Dholpur Tourism | best place for Tourism in dholpur| Top 3 Places to Visit in Dholpur

Last Updated:September 26, 2026, 09:06 IST
Places to visit in Dholpur: राजस्थान के धौलपुर में आप मात्र 10 रुपये में तीन ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण कर सकते हैं. इन इमारतों में एंट्री बिल्कुल फ्री है और 10 रुपये केवल बस स्टैंड से यहां तक पहुंचने का ऑटो किराया है. इन स्थानों में 1904 में बनी ऐतिहासिक नगर पालिका, 150 फीट ऊंचा निहाल टावर (घंटाघर) और 1935 में बनी ऐतिहासिक लाइब्रेरी शामिल हैं. यहां आप लाल पत्थर की अद्भुत वास्तुकला, क्रांतिकारियों के संघर्ष की कहानी और 30 हजार दुर्लभ पुस्तकों का अनमोल संग्रह देख सकते हैं. यह एक बेहतरीन और बजट फ्रेंडली ट्रिप है.
राजस्थान के धौलपुर जिले में कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी अपने भीतर पुराने दौर की विरासत और इतिहास को संजोए हुए हैं. अगर आप इतिहास और स्थापत्य को करीब से देखना चाहते हैं और धौलपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो महज 10 रुपये के टेंपो किराए में शहर की तीन ऐतिहासिक इमारतों की सैर कर सकते हैं. खास बात यह है कि इन इमारतों में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. धौलपुर बस स्टैंड से यहां तक पहुंचने के लिए करीब 10 रुपये का टेंपो किराया देना पड़ता है. इन ऐतिहासिक इमारतों की खास पहचान धौलपुर के लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बनी उनकी खूबसूरत संरचनाएं हैं.
धौलपुर की ऐतिहासिक इमारतों की खूबसूरती में यहां के लाल और सफेद बलुआ पत्थर की अहम भूमिका है, जो इन्हें शाही पहचान देता है. अगर आप उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से धौलपुर घूमने आ रहे हैं, तो रोडवेज बस स्टैंड पर उतरकर करीब 10 रुपये के टेंपो किराए में ऐतिहासिक नगर पालिका भवन पहुंच सकते हैं. महाराजा राणा रामसिंह के शासनकाल में वर्ष 1904 में निर्मित यह इमारत रियासत काल में टाउन काउंसिल भवन यानी नगर पालिका के रूप में इस्तेमाल होती थी.
महाराजा राणा रामसिंह इस टाउन काउंसिल के अध्यक्ष थे और धौलपुर रियासत से जुड़े प्रशासनिक कामकाज का संचालन इसी भवन से होता था. आजादी के बाद भी यह इमारत लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनी रही. गुंबदनुमा स्थापत्य वाली यह ऐतिहासिक इमारत आज भी राजतंत्र से लोकतंत्र तक के बदलाव की गवाह मानी जाती है. यहां पहुंचकर पर्यटक धौलपुर के पुराने प्रशासन और रियासतकालीन व्यवस्था की झलक करीब से देख सकते हैं.
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अगर आप देश के प्रमुख ऐतिहासिक घंटाघरों में शामिल धौलपुर के निहाल टावर को देखना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए खास हो सकती है. धौलपुर बस स्टैंड से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित यह करीब 150 फीट ऊंचा और 8 मंजिला घंटाघर आज भी अपनी भव्य संरचना से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. इसकी छठवीं मंजिल पर चारों दिशाओं में विशाल घड़ियां लगी हुई हैं. स्थानीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 1946 में इसी घंटाघर के नीचे क्रांतिकारियों ने जय हिंद संघ की स्थापना की थी और अपने रक्त से हस्ताक्षर किए थे.
निहाल टावर आज भी धौलपुर के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यादों को अपने भीतर समेटे हुए है. धौलपुर के प्रसिद्ध लाल पत्थर से बनी यह इमारत शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाती है. टावर की भव्य संरचना को देखकर रियासतकालीन दौर के साथ स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांतिकारियों के संघर्ष की यादें ताजा हो जाती हैं.
अगर आपको ऐतिहासिक और दुर्लभ किताबें पढ़ने का शौक है, तो धौलपुर की ऐतिहासिक लाइब्रेरी आपके लिए खास जगह हो सकती है. धौलपुर बस स्टैंड से महज 10 रुपये के टेंपो किराए में यहां पहुंचा जा सकता है. वर्ष 1935 में महाराजा राणा उदयभान सिंह ने इस भव्य इमारत का निर्माण सिटी जुबली हॉल के नाम से करवाया था. लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बनी यह शाही इमारत आज भी अपनी खूबसूरत वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है.
इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी में करीब 30 हजार दुर्लभ पुस्तकें मौजूद हैं, जिनमें कई किताबें रियासतकाल के दौरान ही संकलित की गई थीं. यहां प्रसिद्ध कवि श्यामलदास की चर्चित पुस्तक ‘वीर विनोद’ के कई खंड भी सुरक्षित हैं. इतिहास, साहित्य और दुर्लभ पुस्तकों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह लाइब्रेरी किसी खजाने से कम नहीं है.
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September 26, 2026, 09:06 IST



