Maa Shakambhari Mata: चांदी की धरती को नमक में बदल दिया था माता ने, जानिए सांभर झील से जुड़ी मां शाकम्भरी की कहानी

Last Updated:October 13, 2026, 15:26 IST
Maa Shakambhari Mandir: जयपुर ग्रामीण के सांभर में स्थित मां शाकम्भरी का प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. लोककथा के अनुसार, माता ने चांदी की धरती को नमक में बदल दिया था. जानिए सांभर झील के रहस्य, अकाल में वनस्पतियां उत्पन्न करने की मान्यता और जहांगीर से जुड़ी मंदिर की रोचक कहानी.
जयपुर. राजस्थान में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और कहानियां आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं. ऐसा ही एक प्रसिद्ध शक्तिधाम जयपुर ग्रामीण के सांभर क्षेत्र में स्थित मां शाकम्भरी का मंदिर है. सांभर झील के किनारे पहाड़ी पर बने इस मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाने वाली मां शाकम्भरी का यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं और दिलचस्प लोककथाओं के लिए जाना जाता है.
मां शाकम्भरी के नाम के पीछे एक प्राचीन धार्मिक कथा प्रचलित है. मान्यता है कि पुराने समय में इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था. लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया था, तब मां भगवती ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए फल, सब्जियां, वनस्पतियां और कंद-मूल उत्पन्न किए. इससे लोगों को भोजन मिला और उनका जीवन बचा, वनस्पतियों के जरिए लोगों का पालन करने के कारण देवी का नाम शाकम्भरी पड़ा. आज भी भक्त मां को संकट दूर करने वाली और सबका कल्याण करने वाली देवी मानते हैं.
चांदी की धरती को नमक में बदलने की कहानी
मां शाकम्भरी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित लोककथा सांभर झील की उत्पत्ति को लेकर है. स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, एक समय माता की कृपा से इस क्षेत्र में चांदी जैसी कीमती संपदा प्रकट हुई थी. लेकिन धीरे-धीरे इस संपत्ति को लेकर लोगों के बीच लालच, विवाद और झगड़े बढ़ने लगे. इससे परेशान होकर लोगों ने माता से प्रार्थना की. मान्यता है कि इसके बाद माता ने चांदी की धरती को नमक में बदल दिया. इसी कहानी को सांभर झील से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, झील की वास्तविक उत्पत्ति प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से जुड़ी है. सांभर झील आज देश की प्रमुख अंतर्देशीय नमक झीलों में शामिल है और राजस्थान की खास पहचान भी है.
जहांगीर और अखंड ज्योति की अनोखी कथा
मंदिर से जुड़ी एक अन्य जनश्रुति मुगल बादशाह जहांगीर के समय की है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में जल रही अखंड ज्योति की परीक्षा लेने के लिए उसके ऊपर लोहे के सात मोटे तवे रखवाए गए थे, कहा जाता है कि माता के चमत्कार से तवे चीरकर ज्योति बाहर निकल आई. इस घटना के बाद जहांगीर द्वारा मंदिर परिसर में छतरी बनवाने की कहानी भी प्रचलित है. हालांकि, इस घटना की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण जरूरी हैं.
नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मंदिर के गर्भगृह में मां ब्रह्माणी और रुद्राणी के स्वरूपों की पूजा की जाती है. मंदिर से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में भोग की थालियां आपस में छू जाने के बाद माता के मुख के स्वरूप में बदलाव आया था. इसके बाद यहां तामसिक भोग की जगह सात्विक भोग लगाने की परंपरा शुरू होने की बात कही जाती है. शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. वहीं, भादवा सुदी अष्टमी पर लगने वाले मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पहाड़ी पर स्थित मंदिर से सांभर झील का प्राकृतिक नजारा भी दिखाई देता है. मां शाकम्भरी का यह धाम धार्मिक आस्था के साथ सांभर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. अकाल में लोगों को जीवन देने की मान्यता हो या चांदी की धरती को नमक में बदलने की कहानी, इन लोककथाओं ने सदियों से भक्तों की आस्था को जोड़कर रखा है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
October 13, 2026, 15:22 IST



