साइबर ठगी के शिकार हैं? बिना कोर्ट गए भी लौट सकती है रकम, MRM पोर्टल ऐसे करेगा मदद

जयपुर. साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों के लिए राजस्थान पुलिस ने राहत की पहल की है. अब ठगी के बाद बैंक खाते में होल्ड या फ्रीज हुई रकम वापस पाने के लिए पीड़ितों को हर मामले में अदालत के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी. राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा आर4सी (R4C) मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के जरिए पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को आसान बना रही है. राजस्थान पुलिस अब तक इस मॉड्यूल के माध्यम से 8,016 आवेदनों पर कार्रवाई कर चुकी है और संबंधित बैंकों को कुल 5.67 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं.
इस व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी फंसी हुई रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है. हालांकि, रकम की वापसी शिकायत की जांच, बैंक खाते में उपलब्ध फ्रीज राशि और मामले की श्रेणी के आधार पर होगी. राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है. अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह के अनुसार, एमआरएम के माध्यम से पात्र पीड़ित निर्धारित प्रक्रिया पूरी करके अपनी रकम वापस पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी दलाल या एजेंट को पैसे देने की जरूरत नहीं है.
क्या है मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल?
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की ओर से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शुरू किया गया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है. इसके जरिए साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खाते में होल्ड या फ्रीज की गई रकम वापस पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. इसकी आधिकारिक वेबसाइट mrm-ncrp.mha.gov.in है. राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा आर4सी इसी व्यवस्था के माध्यम से पीड़ितों के आवेदनों पर कार्रवाई कर रही है. इस प्रक्रिया में पुलिस शिकायत और बैंक लेनदेन की जांच करती है. यदि जांच में फ्रीज की गई रकम पीड़ित की पाई जाती है और उसे जांच के लिए रोके रखना जरूरी नहीं होता, तो नियमानुसार रकम लौटाने की अनुशंसा की जा सकती है.
कितनी रकम फ्रीज होने पर कैसे मिलेगा रिफंड?
एमआरएम मॉड्यूल के तहत धनवापसी की प्रक्रिया को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. यह वर्गीकरण बैंक खाते में फ्रीज रकम के आधार पर किया जाता है.
श्रेणी-1: एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये तक की रकमयदि किसी एक बैंक खाते में फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये तक है, तो एफआईआर या अदालत के आदेश की जरूरत नहीं है. पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉण्ड यानी क्षतिपूर्ति संबंधी बॉण्ड के आधार पर धनवापसी की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.
श्रेणी-2: कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा, लेकिन किसी एक खाते में 50 हजार से अधिक नहींयदि कुल फ्रीज रकम 50,000 रुपये से अधिक है, लेकिन किसी एक बैंक खाते में फ्रीज रकम 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं है, तो एफआईआर या अदालत के आदेश की आवश्यकता नहीं है. इस श्रेणी में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर धनवापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है.
श्रेणी-3: किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा की रकमयदि किसी एक बैंक खाते में फ्रीज रकम 50,000 रुपये से अधिक है, तो एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है. एफआईआर दर्ज होने के बाद बाकी प्रक्रिया एमआरएम पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाती है.
राजस्थान पुलिस के मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के जरिए पीड़ित ऑनलाइन रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं
ऐसे वापस मिलेगी साइबर ठगी की रकम, समझें पूरा प्रोसेस
सबसे पहले शिकायत दर्ज करें: साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं. शिकायत दर्ज होने के बाद एक एक्नॉलेजमेंट नंबर मिलता है.
बैंक संदिग्ध रकम होल्ड करेगा: शिकायत मिलने के बाद बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और अन्य वित्तीय संस्थाएं सीएफसीएफआरएमएस (CFCFRMS) व्यवस्था के जरिए संदिग्ध बैंक खाते में मौजूद रकम होल्ड कर सकती हैं, ताकि ठगी की रकम निकाली या आगे ट्रांसफर न की जा सके.
एमआरएम पोर्टल पर आवेदन करें: रकम होल्ड होने के बाद पीड़ित एमआरएम पोर्टल पर जाकर ‘Raise Refund Request’ विकल्प के जरिए धनवापसी के लिए आवेदन कर सकता है. इसके लिए शिकायत संख्या, ओटीपी सत्यापन और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है.
पुलिस करेगी जांच: आवेदन संबंधित जांच अधिकारी या पुलिस थाने को भेजा जाता है. पुलिस शिकायत, बैंक लेनदेन और होल्ड की गई रकम का सत्यापन करती है.
संदिग्ध खाताधारक से जवाब मांगा जा सकता है: जरूरत पड़ने पर पुलिस संबंधित खाताधारक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग सकती है. जवाब देने के लिए समय दिया जाता है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या संबंधित व्यक्ति के उपस्थित नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाती है.
पुलिस देगी धनवापसी की अनुशंसा: यदि जांच में रकम पीड़ित की पाई जाती है और उसे जांच के लिए रोके रखना जरूरी नहीं है, तो पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106(3) के तहत रकम लौटाने की अनुशंसा कर सकती है.
बैंक खाते में वापस आएगी रकम: पुलिस की रिपोर्ट या आदेश मिलने के बाद बैंक नियमानुसार रकम पीड़ित के खाते में ट्रांसफर करता है. इसके बाद रिफंड की स्थिति एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस पर अपडेट की जाती है.
8,016 आवेदनों पर कार्रवाई, 5.67 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश
राजस्थान पुलिस के मुताबिक, एमआरएम मॉड्यूल के जरिए अब तक 8,016 आवेदनों पर कार्रवाई की जा चुकी है. इन आवेदनों के संबंध में बैंकों को कुल 5.67 करोड़ रुपये की धनवापसी के निर्देश दिए गए हैं. इस व्यवस्था से साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी फ्रीज रकम वापस पाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलती है. पुलिस का कहना है कि इस मॉड्यूल के जरिए धनवापसी की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पात्र पीड़ितों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े. हालांकि, आवेदन करने मात्र से रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती. इसके लिए संबंधित शिकायत, बैंक रिकॉर्ड और पुलिस जांच के आधार पर पात्रता तय की जाती है.
राजस्थान में अब तक 8,016 आवेदनों पर कार्रवाई हुई है और 5.67 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश जारी किए गए हैं.
रिफंड के नाम पर किसी को पैसे न दें
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी की रकम वापस दिलाने का दावा करने वाले किसी भी दलाल, एजेंट या अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें. एमआरएम के माध्यम से धनवापसी की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है. इसके लिए किसी व्यक्ति को अलग से भुगतान करने की जरूरत नहीं है. यदि आपके साथ साइबर ठगी होती है, तो जल्द से जल्द शिकायत दर्ज कराएं.
यहां दर्ज कराएं शिकायत
साइबर हेल्पलाइन- 1930
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल- https://cybercrime.gov.in,
साइबर हेल्पडेस्क- 9256001930 / 9257510100
नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं.



