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पाग दस्तूर, वैदिक मंत्र और शाही रस्में… भैसवाड़ा में राजपूत गौरव का ऐतिहासिक दिन, जानें क्या था खास

Last Updated:December 27, 2025, 22:29 IST

Jalore News : भैसवाड़ा में स्वर्गीय ठाकुर दलवीर सिंह के बाद ठाकुर शिव प्रताप सिंह को पगड़ी पहनाकर राजतिलक किया गया, जिसमें महाराजा गज सिंह और आहोर ठाकुर महिपाल सिंह शामिल रहे. भैसवाड़ा रावला में आयोजित राजतिलक समारोह में आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग, विभिन्न ठाकुर राजघरानों के प्रतिनिधि, वरिष्ठजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

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जालौर. जालोर जिले के भैसवाड़ा गांव में राजपूत समाज की सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप एक गौरवशाली और ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ. स्वर्गीय ठाकुर दलवीर सिंह के देवलोकगमन के बाद उनके पुत्र ठाकुर शिव प्रताप सिंह को पाग पहनाकर कुल और रावला की जिम्मेदारी सौंपी गई. यह परंपरा राजपूत समाज में सम्मान, संस्कार और उत्तरदायित्व का प्रतीक मानी जाती है.

भैसवाड़ा रावला में आयोजित राजतिलक समारोह में आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग, विभिन्न ठाकुर राजघरानों के प्रतिनिधि, वरिष्ठजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे. समारोह की भव्यता और शाही वातावरण ने सभी को प्रभावित किया. इस अवसर पर जोधपुर के महाराजा गज सिंह और आहोर ठाकुर महिपाल सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे. उन्होंने ठाकुर शिव प्रताप सिंह को पगड़ी पहनाकर राजतिलक की रस्म पूरी कराई.

वैदिक विधि और शाही परंपराओं के साथ संपन्न आयोजनसमारोह वैदिक विधि-विधान और राजपूत शाही रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ. पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार, जयकारों और तालियों के बीच ठाकुर शिव प्रताप सिंह को उपाधि प्रदान की गई. दिनभर आयोजन स्थल पर लोगों का आवागमन बना रहा और वातावरण उत्साह, उल्लास और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया.

नव-ठाकुर का संकल्प और संदेशराजतिलक के बाद ठाकुर शिव प्रताप सिंह ने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वे अपने पिता स्वर्गीय ठाकुर दलवीर सिंह द्वारा स्थापित परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक दायित्वों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने क्षेत्र के विकास, समाज सेवा और नई पीढ़ी को परंपराओं के महत्व से जोड़ने का संकल्प भी दोहराया.

परंपरा और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरणभैसवाड़ा में आयोजित यह राजतिलक समारोह न केवल राजपूत परंपरा का जीवंत उदाहरण बना, बल्कि समाज में भाईचारा, संस्कार और जिम्मेदारी का संदेश भी देकर गया. ग्रामीणों ने इसे अपने समाज की शान और संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक बताया. पाग दस्तूर और राजतिलक समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि भैसवाड़ा में परंपरा और आधुनिक जिम्मेदारी का संगम आज भी पूरी मजबूती के साथ जीवित है.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

Location :

Jalor,Rajasthan

First Published :

December 27, 2025, 22:29 IST

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पाग दस्तूर, वैदिक मंत्र और शाही रस्में… भैसवाड़ा में गौरव का ऐतिहासिक दिन!

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