Supreme Court on Delhi Police CJI Protest Probe। CJI प्रोटेस्ट पर क्या बहाना बना रही थी दिल्ली पुलिस? CJI ने कर दिया टाइट

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CJI प्रोटेस्ट पर क्या बहाना बना रही थी दिल्ली पुलिस? CJI ने कर दिया टाइट
Last Updated:November 05, 2026, 15:59 IST
दिल्ली पुलिस की कथित ज्यादती की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश. CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं हो सकता. अब तक मिले सबूतों और शिकायतों के आधार पर कमेटी 1 महीने में अपनी पहली फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों और समाजसेवियों द्वारा दिए गए सबूत, वीडियो और दस्तावेज भी जांच का हिस्सा होंगे.कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया.
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस के बर्ताव और ढुलमुल जांच को लेकर CJI सूर्यकांत के चेहरे पर तल्खी साफ दिख रही थी. अदालत का सब्र आखिरकार टूट ही गया. चीफ जस्टिस ने कहा कि हम शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकते. प्रदर्शनों के दौरान खाकी वर्दी पर लगे बर्बरता और ज्यादती के गंभीर आरोपों ने जब लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. सुप्रीम कोर्ट का मूड एकदम क्रिस्टल क्लियर है, नो मोर डिले, नो मोर एक्सक्यूज. हाई-पावर्ड कमेटी को अल्टीमेटम मिल चुका है.
महीने का अल्टीमेटम, सौंपनी होगी पहली रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के अंदर अपनी पहली फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट दाखिल करे. कोर्ट का कहना है कि अब तक जो भी मटीरियल सामने आया है, उसकी जांच की जाए और संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष मांगा जाए. कोर्ट द्वारा प्रायोरिटी पर रखे गए दो प्रमुख मुद्दों पर सबसे पहले रिपोर्टिंग शुरू करने को कहा गया है.
विक्टिम्स का पर्सनली आना जरूरी नहींइस सुनवाई का सबसे बड़ा हाईलाइट यह रहा कि पीड़ितों को खुद सामने आने का दबाव नहीं होगा. अगर वकीलों, एक्टिविस्ट्स या पब्लिक स्पिरिटेड लोगों ने कोई डॉक्युमेंट्स, पेटिशन्स, वीडियो या डिजिटल प्रूफ्स सबमिट किए हैं, तो कमेटी को उन्हें कंसीडर करना ही होगा. यानी, विक्टिम्स का व्यक्तिगत रूप से कमेटी के सामने पहुंचना मैंडेटरी नहीं है.
31 अक्टूबर की रिपोर्ट पर कोर्ट का रिएक्शनकोर्ट ने कहा कि कमेटी की 31 अक्टूबर वाली रिपोर्ट महज एक स्टेटस रिपोर्ट थी, जिसमें पुलिस की ज्यादती के आरोपों पर कोई कंक्रीट निष्कर्ष नहीं था. CJI ने संकेत दिया कि जांच के निष्कर्ष सामान्य तौर पर सभी पक्षों के साथ शेयर होने चाहिए, हालांकि एक्सेप्शनल सिचुएशंस में सीक्रेसी रखी जा सकती है. अब इस केस की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी.
दो हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाईसुप्रीम कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह बाद दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. कमेटी को एक महीने में पहली फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट देनी होगी. अब जांच की दिशा और गति पर अदालत की नजर रहेगी. सबसे अहम बात यह होगी कि कमेटी उपलब्ध सबूतों के आधार पर क्या तथ्य सामने रखती है.
About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
November 05, 2026, 15:52 IST



