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Last Updated:January 11, 2026, 18:16 IST
Polyhouse Farming Success: पाली जिले के एक प्रगतिशील किसान ने पॉलीहाउस खेती अपनाकर यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक से खेती में बड़ा मुनाफा संभव है. केवल 37 दिनों में उन्होंने ‘हरे सोने’ जैसी फसल तैयार कर लाखों का कारोबार खड़ा किया. नियंत्रित वातावरण, कम पानी और बेहतर उत्पादन ने उनकी आमदनी बढ़ाई. यह सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, जो कम समय में अधिक लाभ कमाने के लिए पॉलीहाउस तकनीक अपनाना चाहते हैं.
पाली. ऑर्गेनिक फसलो के लिए कोई मंडी नही है इसलिए सारा माल जोधपुर,गुजरात और मुम्बई भेजना पडता है. जिससे किराया ज्यादा लगने से मुनाफा कम हो जाता है. यह कहना है ऑर्गेनिक और आधुनिक किसान मुकेश सिंह का जिन्होने खेती में एक ऐसा नवाचार करने का काम किया है जिसे शायद देखकर हर कोई हैरान है. अगर आप भी खीरे की अच्छी खेती करना चाहते है तो आप भी अपडेट होती इस तकनीक का इस्तेमाल कर अपने आप को आधुनिक किसान बना सकते है. यूट्यूब से शिक्षा लेकर जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाने वाले किसान मुकेश सिंह राजपुरोहित ने भी कुछ ऐसा ही किया और आज उनके खेत में लगे खीरे आपको सोचने को मजबूर कर देंगे. किसान मुकेश सिंह ने यूट्यूब की मदद से पहले जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाना सीखा और कुछ ऐसा कि कि आज लाखो रूपए महीनो में कमा रहे है.
मगर आज भी एक दर्द है कि अगर ऑर्गेनिक फसलो के लिए मंडी होती तो एक अच्छा मुनाफा होता उनको ऑर्गेनिक खीरे दूसरे राज्यो में नही भेजने पडते.
ऑर्गेनिक मंडी नही इसलिए नही मिल रहा अच्छा दाम मुकेश सिंह का कहना है कि सरकार द्वारा ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहन राशि तो दी जाती है. लेकिन सबसे बड़ी दुविधा यह है कि ऑर्गेनिक फसलों के लिए कोई मंडी नहीं है. ऑर्गेनिक खीरे को जोधपुर, गुजरात और मुंबई भेजना पड़ता है. किराया ज्यादा लगने से मुनाफा कम हो जाता है.स्थानीय बाजार में ऑर्गेनिक खीरे और सामान्य खीरे को लेकर जागरूकता कम है, जिसके कारण दोनों खीरों के दाम लगभग बराबर मिलते हैं.
खीरे लगाने है तो पहले करे यह काम किसान मुकेश सिंह की माने तो उनका कहना है कि उन्होने यूट्यूब पर ऑर्गेनिक खेती की समझ रखने वाले कुछ अच्छे लोगों को सुना और सीखा. पॉलीहाउस में फसल की देखरेख के लिए दो व्यक्ति रखे. खेत पर जैविक खाद और कीटनाशक बनाया. पॉलीहाउस में गोबर खाद डालकर मिट्टी तैयार की. ड्रिप लगाकर जमीन के ऊपर प्लास्टिक (मल्चिंग) बिछाई. इससे खरपतवार नहीं उगती है.जैसे-जैसे पौधे बढ़ना शुरू हुए, रस्सी की सहायता से उन्हें 6-7 फीट ऊंचे तारों पर लपेटा गया. करीब 37 दिन बाद खीरे की तुड़ाई की.हर दूसरे दिन 1500 किलो खीरे का उत्पादन हो रहा है, जिससे रोजाना 25 से 30 हजार रुपए का मुनाफा हो रहा है.
About the AuthorJagriti Dubey
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First Published :
January 11, 2026, 18:16 IST
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सिर्फ 37 दिन में बदली किस्मत, जानिए पाली किसान की पॉलीहाउस तकनीक



