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kota news I मथुरा से कोटा तक पहुंचा स्वाद, 56 साल बाद भी कायम है ‘लालाजी’ के मिश्री मावे का जादू

कोटा. राजस्थान के कोटा की कचौरी जिस तरह अपने लजीज स्वाद के लिए मशहूर है, उसी तरह कोटा के भीतरी इलाके में 1970 से शुरू हुई मथुरा के लालाजी दही वाले की दुकान अपने स्वादिष्ट मिश्री मावे और रबड़ी के पारंपरिक स्वाद के लिए दूर-दूर तक पहचानी जाती है. शहर के व्यस्त रामपुरा बर्तन बाजार में स्थित ‘लालाजी दही वाले’ की दुकान पिछले 56 वर्षों से मिठास के शौकीनों की पहली पसंद बनी हुई है. करीब 56 साल पहले शुरू हुई इस दुकान ने अपने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के दम पर शहरवासियों के दिल में खास जगह बनाई है.

मथुरा से कोटा आकर शुरू की थी दुकान

दुकान के संचालक अशोक बताते हैं कि उनके पिताजी मदन लाल जी जिन्हें सब प्यार से लालाजी कहते थे करीब 1970 में मथुरा से कोटा आए थे, उन्होंने यहां आकर दूध और दही बेचने से इस काम की शुरुआत की थी. मथुरा से आने के कारण लोग उन्हें लालाजी कहने लगे और धीरे-धीरे दुकान का नाम ही ‘लालाजी’ के नाम से मशहूर हो गया. आज इस कारोबार को तीसरी पीढ़ी संभाल रही है और पिता के शुरू किए गए काम को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है.

शुद्ध दूध और लाल जी के हाथों का स्वाद

इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाली मिठाइयों की शुद्धता है. अशोक जी के अनुसार, मिठाइयों को तैयार करने में किसी भी प्रकार के केमिकल, एसेंस या मिलावटी रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. यहां बनने वाली मिठाइयों में केवल शुद्ध दूध, संतुलित चीनी, हरी इलायची, केसर और पिस्ता का उपयोग होता है. हर दिन ताजी मिठाइयां बनाई जाती हैं और उसी दिन बेची जाती हैं, ताकि ग्राहकों को हमेशा ताजा और उम्दा स्वाद मिले.

मिश्री मावा और मलाई बर्फी की भारी मांग

दुकान पर वैसे तो कई तरह के पारंपरिक मिठाइयां मिलती हैं, लेकिन यहां का मिश्री मावा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. इसके अलावा मलाई बर्फी, रबड़ी, रसमलाई, छेना रोल, मलाई रोल, मिल्क केक और बंगाली मिठाइयों की भी जबरदस्त मांग रहती है. सावन के महीने में यहां विशेष रूप से शुद्ध देशी अंदाज में घेवर भी तैयार किया जाता है, जिसे खरीदने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं.

तीसरी पीढ़ी ने भी रखा स्वाद को बरकरार

अशोक जी का कहना है कि आज के दौर में जहां कई जगह मिलावट का चलन बढ़ गया है, वहीं वे अपने पिता द्वारा तय किए गए उच्च मानकों से कोई समझौता नहीं करते. उनका मकसद ग्राहकों को 19 नहीं, बल्कि 21 यानी पहले से भी बेहतर स्वाद देना है. यही वजह है कि एक बार जो ग्राहक यहां का मिश्री मावा चख लेता है, वह बार-बार खींचा चला आता है.

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