कोरोना में छूटी नौकरी तो शुरू की डेयरी फार्मिंग, गौपालन से असरार कमा रहे 10 लाख, बने रोल मॉडल

Last Updated:August 14, 2026, 18:42 IST
Dairy Farming Success Story: पूर्णिया के मोहम्मद असरार आलम ने आपदा को अवसर में बदल दिया. कोरोना काल में नौकरी छोड़कर गौपालन शुरू की. आज रोजाना 100 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं. इससे सालाना 10 लाख रुपये कमा रहे हैं. उन्होंने गिरी और साहीवाल नस्ल की गायों से डेयरी व्यवसाय शुरू किया और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया. जानें इनकी सफलता की कहानी.
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पूर्णिया: आपदा को अवसर में कैसे बदला जाता है, इसकी मिसाल पेश की है बिहार के पूर्णिया जिले के कस्बा प्रखंड अंतर्गत देवधा गांव निवासी मोहम्मद असरार आलम ने. कोरोना महामारी के दौरान जब लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं, तब असरार ने भी अपनी नौकरी गंवा दी. लेकिन वे निराश नहीं हुए और पैतृक गांव लौटकर गौपालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया. आज वे अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सही इस्तेमाल से सालाना 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
नौकरी की तलाश छोड़ चुना देशी गौपालन का रास्तालगभग चार साल पहले कोरोना काल में बाहर की नौकरी छोड़कर जब मोहम्मद असरार आलम पूर्णिया स्थित अपने पैतृक गांव देवधा लौटे, तो उन्होंने किसी अन्य नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार की राह चुनी. परिवार में पहले से गौपालन की परंपरा रही थी. इसलिए उन्हें पशुपालन की बुनियादी बातों का अनुभव था. इसी अनुभव को उन्होंने व्यावसायिक रूप देने का फैसला किया.
‘देसी गौपालन विकास योजना’ से मिली नई उड़ानअसरार आलम ने बताया कि उन्होंने अपने व्यवसाय को बड़े पैमाने पर शुरू करने के लिए पूर्णिया जिला गव्य विकास कार्यालय की ‘देसी गौपालन विकास योजना’ का सहारा लिया. इस योजना के तहत वित्तीय व तकनीकी मदद पाकर उन्होंने गिरी और साहीवाल नस्ल की 15 गायों के साथ अपने डेयरी फॉर्म की नींव रखी.
रोजाना 100 लीटर दूध उत्पादन और बंपर कमाईवर्तमान में असरार के फॉर्म में उच्च नस्ल की गिरी और साहीवाल गायें हैं. जिनसे प्रतिदिन औसतन 100 लीटर दूध का उत्पादन होता है. इस दूध की आपूर्ति वे मुख्य रूप से सुधा डेयरी फार्म के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में करते हैं. शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दूध होने के कारण उन्हें बाजार में प्रीमियम भाव मिलता है. जिससे उनकी अच्छी कमाई हो रही है.
दूध के साथ वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (दही, घी, मक्खन) से बढ़ा मुनाफाव्यवसाय को केवल कच्चा दूध बेचने तक सीमित न रखते हुए असरार आलम ने अब इसका विस्तार किया है. वे दूध से दही, मक्खन और शुद्ध देसी घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं. इन वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के कारण उनके मुनाफे का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं और अपनी लगन के बदौलत वे आज सालाना ₹10 लाख का लाभ अर्जित कर रहे हैं.
ग्रामीण युवाओं के लिए बने प्रेरणाअसरार आलम की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए, तो अपने गांव में रहकर भी एक सफल और सम्मानजनक व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है. आज उनका डेयरी फॉर्म आसपास के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है.
About the AuthorAmit Ranjan
अमित रंजन वर्तमान में में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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August 14, 2026, 18:42 IST



