Pearl Millet Green Fodder | How to grow Bajra for green fodder in summer | हरे चारे के लिए बाजरे की खेती

Last Updated:April 16, 2026, 10:04 IST
Pearl Millet Green Fodder: गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए हरे चारे की कमी को दूर करने हेतु बाजरे की बुवाई सबसे प्रभावी समाधान है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार, यह फसल 45 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छी बढ़त लेती है. सही दूरी पर बुवाई, गोबर की खाद का उपयोग और शाम के समय सिंचाई करने से किसान उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक चारा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे गर्मियों में भी पशुओं का दूध उत्पादन नहीं घटेगा.
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Agriculture Tips: अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गर्मी का असर तेज होने लगा है. चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना होता है. गर्मी के मौसम में पशुओं के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और दूध उत्पादन को स्थिर रखने के लिए हरा चारा खिलाना अनिवार्य है. ऐसे में बाजरे का हरा चारा (पर्ल मिलेट) किसानों के लिए सबसे सस्ता और टिकाऊ विकल्प बनकर उभरा है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ का मानना है कि यदि किसान अभी सही तकनीक से बाजरे की बुवाई करते हैं, तो पूरे सीजन पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की कमी नहीं होगी.
बाजरा एक ऐसी फसल है जो विपरीत मौसम और कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और भीषण गर्मी में भी तेजी से बढ़ती है. राजस्थान जैसे शुष्क और रेतीले इलाकों के लिए यह फसल किसी वरदान से कम नहीं है. हरे चारे के रूप में बाजरा मात्र 45 से 60 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाता है. इससे न केवल पशुपालकों को जल्दी चारा मिलता है, बल्कि उन्हें बाजार से महंगा सूखा चारा खरीदने के अतिरिक्त खर्चे से भी राहत मिल जाती है.
बुवाई की आधुनिक और सही तकनीकबेहतर पैदावार के लिए एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बुवाई की सही विधि साझा की है. सबसे पहले खेत को अच्छी तरह जोतकर मिट्टी को भुरभुरा और समतल बना लेना चाहिए. बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखना सबसे उपयुक्त रहता है. एक हेक्टेयर भूमि के लिए करीब 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्मों के बीजों का ही चुनाव करें ताकि चारे की गुणवत्ता बेहतर रहे.
खाद प्रबंधन और सिंचाई के खास टिप्सअच्छी फसल के लिए खाद का सही चुनाव करना जरूरी है. बुवाई के समय खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद या कंपोस्ट डालना मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है. इसके अलावा, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का उपयोग फसल की बढ़वार को तेज करता है. सिंचाई के मामले में एक्सपर्ट का कहना है कि शाम के समय पानी देना सबसे लाभकारी होता है, क्योंकि इससे वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद और दूसरी 8 से 10 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए. बाजरे का चारा प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जो पशुओं के पाचन को सुधारने के साथ-साथ सीधे तौर पर दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
April 16, 2026, 10:04 IST



