Gopinath Temple Nagaur | 1000 साल पुराने मंदिर में खंडित मूर्ति की पूजा, जानें रहस्य

Last Updated:September 17, 2026, 10:48 IST
Gopinath Temple Nagaur: नागौर के भगतावाड़ी में स्थित 1000 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में खंडित प्रतिमा की पूजा की अनोखी परंपरा है. मान्यता है कि प्रतिमा का अंगूठा खंडित होने पर जब नई मूर्ति लाने की तैयारी हुई, तब भगवान ने व्यापारी को सपने में दर्शन दिए और कहा कि वे खेलने गए थे और हल्की चोट लग गई. इसके बाद खंडित मूर्ति को विसर्जित न कर पूजा जारी रखी गई. दक्षिणेश्वर मंदिर जैसी यह परंपरा सिखाती है कि ईश्वर पूजा में मूर्ति के रूप से ज्यादा श्रद्धा और भाव का महत्व होता है.
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Nagaur: राजस्थान के नागौर शहर में स्थित भगतावाड़ी का गोपीनाथ मंदिर आस्था और अनूठी परंपरा का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है. लगभग 1000 वर्ष पुराना यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय और गहरी आस्था का केंद्र है. इस मंदिर में राधा-कृष्ण के साथ-साथ भगवान गोपीनाथ जी की प्रतिमा भी विराजमान है. मंदिर की सबसे खास और अनूठी बात यह है कि यहां भगवान गोपीनाथ जी की खंडित प्रतिमा स्थापित है, जिसकी वर्षों से नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है. सामान्य तौर पर सनातन परंपरा में खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित मानी जाती है, लेकिन यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है जहां खंडित मूर्ति को हटाने के बजाय उसी रूप में भगवान मानकर पूजा करने की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है.
मंदिर के चौथी पीढ़ी के पुजारी कमल जी, जो पिछले 40 वर्षों से यहां निरंतर सेवा कर रहे हैं, बताते हैं कि इस अनूठी परंपरा के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है. वर्षों पहले जब भगवान गोपीनाथ की प्रतिमा का अंगूठा खंडित हो गया था, तब एक स्थानीय व्यापारी ने मंदिर में नई राधा-कृष्ण की जोड़ी स्थापित करने का निर्णय लिया. वह नई मूर्तियां लेकर मंदिर पहुंचा ताकि खंडित प्रतिमा को विसर्जित किया जा सके. लेकिन उसी रात भगवान गोपीनाथ ने उस व्यापारी के सपने में आकर दर्शन दिए. भगवान ने सहज भाव से कहा, ‘मैं तो खेलने गया था, अंगूठे पर थोड़ी चोट लग गई तो क्या हुआ.’ इस अलौकिक स्वप्न के बाद व्यापारी और मंदिर प्रबंधन ने पुरानी खंडित प्रतिमा को हटाने का विचार पूरी तरह त्याग दिया. तब से लेकर आज तक उस प्रतिमा को उसी स्थान पर रखकर पूजा जारी रखी गई है.
दक्षिणेश्वर काली मंदिर जैसी ही है यह मान्यताखंडित प्रतिमा की पूजा का यह भाव कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर मंदिर से जुड़ता है. दक्षिणेश्वर के राधा-गोविंद मंदिर में भी एक बार जन्माष्टमी के अगले दिन कृष्ण प्रतिमा गिर जाने से उनका पैर टूट गया था. तब विद्वानों ने मूर्ति विसर्जित करने की सलाह दी थी, लेकिन स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि अगर परिवार का कोई सदस्य चोटिल या विकलांग हो जाए तो क्या उसे घर से बाहर निकाल दिया जाता है. उसी विचार और शुद्ध भाव से नागौर के इस मंदिर में भी भगवान की खंडित प्रतिमा को परिवार के सदस्य की भांति पूजा जाता है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु नई और पुरानी दोनों प्रतिमाओं के दर्शन कर समान श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
त्योहारों पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़नागौर के इस ऐतिहासिक मंदिर में जन्माष्टमी सबसे मुख्य और बड़ा त्योहार है. इसके अलावा रामनवमी, हरियाली अमावस्या और सावन के महीने में झूलोत्सव का आयोजन बेहद धूमधाम से किया जाता है. सावन के दौरान भगवान गोपीनाथ और राधा-कृष्ण को सुंदर झूले में विराजमान कर विशेष श्रृंगार किया जाता है. पर्वों के दौरान मंदिर परिसर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं. यह मंदिर धार्मिक मान्यताओं से परे जाकर भगवान के प्रति शुद्ध भाव, प्रेम और भक्ति की अनुपम सीख देता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
September 17, 2026, 10:48 IST



