशा ने बताया कि अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 30 लाख रुपये का कर्ज तक लिया था.
डॉ. आशा की कहानी सिर्फ पर्वतारोहण या पदक जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच के खिलाफ संघर्ष है जो बेटियों को कमजोर या बोझ मानती है. वे मानती हैं कि बेटियां अपने परिवार को गौरवान्वित करने की ताकत और हिम्मत रखती है. अब 15 अगस्त को एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराकर वे इसी संदेश को और मजबूती देना चाहती हैं. एवरेस्ट से लेकर शूटिंग रेंज और अब यूरोप की सबसे ऊंची चोटी तक आशा का सफर साबित करता है कि लक्ष्य बड़ा हो तो परिस्थितियां रास्ता रोक सकती हैं, लेकिन मंजिल नहीं.
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August 08, 2026, 11:58 IST



