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Sita Navami 2026 Today: रवि योग में आज सीता नवमी, जानें महत्व, पूजा विधि व मुहूर्त और माता सीता की आरती

Sita Navami 2026 Today: हिंदू धर्म में आज सीता नवमी का पर्व विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, इस पर्व को सीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता के धरती से प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राजा जनक को खेत जोतते समय भूमि से माता साती मिली थीं. सीता नवमी के दिन रवि योग, गंड योग, वृद्धि योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. सीता नवमी के दिन व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर सभी कष्ट व परेशानियों से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं सीता नवमी का महत्व, पूजा विधि व मुहूर्त…

सीता नवमी का महत्वहिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी सीता का जन्म मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में हुआ था. उनका विवाह भगवान राम से हुआ, जिनका जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ था. रामनवमी के लगभग एक माह बाद सीता नवमी आती है. माता सीता पवित्रता, त्याग और धैर्य की प्रतीक हैं. उनका आशीर्वाद घर-परिवार में सुख-शांति और पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है. पुराणों के अनुसार, माता सीता का जन्म राजा जनक के यहां हुआ था. कथा के मुताबिक, वे भूमि से प्रकट हुई थीं, इसलिए उन्हें भूमिजा भी कहा जाता है. सीता नवमी के दिन लक्ष्मी स्वरूप की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने से जीवन में ऐश्वर्य, धन, सुविधाएं आदि की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में समृद्धि आती है. विशेष रूप से विवाहित महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए करती हैं. वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस दिन पूजा करती हैं.

सीता नवमी 2026 आजनवमी तिथि का प्रारंभ – 24 अप्रैल दिन शुक्रवार, शाम 7 बजकर 22 मिनट सेनवमी तिथि का समापन – 25 अप्रैल दिन शनिवार, शाम 6 बजकर 29 मिनट तकउदिया तिथि को मानते हुए सीता नवमी का पर्व 25 अप्रैल दिन शनिवार को मनाया जाएगा.

सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्तब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:02 ए एमअभिजित मुहूर्त: 11:53 ए एम से 12:46 पी एमगोधूलि मुहूर्त: 06:51 पी एम से 07:13 पी एमविजय मुहूर्त: 02:30 पी एम से 03:23 पी एमअमृत काल: 06:29 पी एम से 08:04 पी एम

सीता नवमी 2026 पूजा विधिसीता नवमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें गंगाजल से शुद्ध कर फूल, अक्षत, रोली और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद धूप व दीपक जलाएं और माता सीता का सुहाग का सामान अर्पित करें. इसके बाद सीता नवमी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें. अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करें.

सीता माता की आरतीआरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी,परम दयामयी दिनोधारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥सती श्रोमणि पति हित कारिणी, पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,पति हित पति वियोग स्वीकारिणी, त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पवन मति आई,सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई, शरणागत जन भय हरी की ॥आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

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