Sirohi Ravan Effigy Making News

Last Updated:October 17, 2026, 08:24 IST
Sirohi Dussehra Ravan Effigy Business: सिरोही जिले के आबूरोड स्थित मानपुर में दशहरे के लिए रावण के पुतले बनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. यहां एक ही परिवार के 15 सदस्य पिछले 10 दिनों से 4 फीट से 35 फीट तक के पुतले बनाने में जुटे हैं. पुतलों की कीमत 500 रुपये से 35,000 रुपये तक तय की गई है. बांस और कागज से तैयार हो रहे इन दो दर्जन से अधिक पुतलों के निर्माण में कारीगरों को सरकारी मदद नहीं मिलती है. पिछले साल बारिश से नुकसान झेल चुके कारीगरों को इस बार बेहतर बिक्री और अच्छी कमाई की उम्मीद है.
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सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड शहर अंतर्गत मानपुर में विजयदशमी यानी दशहरे के पावन पर्व को लेकर रावण दहन की तैयारियां बेहद जोरों-शोरों से चल रही हैं. इस बार त्यौहार को खास बनाने के लिए स्थानीय कारीगर दिन-रात मेहनत में जुटे हुए हैं. मानपुर क्षेत्र में रावण के पुतले तैयार करने के इस पारंपरिक और कलात्मक कार्य में एक ही स्थानीय परिवार के लगभग 15 सदस्य पूरी निष्ठा और लगन से लगे हुए हैं. दशहरे के अवसर पर बिक्री के लिए इस बार कारीगरों द्वारा कुल दो दर्जन से भी अधिक छोटे-बड़े पुतले तैयार किए जा रहे हैं. इन पुतलों की ऊंचाई और आकार 4 फीट से लेकर 35 फीट तक रखा गया है, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए आसपास के लोग पहुंचने लगे हैं.
क्यारियां जोड़ की जोगी कॉलोनी निवासी कारीगर भंवरलाल और किरण कुमार ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से बांस की लकड़ियों का उपयोग करके रावण के आकर्षक पुतले बनाने का काम कर रहे हैं. इस मौसमी व्यवसाय में उनके परिवार के करीब 15 सदस्य दिन-रात मेहनत करके पुतलों को अंतिम रूप देते हैं. दशहरे के दौरान रावण के पुतले बनाने के अलावा यह परिवार सालभर बांस की मदद से खूबसूरत झोपड़ियां, टोकरियां, झंडे लगाने वाली लकड़ियां और बांस की विभिन्न प्रकार की हस्तशिल्प कलाकृतियां बनाने का काम भी करता है.
500 से 35,000 रुपये तक पुतलों की कीमतें और निर्माण प्रक्रियाग्राहकों की बदलती मांग और पुतलों के आकार के अनुसार ही इनके दाम तय किए जाते हैं. इस वर्ष मानपुर में तैयार किए जा रहे रावण के पुतलों की शुरुआती कीमत 500 रुपये से लेकर अधिकतम 35,000 रुपये तक रखी गई है. पुतला बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कारीगरों ने कहा कि सबसे पहले बांस की चीपियों की मदद से रावण का ढांचा (स्ट्रक्चर) तैयार किया जाता है. इसके बाद कागजों की परतों से उसे बाहरी रूप दिया जाता है और अंत में आकर्षक रंगों तथा वाटरप्रूफ पेंट से सजाकर फाइनल टच दिया जाता है. ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार ऑर्डर देकर भी पुतले तैयार करवा रहे हैं.
सरकारी मदद का अभाव और बारिश की मार से आर्थिक नुकसान का डरपुतला निर्माता भंवरलाल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि वे अपनी जमापूंजी का निवेश करके पहले से ही पुतले तैयार कर लेते हैं. हालांकि कई बार दशहरे के बाद कुछ पुतले बिकने से रह जाते हैं, तो कई बार अचानक खराब मौसम और बारिश की मार झेलनी पड़ती है. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सरकार या प्रशासन से उन्हें किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या बुनियादी सुविधा नहीं मिलती है. कारीगरों का कहना है कि अन्य राज्यों और शहरों में ऐसे हस्तशिल्प कारीगरों को सरकारी योजनाएं और सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन यहां उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. पिछली बार के कड़वे अनुभवों को याद करते हुए भंवरलाल और किरण कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष दशहरे के ठीक दिन तेज बारिश हो गई थी, जिससे उनके बने बनाए पुतले पानी में भीगकर खराब हो गए थे. इस वजह से परिवार को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था. हालांकि, इस बार मौसम साफ रहने की उम्मीद में कारीगर बेहद उत्साहित हैं. उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार उनके द्वारा तैयार किए गए सभी दो दर्जन से अधिक पुतले बिक जाएंगे और परिवार को अच्छी आमदनी प्राप्त होगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 08:24 IST



