Pali Sheetla Mata Temple Rahasya

Last Updated:October 17, 2026, 08:08 IST
Pali Bhatund Sheetla Mata Temple: राजस्थान के पाली जिले के भाटुण्द गांव में 800 साल पुराना चमत्कारी शीतला माता मंदिर स्थित है. इस मंदिर में एक रहस्यमयी 1 मीटर गहरी ओखली है, जिसमें कितना भी पानी डाला जाए वह कभी नहीं भरती. इसके अलावा, यहां देवी से पहले ‘बाबरा’ नामक राक्षस को भोग लगाने की अनोखी परंपरा है. पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने गांव को राक्षस के आतंक से बचाया था और मृत्यु के समय उसे क्षमादान देकर भोग का अधिकार दिया था. नवरात्रि में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
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पाली: राजस्थान के पाली जिले में स्थित भाटुण्द गांव का प्राचीन शीतला माता मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारी रहस्यों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. लगभग 800 वर्ष से अधिक पुराना यह मंदिर आस्था और लोककथाओं का एक अनूठा संगम है. नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है. दूर-दूर से लोग माता के दर्शन करने और इस मंदिर से जुड़े चमत्कारों के साक्षी बनने आते हैं. यह मंदिर अन्य शक्तिपीठों से काफी अलग और विशेष माना जाता है.
मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को माता शीतला की चार भुजाओं वाली भव्य प्रतिमा के दर्शन होते हैं. प्रतिमा के ठीक सामने फर्श पर एक रहस्यमयी ओखली बनी हुई है, जिसकी गहराई लगभग 1 मीटर है. इस ओखली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कितना भी पानी डाला जाए, यह कभी नहीं भरती. स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि सैकड़ों लीटर जल समा जाने के बाद भी यह ओखली खाली ही रहती है. अथाह पानी को अपने अंदर सोख लेने का यह अद्भुत चमत्कार आज भी आधुनिक विज्ञान के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है.
मां से पहले राक्षस ‘बाबरा’ को भोग लगाने की परंपराआमतौर पर सभी मंदिरों में सबसे पहले देवी-देवताओं को प्रसाद और भोग अर्पित किया जाता है, लेकिन भाटुण्द के इस शीतला माता मंदिर में परंपरा बिल्कुल विपरीत है. यहां माता शीतला से पहले ‘बाबरा’ नामक एक अहंकारी राक्षस को भोग लगाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में बाबरा राक्षस का इस क्षेत्र में भारी आतंक था. वह गांव में होने वाली हर शादी के दौरान दूल्हे को अपना शिकार बना लेता था. राक्षस के इस भयंकर अत्याचार से दुखी होकर गांव के एक ब्राह्मण ने माता शीतला की कठोर तपस्या की थी.
माता शीतला द्वारा राक्षस का संहार और क्षमादानभक्त की सच्ची पुकार सुनकर माता शीतला प्रकट हुईं और उन्होंने ब्राह्मण की बेटी की रक्षा करने के साथ-साथ राक्षस के वध का वचन दिया. इसके बाद माता ने उस अत्याचारी राक्षस का संहार कर दिया. अंत समय में राक्षस को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने मां के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी. करुणामयी माता ने उसे क्षमा करते हुए आदेश दिया कि साल में दो बार (शीतला सप्तमी और ज्येष्ठ पूर्णिमा) उसे पानी और भोग अर्पित किया जाएगा. इसी परंपरा के तहत आज भी महिलाएं ओखली में जल अर्पित करती हैं ताकि गांव पर कोई विपत्ति न आए.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 08:08 IST



