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गाय का दूध बढ़ाना है? शहतूत के पत्तों का ये देसी तरीका कर देगा कमाल, किसानों के लिए वरदान

Last Updated:April 25, 2026, 00:17 IST

पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीते हैं और वहीं से कई ऐसे देसी नुस्खे सामने आते हैं, जो बेहद कारगर साबित होते हैं. ऐसा ही एक तरीका है शहतूत के पत्तों का इस्तेमाल, जिसे गायों के लिए नेचुरल सप्लीमेंट माना जाता है. यह न सिर्फ दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि पशुओं की सेहत को भी बेहतर बनाता है.

शहतूत के पत्ते सिर्फ साधारण पत्ते नहीं होते, बल्कि ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो गायों की सेहत के लिए बहुत जरूरी होते हैं. गांव के लोग बताते हैं कि जब गायों को शहतूत के पत्ते खिलाए जाते हैं, तो उनका दूध बढ़ जाता है और दूध की क्वालिटी भी बेहतर हो जाती है. आप ये भी कह सकते है कि ये गायों का फेवरेट घास है, जिसे वो बड़े चाव से खाते है. यानी यह सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक तरह से नेचुरल सप्लीमेंट का काम करता है.

आजकल बाजार में कई तरह के पशु आहार मिलते हैं, लेकिन वे काफी महंगे होते हैं. हर किसान उन्हें खरीद नहीं सकता. ऐसे में से शहतूत के पत्ते एक सस्ता और आसानी से मिलने वाला विकल्प हैं. पहाड़ों में ये पेड़ आसानी से उग जाते हैं और ज्यादा देखभाल भी नहीं मांगते. इसलिए किसान बिना ज्यादा खर्च किए अपने पशुओं का अच्छे से ख्याल रख सकते हैं.

शहतूत का पेड़ सिर्फ जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा होता है. यह मिट्टी को मजबूत करता है और पहाड़ी इलाकों में जमीन के कटाव को रोकने में मदद करता है.<br />यानी इस एक ही पेड़ से कई फायदे मिल जाते हैं, फल, पत्ते और पर्यावरण की सुरक्षा. इसलिए आज भी पहाड़ो में ये बहुत ही उपयोगी है.

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पहाड़ी इलाकों में जिंदगी हमेशा से प्रकृति के साथ जुड़ी रही है. यहां के लोग हर पेड़-पौधे की अहमियत को अच्छे से समझते हैं. ऐसा ही एक पेड़ है शहतूत, जिसे आमतौर पर लोग उसके मीठे फलों के लिए जानते हैं और पहाड़ो में इसे कीमू कह जाता है. लेकिन पहाड़ों में इसकी असली पहचान इसके पत्तों से है, जो गायों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माने जाते.

पहाड़ों में लोग शहतूत के पत्तों को सिर्फ तोड़कर ही नहीं रखते, बल्कि उन्हें सही तरीके से सुखाकर स्टोर भी करते हैं. पत्तों को छांव में सुखाया जाता है ताकि उनके पोषक तत्व बने रहें. फिर इन्हें सूखी जगह पर रखा जाता है. जब जरूरत होती है, तो इन्हें पानी में हल्का सा भिगोकर गायों को खिलाया जाता है. यह तरीका बहुत आसान और प्रभावी होता है.

ये कोई नई खोज नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. पहाड़ों के बुजुर्गों ने अपने अनुभव से सीखा कि कौन सा पेड़ और पत्ता जानवरों के लिए फायदेमंद है. शहतूत के पत्तों का इस्तेमाल भी इसी अनुभव का नतीजा है. गांव के लोग बिना किसी वैज्ञानिक किताब के ही ये समझ चुके हैं कि ये पत्ते गायों के लिए कितने उपयोगी हैं.

गांव के निवासी और औषधीय पौधों के जानकार राम सिंह का मानना है कि शहतूत के पत्ते खिलाने से गायें कम बीमार पड़ती हैं. उनकी पाचन क्षमता भी बेहतर रहती है और वे ज्यादा एक्टिव रहती हैं. कई लोग तो यह भी कहते हैं कि जो गाय नियमित रूप से ये पत्ते खाती है, उसकी उम्र भी लंबी होती है. हालांकि यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से साबित न हो, लेकिन लोगों के अनुभव इसे मजबूत बनाते हैं.

First Published :

April 25, 2026, 00:17 IST

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