Vijwa Mata Mandir: राजस्थान में यहां विराजती हैं ‘डॉक्टर माता’, मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं कृत्रिम हाथ-पैर

Last Updated:October 13, 2026, 15:06 IST
Vijwa Mata Mandir: बांसवाड़ा में स्थित करीब 150 से 200 साल पुराने विजवा माता मंदिर को श्रद्धालु ‘डॉक्टर माता’ के नाम से जानते हैं. मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से शरीर के अंगों से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है. मन्नत पूरी होने पर भक्त कृत्रिम हाथ-पैर चढ़ाते हैं. जानिए मंदिर की अनोखी परंपरा, पांच रविवार धोक लगाने की मान्यता और नवरात्र में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ की पूरी कहानी.
बांसवाड़ा. आस्था और विश्वास का एक ऐसा अनूठा मंदिर है, जहां श्रद्धालु माता को ‘डॉक्टर माता’ के नाम से पुकारते हैं. शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन विजवा माता मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि शरीर के अलग-अलग अंगों से जुड़ी परेशानियों में माता के दरबार में प्रार्थना करने से राहत मिलती है. इसी विश्वास के चलते इस मंदिर की पहचान आसपास के क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज तक बनी हुई है.
विजवा माता मंदिर की सबसे खास परंपरा यहां चढ़ाई जाने वाली कृत्रिम अंगों की प्रतिकृतियां हैं. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि हाथ-पैर, जीभ, कान, नाक, गले और शरीर के अन्य अंगों से जुड़ी समस्याओं को लेकर माता के दरबार में मन्नत मांगी जाती है. मन्नत पूरी होने पर भक्त कृत्रिम हाथ-पैर या संबंधित अंगों की प्रतिकृतियां माता को अर्पित करते हैं. इसके जरिए वे माता के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. मंदिर में दर्शन को लेकर भी एक विशेष मान्यता प्रचलित है. श्रद्धालु लगातार पांच रविवार तक माता के दरबार में पहुंचकर धोक लगाते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. इसी परंपरा के कारण मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है.
150 से 200 साल पुराना है मंदिर
विजवा माता मंदिर का इतिहास करीब 150 से 200 साल पुराना बताया जाता है, मंदिर में रियासत काल से ही सेवा और पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंदिर की सेवा करने और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का सिलसिला आज भी जारी है. समय के साथ मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास मजबूत हुआ है. मंदिर की विशेष पहचान इसकी अनूठी मान्यताओं और यहां निभाई जाने वाली परंपराओं से जुड़ी हुई है. स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास का प्रतीक भी है.
नवरात्र में उमड़ रहे श्रद्धालु
शारदीय नवरात्र के दौरान विजवा माता मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. सुबह और शाम होने वाली मंगल आरती में श्रद्धालु शामिल होकर माता के दर्शन करते हैं. इस दौरान भक्त देश और प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करते हैं. नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के साथ गरबा रास का आयोजन भी किया जाता है. धार्मिक वातावरण, आरती और गरबा रास के बीच पूरा परिसर भक्तिमय नजर आता है. बांसवाड़ा का विजवा माता मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं और ‘डॉक्टर माता’ की अनूठी पहचान के कारण विशेष महत्व रखता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माता के प्रति आस्था, मन्नत और परंपरा का यह संगम वर्षों से विश्वास का केंद्र बना हुआ है. हालांकि, शरीर से जुड़ी किसी भी बीमारी या परेशानी के लिए उचित चिकित्सकीय सलाह और उपचार लेना जरूरी है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Banswara,Rajasthan
First Published :
October 13, 2026, 15:06 IST



