अजमेर और पाली समेत चार नगर निगमों में बीजेपी का कब्जा, कांग्रेस को मिला केवल बीकानेर

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनावों में सत्तारुढ़ बीजेपी विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर भारी पड़ी. बीजेपी ने मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्षों के चुनाव में कांग्रेस से जोरदार बढ़त ले ली. हालांकि अभी तक पूरे परिणाम सामने नहीं आए है लेकिन दोपहर ढाई बजे तक आए 200 निकायों के चुनाव परिणाम में बीजेपी ने 136 पर और कांग्रेस ने 59 निकायों पर अपना कब्जा जमा लिया. तीन निकायों में निर्दलीय और एक में माकपा तथा एक में आम आदमी पार्टी काबिज हुई है. बीजेपी ने आज जिन पांच नगर निगमों के परिणाम घोषित हुए हैं उनमें से उदयपुर, अजमेर, पाली और अलवर पर अपना कब्जा जमा लिया है. कांग्रेस केवल बीकानेर नगर निगम में ही अपना बोर्ड बना पाई है.
राजस्थान के 309 निकायों में 10 नगर नगर निगम हैं. इनमें जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर, पाली, अलवर और भीलवाड़ा शामिल हैं. इनमें से भीलवाड़ा और भरतपुर में पहले ही बीजेपी के प्रत्याशी निर्विरोध महापौर निर्वाचित हो चुके हैं. शेष आठ में पांच के उदयपुर, अजमेर, बीकानेर, पाली और अलवर के परिणाम आज आ गए हैं. इनसे बीकानेर को छोड़कर शेष चारों निगमों पर बीजेपी काबिज हो गई है. बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला हुआ था. वहां कांग्रेस का बोर्ड बन गया है.
भरतपुर और भीलवाड़ा निगम में पहले ही निर्विरोध मेयर बन चुके हैं
शेष बचे तीन नगर निगमों जयपुर, जोधपुर और कोटा में 25 सितंबर को महापौर का चुनाव होगा. इन तीन निगमों के आठ वार्डों के कुछ बूथों पर ईवीएम में आई तकनीकी खामी के कारण वहां पुर्नमतदान हुआ था. इसलिए उनके निकाय प्रमुख का चुनाव चार दिन आगे खिसका दिया गया है. इनके अलावा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के भी एक वार्ड में पुर्नमतदान हुआ था. वहां के पालिकाध्यक्ष का चुनाव भी 25 सितंबर को होगा. भरतपुर और भीलवाड़ा निगम के अलावा 30 अन्य निकायों में भी निकाय प्रमुख भी पहले ही निर्विरोध निवार्चित हो चुके हैं.
कांग्रेस तीन निगमों में बढ़त में होते हुए भी अपना महापौर नहीं बना पाई
बीजेपी ने आज जिन चार नगर निगमों में अपना महापौर बनाया उनमें से केवल उदयपुर में ही उसके पास बहुमत था. वहीं कांग्रेस के पास भी केवल बीकानेर में ही बहुमत था. शेष तीन पाली, अलवर और अजमेर में निर्दलीय किंग मेकर बने हुए थे. इन तीनों नगर निगमों में बीजेपी ने निर्दलीय पार्षदों का साध लिया. उसके बाद उसने कांग्रेस पर अपनी बढ़त बना ली. इसका नतीजा यह है कि पाली, अलवर और अजमेर में कांग्रेस पार्षदों की संख्या के लिहाज से बढ़त में होते हुए भी अपना मेयर नहीं बना पाई.
कांग्रेस निर्दलीयों को साध नहीं पाई
बीजेपी ने अपनी सॉलिड रणनीति के सहारे कांग्रेस की बढ़त वाले निगमों में भी अपनी जीत का परचम लहरा दिया. कांग्रेस को सबसे ज्यादा झटका अजमेर और पाली नगर निगम में लगा. अजमेर में तो बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी राजस्थान से बाहर कर्नाटक में की थी. लेकिन उसकी यह रणनीति काम नहीं आई. वह निर्दलीयों को पूरी तरह से साध नहीं पाई. इसके कारण वह अजमेर में मेयर पद से हाथ धो बैठी. वहीं पाली में तो कांग्रेस का उसके अपने ही पार्षदों ने साथ नहीं दिया. वहां कांग्रेस के पास 29 पार्षद होते हुए भी उसकी पार्टी के मेयर उम्मीदवार को केवल तीन वोट मिले. यानी कांग्रेस के 26 पार्षदों ने उसका साथ नहीं दिया.



