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Famous Temple: 600 साल पुराना वेवर महादेव धाम, 9 धूणियां और 10 KM लंबी गुफा से जुड़ी है अनोखी मान्यताएं

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9 धूणियों की तपोभूमि, अष्टधातु त्रिशूल और 10 KM गुफा, अनोखा है वेवर महादेव धाम

Last Updated:August 10, 2026, 11:41 IST

Rajsamand Famous Shiva Temple: राजसमंद के आमेट क्षेत्र में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित करीब 600 साल पुराना वेवर महादेव मंदिर सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. नौ धूणियों की तपोभूमि और विशाल अष्टधातु त्रिशूल इस शिवधाम की खास पहचान हैं. मान्यता है कि मेवाड़ के तत्कालीन भीम सिंह ने यहां शिवलिंग की स्थापना करवाई थी. मंदिर से जुड़ी वेवर माता की मान्यता और अरावली की पहाड़ियों तक जाने वाली करीब 10 किलोमीटर लंबी प्राचीन गुफा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. सावन में यहां दूर-दूर से भक्त पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर रहे हैं.

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Amazon Prime DayTop Deals Inside9 धूणियों की तपोभूमि, अष्टधातु त्रिशूल और 10 KM गुफा, अनोखा है वेवर महादेव धामZoomराजसमंद के चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित करीब 600 साल पुराना वेवर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है

राजसमंद. राजस्थान के राजसमंद जिले के आमेट क्षेत्र में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित वेवर महादेव मंदिर इन दिनों सावन माह में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. करीब 600 साल पुराने इस प्राचीन शिवधाम में दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपने प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है. मंदिर परिसर में नौ धूणियों की तपोभूमि, विशाल अष्टधातु त्रिशूल और भैरुजी बावजी मंदिर से जुड़ी प्राचीन गुफा इसे खास बनाती है.

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस स्थान का संबंध मेवाड़ के तत्कालीन शासक भीम सिंह से रहा है. बताया जाता है कि उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना करवाई थी. इसके बाद साधु-संतों और सिद्ध योगियों ने यहां नौ धूणियां स्थापित कीं, जिसके चलते यह स्थान तपस्या और साधना की भूमि के रूप में प्रसिद्ध हुआ. सावन में मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है और दिनभर भगवान शिव के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहता है.

वेवर माता के चमत्कार से जुड़ी है नाम की कहानी

स्थानीय मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में इस स्थान को भीमाशंकर महादेव के नाम से जाना जाता था. बाद में भैरूनाथ की गुफा में विराजित वेवर माता से जुड़ी मान्यताओं और उनके चमत्कार के बाद इस शिवधाम का नाम वेवर महादेव प्रचलित हुआ. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि वेवर महादेव से जुड़ी आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है और आसपास के ग्रामीणों के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी यहां पूजा-अर्चना करते हैं.

अष्टधातु त्रिशूल है मंदिर की खास पहचान

वेवर महादेव मंदिर की एक प्रमुख विशेषता यहां स्थापित विशाल अष्टधातु त्रिशूल है. श्रद्धालुओं के बीच इस त्रिशूल को लेकर विशेष आस्था है. सावन के दौरान मंदिर पहुंचने वाले भक्त भगवान शिव के दर्शन के साथ त्रिशूल के भी दर्शन करते हैं. मंदिर परिसर में स्थित भैरुजी बावजी का स्थान भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है.

10 किलोमीटर लंबी गुफा से जुड़ा है रहस्य

मंदिर से जुड़ी सबसे खास मान्यताओं में प्राचीन गुफा भी शामिल है. बताया जाता है कि भैरुजी बावजी मंदिर परिसर से एक प्राचीन गुफा अरावली की पहाड़ियों में स्थित सिम माता मंदिर तक जाती है. इसकी लंबाई करीब 10 किलोमीटर बताई जाती है. हालांकि सुरक्षा कारणों से वर्तमान में इस गुफा को बंद रखा गया है.

टांक राज परिवार मंदिर में पूजा-अर्चना की निभा रहे परंपरा 

मंदिर के पुजारियों के अनुसार यहां समय-समय पर सफेद नाग देवता के दर्शन होने की भी मान्यता है. श्रद्धालु इसे भगवान शिव से जुड़ी आस्था के रूप में देखते हैं. वर्तमान में टांक राजपूत परिवार मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा निभा रहा है. हर साल महाशिवरात्रि पर मंदिर समिति के सानिध्य में भगवान भोलेनाथ की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है. राजसमंद मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित वेवर महादेव मंदिर आज इतिहास, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं का अनूठा संगम बना हुआ है. सावन में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के साथ मंदिर से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं को भी करीब से महसूस करते हैं.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Rajsamand,Rajasthan

First Published :

August 10, 2026, 11:41 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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