करोड़ों की रकम देकर किसानों की थी मदद, जानिए मुंबई की चकाचौंध छोड़ गांव में क्यों रहते थे नाना पाटेकर

Last Updated:October 08, 2026, 10:31 IST
Why Late Nana Patekar Lived In Village:दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से उनके निधन की खबर से पूरा सिनेमा जगत और लाखों फैंस स्तब्ध हैं. बड़े स्टारडम के बावजूद नाना पाटेकर ने हमेशा सादगी को चुना. किसानों के लिए उन्होंने करोड़ों की मदद की और जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े रहे. मुंबई की चमक-दमक से दूर गांव की जिंदगी उन्हें ज्यादा पसंद थी. आखिर क्यों नाना पाटेकर लग्जरी लाइफ छोड़कर खेती-किसानी और सादगी भरी जिंदगी जीना पसंद करते थे? किसानों की मदद से लेकर उनके गांव वाले आशियाने तक, जानिए नाना पाटेकर की जिंदगी का ये अनछुआ पहलू.गांव में क्यों रहते थे नाना पाटेकर( फोटो साभार-@iamnanapatekar)
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनके यूं खामोश हो जाने से फिल्म इंडस्ट्री और लाखों फैंस में मातम छा गया है. नाना पाटेकर सिर्फ अपनी शानदार एक्टिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सादगी और दरियादिली के लिए भी जाने जाते थे. करोड़ों की दौलत और बड़ा स्टारडम होने के बावजूद उन्होंने कभी लग्जरी लाइफ को तवज्जो नहीं दी. वे मुंबई की भागदौड़ और चकाचौंध से दूर गांव की शांत जिंदगी जीते थे और किसानों के लिए हमेशा खड़े रहते थे. किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए उन्होंने करोड़ों रुपये की रकम जुटाई और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई.
उनकी दरियादिली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार किसानों की हालत देखकर उन्होंने अपने लिए महंगी गाड़ी खरीदने का फैसला तक बदल दिया और उस रकम को किसान परिवारों की मदद के लिए देने का फैसला किया था.
करोड़ों की कार छोड़ किसानों को दिए चेक
नाना पाटेकर की इसी दरियादिली का एक किस्सा उनके करीबी रणबीर पुष्प ने शेयर किया था. उन्होंने बताया कि एक बार नाना 1.5 करोड़ रुपये की महंगी कार खरीदने वाले थे. तभी उन्होंने टीवी न्यूज पर आत्महत्या कर रहे किसानों के परिवारों को मदद की गुहार लगाते देखा. यह देखकर नाना का दिल पसीज गया और उन्होंने तुरंत कार खरीदने का विचार छोड़ दिया. अगले ही दिन उन्होंने अपने दोस्त के जरिए उन पीड़ित किसान परिवारों के लिए 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर भिजवा दिए.
नाम फाउंडेशन से की लाखों की मदद
किसानों के इसी दुख-दर्द को समझते हुए नाना पाटेकर ने नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी. इस संस्था के माध्यम से उन्होंने दिन-रात मेहनत की और जरूरतमंद किसानों और उनके परिवारों के लिए करोड़ों रुपये का फंड जुटाया. रणबीर पुष्प कहते हैं कि जो इंसान दूसरों का दर्द देखकर रो पड़े, वह दिल का बहुत साफ होता है. पर्दे पर भले ही नाना गुस्सैल किरदार निभाते थे, लेकिन असल जिंदगी में वे बेहद दयालु और सच्चे इंसान थे.
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