Narlai Village: इस गांव में इंसानों के साथ रहते हैं 20 से ज्यादा तेंदुए, पहाड़ी पर विराजमान है विशाल हाथी

Last Updated:October 04, 2026, 14:09 IST
Narlai Village: पाली का नारलाई गांव अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा ऐसा ऐतिहासिक स्थल है, जहां 17वीं सदी का शाही शिकारगाह आज हेरिटेज होटल बन चुका है. विशाल हाथी की प्रतिमा, प्राचीन बावड़ियां और हवेलियों के साथ यहां 20 से ज्यादा तेंदुओं का इंसानों के साथ शांत सह-अस्तित्व इसे राजस्थान का अनोखा गांव बनाता है.
पाली. अरावली की पहाड़ियों के बीच छुपा एक ऐसा ऐतिहासिक गांव, जहां इतिहास और प्रकृति एक साथ सांस लेते हैं. पाली जिले की देसूरी तहसील में स्थित नारलाई गांव आज भी अपनी सदियों पुरानी शान और सादगी के लिए जाना जाता है. पहाड़ी पर बनी एक विशाल हाथी की प्रतिमा इस गांव की मुख्य पहचान है. 17वीं सदी में जोधपुर के शाही परिवार द्वारा बनवाया गया शिकार निवास आज एक हेरिटेज होटल का रूप ले चुका है, जिसे 1996 में रानी उषा देवी ने नया जीवन दिया. ऐतिहासिक हवेलियों, सदियों पुरानी बावडियों और अनोखी वास्तुकला से सजा नारलाई एक और अद्भुत मिसाल पेश करता है यहां 20 से ज्यादा तेंदुए ग्रामीणों के साथ बिना किसी टकराव के शांति से रहते हैं.
पहाड़ी पर सीना ताने खड़ी विशाल हाथी की प्रतिमा, सदियों पुरानी ऐतिहासिक बावडियां, पुरानी हवेलियां और गलियों में बिखरा शाही वैभव—यह सब मिलकर नारलाई को मारवाड़ का एक अनमोल खजाना बनाते हैं. लेकिन नारलाई की कहानी सिर्फ अतीत तक सीमित नहीं है. यहां आज भी 20 से ज्यादा तेंदुए ग्रामीणों के साथ एक अनोखे और शांत सह-अस्तित्व में रहते हैं. इतिहास, शाही विरासत और कुदरत का यह मेल कैसा दिखता है, यह गांव कोई आम ग्रामीण इलाका नहीं है, बल्कि यह जोधपुर के पूर्व शाही परिवार के इतिहास और उनकी शाही जीवनशैली का जीवंत साक्षी है.
17वीं सदी में बना जोधपुर राजपरिवार का ‘शाही शिकारगाह’इतिहास के पन्नों को पलटें तो 17वीं सदी में जोधपुर के तत्कालीन शाही परिवार ने अरावली के इन घने जंगलों और प्राकृतिक खूबसूरती से प्रभावित होकर नारलाई को अपना मुख्य ‘शिकार निवास’ (रॉयल हंटिंग लॉज) चुना था. शाही परिवार के सदस्य शिकार और विश्राम के लिए यहाँ आया करते थे. गांव में प्रवेश करते ही पहाड़ी की चोटी पर स्थित एक विशालकाय हाथी की प्रतिमा नजर आती है, जो सदियों से इस गाँव की मुख्य पहचान और शाही प्रतीक बनी हुई है.
रानी उषा देवी ने दी नई पहचान
सदियां बीत जाने के बाद भी नारलाई का शाही वैभव कम नहीं हुआ. वर्ष 1996 में जोधपुर राजपरिवार की रानी उषा देवी ने इस ऐतिहासिक शिकार निवास और पुरानी इमारत के गौरव को पुनर्जीवित करने की पहल की, उन्होंने इस पुरानी हवेली को एक खूबसूरत हेरिटेज होटल में तब्दील कर दिया. आज यहां आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक गांव की सादगी और शाही विरासत (Heritage) का एक साथ अनुभव करते हैं. नारलाई की संकरी गलियों में टहलते ही इतिहास खुद-ब-खुद बोलने लगता है. यहां बनी सदियों पुरानी ऐतिहासिक हवेलियां, नक्काशीदार मंदिर और प्राचीन बावडियां आज भी अपनी असली शान बनाए हुए हैं. ताज्जुब की बात यह है कि सदियों पहले पानी के प्रबंधन के लिए बनी यह बावड़ी आज भी ग्रामीणों के लिए जल का एक प्रमुख और अटूट स्रोत बनी हुई है.
जहां इंसान और तेंदुए रहते हैं एक साथनारलाई गांव की सबसे अद्भुत बात यहां का वन्यजीवन और इंसानों का आपसी तालमेल है. अरावली की पहाड़ियों से घिरे इस इलाके में 20 से ज्यादा तेंदुए रहते हैं. हैरानी की बात यह है कि ये तेंदुए और गांव के लोग बिना किसी टकराव के एक अनोखी शांति और आपसी समझ के साथ रहते हैं. प्रकृति की गोद में बसा नारलाई आज एक ऐसा स्थल बन चुका है, जहां गांव का प्राचीन इतिहास और अरावली की बेमिसाल प्रकृति दोनों एक साथ सांस लेते हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 14:09 IST



