NEET UG 2026 Controversy: नीट परीक्षा केंद्र में बवाल! कुलसुम को 1 घंटे तक नहीं मिली एंट्री, हिजाब पर छिड़ी बहस

Last Updated:June 21, 2026, 16:01 IST
NEET UG 2026 Controversy: राजस्थान के अजमेर में नीट री-एग्जाम के दौरान बुर्का पहनकर आई छात्रा कुलसुम को एंट्री से रोकने पर भारी हंगामा हुआ. एनटीए ड्रेस कोड गाइडलाइन दिखाने और कलेक्टर लोकबंधु के दखल के बाद चेकिंग कर उसे एंट्री मिली. कुलसुम ने कहा- परीक्षा से ज्यादा जरूरी मेरी पहचान है.NEET Ajmer Controversy: अजमेर स्थित एक केंद्र पर ड्रेस कोड को लेकर बहस छिड़ गई
नई दिल्ली (NEET UG 2026 Controversy). नीट यूजी के बीच राजस्थान के अजमेर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के सावित्री इलाके में स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बुर्का और हिजाब पहनकर आई एक छात्रा को सुरक्षाकर्मियों ने एंट्री देने से मना कर दिया. केंद्र के बाहर करीब 1 घंटे तक जबरदस्त हंगामा देखने को मिला. ब्यावर जिले की रहने वाली परीक्षार्थी कुलसुम बानो अपने बुजुर्ग पिता मोहम्मद आरिफ के साथ सेंटर पहुंची तो स्टाफ ने नियमों का हवाला देकर रोक दिया.
इस वजह से कुलसुम को करीब 1 घंटे तक मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा और नीट यूजी परीक्षा केंद्र के बाहर भीड़ जमा हो गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु मौके पर पहुंचे. मीडिया कर्मियों के दखल के बाद आखिरकार सुरक्षा जांच पूरी कर छात्रा को केंद्र में जाने की अनुमति दी गई. कुलसुम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने प्रशासन के रवैये पर तीखे सवाल उठाए हैं. उसने कहा कि उसके लिए उसकी पोशाक और पहचान परीक्षा से ज्यादा मायने रखती है.
एक घंटे तक पिता-बेटी की सुरक्षाकर्मियों से बहस
जैसे ही कुलसुम बुर्का पहनकर अजमेर के परीक्षा केंद्र के गेट पर पहुंचीं, वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया. उनका कहना था कि ड्रेस कोड के तहत बुर्के में अंदर जाने की अनुमति नहीं है. इस पर कुलसुम और उनके बुजुर्ग पिता मोहम्मद आरिफ ने विरोध जताया. उन्होंने अपने मोबाइल में NTA की गाइडलाइन खोलकर दिखाई, जिसमें धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनकर आने वाले उम्मीदवारों के लिए विशेष चेकिंग के बाद एंट्री का प्रावधान है. कुलसुम का कहना था कि पिछले महीने मई में हुई मुख्य परीक्षा के दौरान भी उन्होंने इसी पोशाक में एग्जाम दिया था, तब उन्हें नहीं रोका गया तो फिर इस बार पाबंदी क्यों?
#WATCH | Ajmer, Rajasthan: A Burqa-wearing candidate was allegedly denied entry at a medical entrance exam centre ahead of the NEET examination today.
A candidate, named Kulsum Bano, says, “I have come from Beawar to take the NEET exam. When I took the exam on May 3rd, I was in… pic.twitter.com/3TVNnYk52n
मैदान में उतरे जिला कलेक्टर लोकबंधु
हंगामे की खबर फैलते ही मीडिया कर्मी और स्थानीय लोग केंद्र के बाहर जमा हो गए. विवाद बढ़ता देख अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने परीक्षा केंद्र का जायजा लिया. कलेक्टर ने मीडिया से बातचीत में स्थिति को संभालते हुए कहा कि परीक्षा को लेकर एनटीए की जो भी गाइडलाइन है, उसके बारे में स्टूडेंट्स को पहले ही जागरूक किया गया है और सेंटर का स्टाफ भी नियमों को लेकर सतर्क है. सुरक्षा जांच की फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद कुलसुम को समय रहते परीक्षा में बैठने दिया गया. NTA ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि अजमेर केंद्र पर बुर्का पहनने वाली उम्मीदवार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कुलसुम का वीडियो
भले ही कुलसुम को आखिरी में एंट्री मिल गई, लेकिन परीक्षा केंद्र की अव्यवस्था से वह बेहद नाराज दिखी. उसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. उसमें उसने प्रशासन से सवाल किया कि ‘जब एग्जाम एनटीए का है तो सेंटर पर प्रशासन के अपने नियम क्यों थोपे जा रहे हैं?’ कुलसुम ने बेहद भावुक शब्दों में कहा- अगर मुझे मेरी पारंपरिक पोशाक में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलती तो मैं परीक्षा छोड़ देती. यह परीक्षा मेरे लिए उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी मेरी पहचान और मेरा बुर्का. 18 साल के छात्रों के साथ परीक्षा के ठीक पहले इस तरह का व्यवहार करना बेहद शर्मनाक है.
धार्मिक पोशाक पर क्या कहती है NTA की गाइडलाइन?
इस विवाद के बाद एक बार फिर नीट परीक्षा के ड्रेस कोड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. एनटीए के नियमों के मुताबिक, परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली या हाईटेक नकल को रोकने के लिए हल्के कपड़े पहनने का ड्रेस कोड लागू रहता है. हालांकि, जो उम्मीदवार अपनी धार्मिक आस्था या परंपरा के अनुसार विशेष पोशाक (जैसे बुर्का, हिजाब, कृपाण या पगड़ी) पहनकर परीक्षा देना चाहते हैं, उन्हें बैठने की पूरी आजादी है. नियम के मुताबिक ऐसे अभ्यर्थियों को आम छात्रों की तुलना में करीब 1-1.30 घंटे पहले यानी सुबह 11:00 बजे ही केंद्र पर पहुंचना था, जिससे बिना किसी विवाद के गहन सुरक्षा जांच की जा सके.
About the AuthorDeepali PorwalSenior Sub Editor
Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें
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