IPS Story| Success Story: 37 साल की उम्र में छोड़ी IPS की नौकरी, कौन हैं DCP जगमोहन मीणा, UPSC कितने नंबर मिले थे?

IPS Story, UPSC Success Story: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की नौकरी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में गिनी जाती है. लाखों युवा इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सालों मेहनत करते हैं लेकिन ओडिशा कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा ने महज 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है फिलहाल वह भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद पर तैनात हैं. उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताए हैं हालांकि उनका इस्तीफा अभी अंतिम रूप से मंजूर नहीं हुआ है और प्रक्रिया जारी है. इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद लोग जानना चाहते हैं कि आखिर जगमोहन मीणा कौन हैं? उनकी यूपीएससी में क्या रैंक थी? उन्होंने कितने अंक हासिल किए थे और अब आगे क्या करने वाले हैं?
सीकर से निकलकर बने आईपीएस
जगमोहन मीणा मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म वर्ष 1989 में हुआ था. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग की राह चुनी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से पढ़ाई की. हायर एजुकेशन की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयासों में सफलता हासिल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई.
UPSC 2012 में मिली थी 849वीं रैंक
जगमोहन मीणा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2012 में सफलता हासिल की थी. इस परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 849 रही थी. इस रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) मिली और वर्ष 2013 बैच में ओडिशा कैडर आवंटित किया गया.उनके यूपीएससी के अंकों की बात करें तो उन्होंने मुख्य परीक्षा (Mains) में 724 अंक हासिल किए थे, जबकि इंटरव्यू (Personality Test) में 181 अंक मिले थे. इस तरह उनका कुल स्कोर 905 अंक रहा था.
IIT से पढ़ाई के बाद चुनी सिविल सेवा की राह
जगमोहन मीणा का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी काफी मजबूत रहा है. उन्होंने IIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर की बजाय प्रशासनिक सेवा को चुना और UPSC की तैयारी शुरू कर दी. उनकी मेहनत रंग लाई और वह भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हो गए.
13 साल के करियर में कई अहम जिम्मेदारियां
आईपीएस बनने के बाद जगमोहन मीणा ने ओडिशा के कई संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिलों में काम किया. अपने 13 साल के करियर में उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर नक्सल विरोधी अभियानों तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.वह मलकानगिरी, अंगुल और गजपति जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर रहे. इसके बाद उन्हें कटक शहरी जिले में पुलिस उपायुक्त (DCP) की जिम्मेदारी मिली. फरवरी 2025 में उनकी पोस्टिंग राजधानी भुवनेश्वर में डीसीपी के रूप में हुई जहां वह वर्तमान में कार्यरत हैं.
अलग-अलग चुनौतियों का किया सामना
जगमोहन मीणा ने अपने करियर की शुरुआत नक्सल प्रभावित इलाकों से की थी. उन्होंने बताया कि हर जिले में पुलिसिंग की चुनौतियां अलग थीं और उन्हें हर परिस्थिति में नई रणनीति के साथ काम करना पड़ा.मलकानगिरी में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी नक्सल विरोधी अभियान चलाना और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में चुनावों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना था.अंगुल जिले में औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखना और कोयला खदानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती रही.गंजाम जिले में उन्होंने अपराध पर नियंत्रण और अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने पर विशेष काम किया.कटक जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक शहर में बड़ी संख्या में होने वाले धार्मिक आयोजनों, जुलूसों, क्रिकेट मैचों और प्रसिद्ध बाली यात्रा जैसे विशाल आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी रही.भुवनेश्वर में उनकी सबसे अहम जिम्मेदारी वीआईपी दौरों और हाई-प्रोफाइल सुरक्षा प्रबंधन की रही.
बेहतरीन काम के लिए मिले कई सम्मान
अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए जगमोहन मीणा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले. वर्ष 2019 में उन्हें पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया। इसके बाद वर्ष 2021 में पुलिस अतिरिक्त सुरक्षा सेवा पदक मिला। वर्ष 2023 में उन्हें राज्यपाल पदक से भी सम्मानित किया गया।
अचानक इस्तीफे से चर्चा
जगमोहन मीणा का इस्तीफा सिर्फ इसलिए चर्चा में नहीं है कि उन्होंने आईपीएस जैसी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ी है बल्कि इसका समय भी काफी अहम माना जा रहा है.उनका इस्तीफा उस दौर में सामने आया जब ओडिशा में जीआरपी कांस्टेबल सोम्य रंजन सैन की मॉब लिंचिंग का मामला काफी सुर्खियों में था. यह घटना मई महीने में बालिघाटा इलाके में हुई थी हालांकि बताया गया कि जगमोहन मीणा ने यह इस्तीफा लगभग एक महीने पहले ही दे दिया था.मॉब लिंचिंग की इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे. मुख्यमंत्री ने भी भीड़ हिंसा की घटनाओं पर पुलिस की भूमिका को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. ऐसे माहौल में उनके इस्तीफे से कई तरह की चर्चाएं हैं.
प्राइवेट सेक्टर में जाने की तैयारी
जगमोहन मीणा ने खुद इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा है कि उन्होंने निजी कारणों से यह फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार से इस्तीफा मंजूर होने के बाद वह निजी क्षेत्र (Private Sector) में काम करने की योजना बना रहे हैं.फिलहाल उनका इस्तीफा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया में है. नियमों के मुताबिक किसी आईपीएस अधिकारी का इस्तीफा कई प्रशासनिक स्तरों से मंजूरी मिलने के बाद ही प्रभावी होता है.
हैरान करने वाला फैसला
जगमोहन मीणा के अचानक इस्तीफा देने की खबर से उनके सहयोगी और पुलिस विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं. उनके कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि किसी को पहले से इस फैसले की जानकारी नहीं थी और यह पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ.
इस्तीफे की मंजूरी कैसे मिलती है?
आईपीएस अधिकारियों के इस्तीफे की प्रक्रिया सामान्य सरकारी कर्मचारियों से अलग होती है.अधिकारी को अपने कैडर की राज्य सरकार या यदि प्रतिनियुक्ति पर हों तो संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को स्पष्ट और बिना शर्त लिखित इस्तीफा देना होता है. इसके बाद राज्य सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य वरिष्ठ स्तरों पर इसकी जांच और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाती है. अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही अधिकारी सेवा से मुक्त माना जाता है.
मीणा ने जताया आभार
इस्तीफे की घोषणा के साथ जगमोहन मीणा ने ओडिशा सरकार और राज्य की जनता का धन्यवाद भी किया. उन्होंने कहा कि पिछले 13 से 14 वर्षों में उन्हें जनसेवा का जो अवसर मिला, उसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे. उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में रहते हुए लोगों के लिए काम करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है और वह अपने योगदान से संतुष्ट हैं.



