चौराहे बन जाते हैं मंच… मोबाइल युग में जिंदा है भरतपुर की विरासत, ‘गोठ’ में बुजुर्गों संग गूंजते हैं ब्रज गीत

Last Updated:June 18, 2026, 13:48 IST
Bharatpur Goth Parampara: भरतपुर जिले में प्रचलित ‘गोठ’ परंपरा आज भी ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है. गर्मियों के दिनों में गांवों के चौक, चबूतरों और खुले स्थानों पर शाम ढलते ही लोग एकत्रित होते हैं और ब्रज-भक्ति गीतों का सामूहिक गायन करते हैं. विशेष रूप से गुर्जर समाज के बुजुर्ग इस परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उनके साथ युवा और बच्चे भी शामिल होकर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं. गोठ केवल गीत-संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सामुदायिक एकजुटता का भी माध्यम है. ब्रज भाषा में गाए जाने वाले भक्ति गीत गांव के वातावरण को आध्यात्मिक रंग से भर देते हैं. आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है.
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भरतपुर: भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक गोठ गीत की अनोखी संस्कृति पूरी जीवंता के साथ निभाई जा रही है. खासकर गुर्जर समाज में गर्मियों के मौसम में यह परंपरा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित की जाती है. तपती दोपहर के बाद जैसे ही शाम ढलती है. गांवों के बड़े चौक और खुले स्थान सांस्कृतिक मिलन स्थल में बदल जाते हैं. जहां दूर-दराज के गांवों से लोग एकत्रित होकर सामूहिक रूप से भक्ति और लोकगीतों का गायन करते हैं.
गोठ केवल गीत-संगीत तक सीमित नहीं है. बल्कि यह सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है. इस परंपरा में विशेष रूप से बुजुर्गों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जो ब्रज भाषा में भक्ति गीत और लोकगीत और पारंपरिक धुनों को आगे बढ़ाते हैं. उनके साथ युवा पीढ़ी भी जुड़कर इस विरासत को सीखती और आगे बढ़ाती है. जिससे यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है. भरतपुर के अलग-अलग गांवों में इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहते हैं.
समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यमहाल ही में भरतपुर के सिंघाड़ा गांव में भी गोठ का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के कई गांवों से लोग शामिल हुए कार्यक्रम के दौरान चौक में बैठकर सभी ने एक साथ भक्ति गीतों का सामूहिक गायन किया जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया स्थानीय लोगों का मानना है कि गोठ न केवल मनोरंजन का साधन है. बल्कि यह समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है.
गीत परम्परा को आज भी निभाया जा रहायहां लोग अपने अनुभव साझा करते हैं.पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं.और आपसी संबंधों को मजबूत बनाते हैं.आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक संस्कृतियां धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं.वहीं भरतपुर की गोठ परंपरा एक मिसाल बनकर सामने आ रही है.यह परंपरा न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए है.बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी कर रही है. और इस गीत परम्परा को आज भी निभाया जा रहा है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Bharatpur,Rajasthan



