इमरान हाशमी की वो 6 शानदार फिल्में, जिन्हें कभी नहीं मिला सफलता का हक, बनकर रह गईं अंडररेटेड

Last Updated:August 15, 2026, 09:58 IST
बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाने वाले इमरान हाशमी ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी कुछ सबसे बेहतरीन फिल्में बॉक्स ऑफिस की रेस में पीछे छूट गईं? दमदार कहानी, बेजोड़ संगीत और संजीदा अभिनय के बावजूद इन फिल्मों को वह सफलता और पहचान नहीं मिल सकी, जिसकी वे हकदार थीं. आज भले ही ये फिल्में अंडररेटेड की कैटेगरी में गिनी जाती हों, पर सिनेमा प्रेमियों के दिल में इनकी खास जगह है.
नई दिल्ली. इमरान हाशमी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘आवारापन 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी इस फिल्म का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. यह मूवी साल 2007 की ‘आवारापन’ का सीक्वल है. सीक्वल मूवी का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. वैसे इमरान ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में भी की हैं, जो अंडररेटेड रह गईं. आज हम आपको उनकी ऐसी ही 6 फिल्मों के नाम बताते हैं.
शंघाई (2012): दिबाकर बनर्जी के निर्देशन में बनी ‘शंघाई’ एक तीखी पॉलिटिकल थ्रिलर है, जिसमें इमरान हाशमी ने जोगिंदर परमार नाम के एक छोटे शहर के वीडियोग्राफर की भूमिका निभाई थी. अपनी पारंपरिक सीरियल किसर की इमेज को पूरी तरह तोड़ते हुए इमरान ने इस किरदार में अपनी शानदार अदाकारी की छाप छोड़ी. एक आम आदमी की लाचारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कशमकश को इमरान ने पर्दे पर बेहद जीवंत और संजीदगी के साथ उतारा था.
आवारापन (2007): इमरान हाशमी की ‘आवारापन’ एक ऐसे टूटे हुए गैंगस्टर शिवम की कहानी है, जो वफादारी और प्रायश्चित के बीच झूल रहा होता है. हालांकि, रिलीज के वक्त यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन इमरान की संजीदा एक्टिंग, दर्द भरे डायलॉग्स और उनके आइकॉनिक लुक ने इसे समय के साथ एक कल्ट क्लासिक बना दिया. प्यार, दर्द और मुक्ति के ताने-बाने पर बुनी यह फिल्म आज भी इमरान हाशमी के करियर के सबसे बेहतरीन किरदारों में गिनी जाती है.
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टाइगर्स (2018): ऑस्कर विजेता निर्देशक दानिस तानोविक की यह बायोग्राफिकल ड्रामा इमरान हाशमी के करियर की सबसे मजबूत फिल्मों में से एक है. फिल्म में इमरान ने एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का किरदार निभाया है, जो नवजात शिशुओं के लिए जहरीला साबित हो रहे एक बेबी मिल्क पाउडर के घोटाले का भंडाफोड़ करता है. कॉर्पोरेट जगत के लालच और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ते एक असली व्हिसलब्लोअर की इस कहानी में इमरान ने बिना किसी लाउड ड्रामे के बेहद प्रभावी और संजीदा अभिनय किया है.
घनचक्कर (2013): इस डार्क-कॉमेडी थ्रिलर में इमरान हाशमी ने संजू नाम के एक पूर्व बैंक लुटेरे का किरदार निभाया है, जो हादसे के बाद अपनी याददाश्त खो बैठता है और चुराए हुए पैसों की जगह भूल जाता है. विद्या बालन के साथ इमरान की ट्यूनिंग और कॉमेडी-सस्पेंस का तालमेल देखने लायक था. संशय, भ्रम और कॉमेडी के इस अनोखे मेल को इमरान ने बेहद सहजता से पर्दे पर पेश किया. अपनी अनूठी कहानी के बावजूद यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे अंडररेटेड फिल्मों में शुमार है.
तुम मिले (2009): साल 2005 में मुंबई बाढ़ पर बनी ‘तुम मिले’ एक खूबसूरत लव स्टोरी है. फिल्म में इमरान हाशमी ने एक ऐसे स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट का रोल निभाया है, जो प्यार और अपने करियर के बीच उलझा हुआ है. इमरान ने अपने किरदार की नाजुक भावनाओं और दर्द को पर्दे पर बेहद ईमानदारी से उतारा है. दिल को छू लेने वाले संगीत और दमदार अदाकारी के बाद भी इस भावनात्मक फिल्म को वह पहचान नहीं मिली जिसकी यह हकदार थी.
एक थी डायन (2013): इस हॉरर थ्रिलर फिल्म में इमरान हाशमी ने बोबो नाम के एक मशहूर जादूगर का किरदार निभाया है, जो अपने बचपन के भयानक अतीत और तंत्र-मंत्र के काले साए से बुरी तरह परेशान रहता है. इमरान ने इस खौफनाक कहानी को अपनी बेहतरीन और गंभीर अदाकारी से संभालकर रखा. बेहतरीन सस्पेंस, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और इमरान के संजीदा अभिनय के बावजूद यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे अंडररेटेड हॉरर-मिस्ट्री फिल्मों में शुमार है.
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August 15, 2026, 09:54 IST


