Rajasthan

Navratri Special : झुंझुनूं की पोदार हवेली में आज भी जीवंत हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूप, 1902 की दीवारों पर दिखती है नारी शक्ति की झलक

झुंझुनूं. राजस्थान के शेखावाटी इलाके की हवेलियां अपनी खूबसूरत चित्रकारी और पुराने इतिहास के लिए जानी जाती हैं. यहां की दीवारों पर बने चित्र सिर्फ हवेलियों की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि उस समय की आस्था, रहन-सहन और सोच के बारे में भी बताते हैं. झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ की पोदार हवेली भी ऐसी ही एक ऐतिहासिक इमारत है. वर्ष 1902 में बनी इस हवेली के भित्ति चित्र आज भी लोगों का ध्यान खींचते हैं. खास बात यह है कि यहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को दीवारों पर चित्रों के जरिए दिखाया गया है. नवरात्र के समय इन चित्रों को देखने का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि ये शक्ति की आराधना के साथ नारी सम्मान का संदेश भी देते हैं.

नवलगढ़ की पोदार हवेली म्यूजियम में मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों से जुड़े चित्र शेखावाटी की पुरानी कला का उदाहरण हैं. इन चित्रों में कलाकारों का हुनर दिखाई देता है. साथ ही, यह भी पता चलता है कि पहले के समय में लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को कला के जरिए किस तरह सहेजकर रखते थे. हवेली की दीवारों पर बने ये चित्र आज भी उस परंपरा की याद दिलाते हैं, जब धार्मिक कथाओं, देवी-देवताओं और सामाजिक जीवन से जुड़ी बातों को दीवारों पर उकेरा जाता था. उस दौर में हवेलियों की दीवारें केवल सजावट के लिए नहीं होती थीं, बल्कि उनके जरिए आस्था और संस्कृति की बातें भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाई जाती थीं.

शेखावाटी की हवेलियां हैं कला और इतिहास की पहचानशेखावाटी की हवेलियां अपने झरोखों, कलात्मक दरवाजों और रंग-बिरंगे भित्ति चित्रों के लिए देश-विदेश में पहचान रखती हैं. इनकी दीवारों पर धार्मिक प्रसंग, पौराणिक कथाएं और पुराने समय के सामाजिक जीवन से जुड़े दृश्य देखने को मिलते हैं. ये चित्र बताते हैं कि उस समय के कलाकार अपनी कला के जरिए लोगों की मान्यताओं और जीवन से जुड़ी बातों को किस तरह पेश करते थे. नवलगढ़ की पोदार हवेली भी इसी विरासत का हिस्सा है. वर्ष 1902 में बनी इस हवेली की चित्रकारी शेखावाटी की उस पहचान को सामने लाती है, जिसमें कला और आस्था साथ-साथ चलती हैं. समय बीतने के बाद भी इन चित्रों का महत्व बना हुआ है. आज इन्हें देखकर नई पीढ़ी को अपनी पुरानी कला और संस्कृति के बारे में जानने का मौका मिलता है.

नवरात्र में और खास हो जाते हैं देवी के ये चित्रनवरात्र के दौरान घरों में घट स्थापना होती है. मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाती है और मां दुर्गा के जयकारे सुनाई देते हैं. इसी समय पोदार हवेली में बने देवी के नौ स्वरूपों के चित्र भी शक्ति की आराधना की याद दिलाते हैं. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को शक्ति, साहस, साधना और ममता से जोड़कर देखा जाता है. देवी के अलग-अलग रूप यह संदेश देते हैं कि शक्ति केवल एक रूप में नहीं होती. यह सृजन और संरक्षण का आधार भी है और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस भी देती है. पोदार हवेली की दीवारों पर बनी यह चित्रकारी धार्मिक परंपरा को एक अलग अंदाज में सामने रखती है. यहां कला के साथ आस्था भी दिखाई देती है. यही वजह है कि ये चित्र केवल पुराने समय की निशानी बनकर नहीं रह गए, बल्कि आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं.

पूजा के साथ महिलाओं के सम्मान का संदेश भी जरूरीनवरात्र को नारी शक्ति के उत्सव के रूप में भी देखा जाता है. मां दुर्गा के नौ स्वरूप महिलाओं की ताकत, साहस और आत्मविश्वास की याद दिलाते हैं. आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, कारोबार और सामाजिक सेवा जैसे कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं. ऐसे में देवी की पूजा का संदेश केवल मंदिरों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. महिलाओं को सम्मान देना, उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना और उन्हें आगे बढ़ने के बराबर अवसर देना भी उतना ही जरूरी है. पोदार हवेली के ये चित्र इसी बात पर सोचने का अवसर देते हैं कि नारी शक्ति का सम्मान हमारे व्यवहार और समाज में भी दिखाई देना चाहिए.

पुरानी विरासत आज भी नई पीढ़ी को दे रही सीखशेखावाटी की हवेलियां अपने पुराने चित्रों और बनावट के जरिए इतिहास की कहानियां सुनाती हैं. नवलगढ़ की पोदार हवेली में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की चित्रकारी इसका एक खास उदाहरण है. इन चित्रों में शक्ति, साहस, भक्ति और नारी सम्मान से जुड़ा संदेश देखा जा सकता है. हवेली की यह विरासत बताती है कि पुरानी इमारतें केवल बीते समय की याद नहीं होतीं. वे अपने भीतर कला, आस्था और समाज की सोच से जुड़ी कई बातें समेटे रहती हैं. जरूरत है कि इन धरोहरों को संभालकर रखा जाए और नई पीढ़ी को इनके महत्व के बारे में बताया जाए. नवलगढ़ की पोदार हवेली में बने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के चित्र आज भी यही याद दिलाते हैं कि अपनी संस्कृति को बचाए रखना और उससे मिलने वाली अच्छी सीख को जीवन में अपनाना जरूरी है.

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