आप भी करते हैं नीम की दातुन? जान लें दांत साफ करने की देसी तरकीब के फायदे और नुकसान

Benefits of Neem Datun: सुबह दांत साफ करने के लिए टूथब्रश की जगह नीम की दातुन देखकर कई लोगों को अपना बचपन याद आ जाता है. खासकर गांवों और छोटे शहरों में आज भी लोग नीम की ताजी टहनी से दांत साफ करते नजर आ जाते हैं. दातुन करने का तरीका भले ही पुराना हो, लेकिन इसे लेकर लोगों की दिलचस्पी आज भी बनी हुई है. कुछ लोग इसे दांतों और मसूड़ों के लिए अच्छा मानते हैं, जबकि कुछ लोग ब्रश और टूथपेस्ट को ही बेहतर विकल्प समझते हैं.
ऐसे में मन सवाल उठता है कि नीम की दातुन वास्तव में मुंह की सफाई में कितनी मदद करती है और इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं नीम की दातुन से जुड़ी जरूरी बातें.
नीम की दातुन क्यों की जाती है?
नीम की टहनी से दातुन करने की परंपरा काफी पुरानी है. इसमें टहनी के एक सिरे को चबाकर उसके रेशों को मुलायम किया जाता है. इसके बाद इन्हीं रेशों से दांतों की सतह और मसूड़ों की हल्के हाथ से सफाई की जाती है. दातुन के रेशे दांतों पर जमा खाने के छोटे कण और कुछ सतही गंदगी हटाने में मदद कर सकते हैं. नीम में ऐसे प्राकृतिक यौगिक भी पाए जाते हैं जिनमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नीम की दातुन हर तरह की दांतों की समस्या का इलाज कर सकती है.
नीम की दातुन करने के संभावित फायदे
दांतों की सफाई में मदद
सही तरीके से की गई दातुन दांतों की बाहरी सतह पर मौजूद गंदगी और खाने के अवशेष हटाने में मदद कर सकती है. इससे मुंह साफ महसूस होता है. दांतों पर पहले से जमी कठोर परत या टार्टर को केवल दातुन से हटाना संभव नहीं होता.
मसूड़ों की हल्की सफाई
दातुन के मुलायम रेशे मसूड़ों के आसपास की सफाई में भी मदद कर सकते हैं, लेकिन यहां सबसे जरूरी बात तरीका है. ज्यादा दबाव डालने या लगातार जोर से रगड़ने पर मसूड़ों में जलन और चोट हो सकती है.
मुंह की ताजगी
नीम की टहनी चबाने और उससे दांत साफ करने के बाद मुंह में ताजगी महसूस हो सकती है. कुछ लोगों को इसकी वजह से सांस की बदबू में भी कमी महसूस होती है. हालांकि, अगर बदबू लगातार बनी रहती है तो केवल दातुन पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारण की जांच कराना बेहतर है.
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दातुन करते समय इन गलतियों से बचें
दातुन को दांतों पर बहुत जोर से रगड़ना सबसे आम गलतियों में से एक है. इससे मसूड़ों में चोट लग सकती है और दांतों की बाहरी परत पर भी अनावश्यक घिसाव हो सकता है. पुरानी, गंदी या फफूंद लगी टहनी का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए. दातुन के लिए साफ और ताजी टहनी लेना बेहतर है. हर पेड़ की टहनी को दातुन समझकर इस्तेमाल करना भी सही नहीं है. अगर दांतों में दर्द, मसूड़ों से बार-बार खून आना, सूजन या लगातार बदबू जैसी समस्या है तो दातुन से इसे ठीक करने की कोशिश न करें. ऐसी स्थिति में दंत चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी हो सकता है.
नीम की दातुन करने का सही तरीका
सबसे पहले साफ और ताजी नीम की टहनी लें और उसे पानी से अच्छी तरह धो लें. टहनी का एक सिरा हल्का सा चबाएं ताकि उसके रेशे मुलायम होकर ब्रश जैसे दिखाई देने लगें. अब इन रेशों से दांतों की बाहरी और अंदरूनी सतह को धीरे-धीरे साफ करें. मसूड़ों पर भी बहुत हल्का दबाव रखें. दातुन के इस्तेमाल के बाद उसे दोबारा संभालकर रखने के बजाय फेंक देना बेहतर है. अगली बार साफ और ताजी टहनी का इस्तेमाल करें.
क्या दातुन टूथब्रश की जगह ले सकती है?
नीम की दातुन से मुंह की सफाई में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे टूथब्रश और फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का निश्चित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. खासकर जिन लोगों को कैविटी, मसूड़ों की बीमारी या दांतों से जुड़ी दूसरी समस्या है, उन्हें नियमित दांतों की जांच और उचित ओरल केयर पर ध्यान देना चाहिए.



