Sundha Mata: राजस्थान की वैष्णो देवी, 1220 मीटर ऊंचे पहाड़ पर विराजती हैं सुंधा माता, महाराणा प्रताप से जुड़ा है इतिहास

Last Updated:October 28, 2026, 17:59 IST
Sundha Mata: जालोर की अरावली पहाड़ियों में 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सुंधा माता मंदिर आस्था के साथ ऐतिहासिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां प्राचीन गुफा, शिवलिंग और 1262 ईस्वी के शिलालेख मंदिर के गौरवशाली इतिहास की कहानी कहते हैं. राजस्थान की वैष्णो देवी कहे जाने वाले इस धाम में दर्शन के लिए राजस्थान समेत गुजरात और कर्नाटक से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.
जालोर. यहां के कुलदेवी के रूप में पूजी जाने वाली सुंधा माता का धाम सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, इतिहास की कई कहानियां को अपने समेटे हुए है. अरावली की पहाड़ियों में 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचते ही एक तरफ प्राचीन गुफा में विराजमान चामुंडा माता के दर्शन होते हैं, तो दूसरी तरफ मंदिर परिसर में मौजूद ऐतिहासिक शिलालेख और प्राचीन शिवलिंग इस स्थान की पुरातनता की कहानी कहते हैं. सुंधा माता मंदिर का इतिहास 13वीं सदी से जुड़ा हुआ है, यहां मिले शिलालेखों में 1262 ईस्वी समेत अलग-अलग काल की जानकारियां मिलती हैं. एक शिलालेख के अनुसार जालोर के चौहान शासक चाचिगदेव ने मंदिर में मंडप का निर्माण करवाया था, चाचिगदेव के समय तक यहां माता की पूजा की परंपरा पहले से मौजूद थी.
पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की यात्रा को आसान बनाने के लिए यहां रोपवे भी बनाया गया. वर्ष 2006 में शुरू हुआ यह रोपवे राजस्थान के पहले रोपवे के रूप में जाना जाता है, इससे बुजुर्गों और दूसरे श्रद्धालुओं के लिए पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचना आसान हुआ. आज सुंधा माता धाम में इतिहास, आस्था और प्रकृति तीनों एक साथ दिखाई देते हैं. प्राचीन शिलालेख चाचिगदेव के दौर की कहानी बताते हैं, महादेव मंदिर यहां की पुरानी धार्मिक परंपरा को सामने रखता है और रोपवे इस ऐतिहासिक धाम को आधुनिक सुविधा से जोड़ता है.
पाली संभाग का प्रमुख और सबसे बड़ा मंदिर
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने लोकल18को बताया कि नवरात्रि से लेकर दीपावली तक सुंधा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है. यह पाली संभाग का प्रमुख और सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है, जहां राजस्थान के साथ गुजरात और कर्नाटक से भी भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए यहां बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है, अलग-अलग समाजों की धर्मशालाएं बनी हुई हैं, जहां रहने के साथ भोजन की भी उचित व्यवस्था मिलती है. सुंधा माता को राजस्थान की वैष्णो देवी के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना 1912 में जालोर के चाचिक देव ने करवाई थी, यहां माता के सिर की पूजा की जाती है और माता के नाम से ही यह स्थान सुंधा पर्वत के नाम से प्रसिद्ध है. यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. महाराणा प्रताप से भी इस स्थान की एक मान्यता जुड़ी हुई है, कहा जाता है कि अपने संघर्ष के दिनों में महाराणा प्रताप ने यहां शरण ली थी.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jalor,Rajasthan
First Published :
October 28, 2026, 17:59 IST



