Rajasthan

सरकारी दावे फेल? जर्जर स्कूल भवन में रोज जान जोखिम में डाल रहे बच्चे

Last Updated:July 12, 2026, 13:16 IST

Karauli School News: करौली जिले में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रति स्कूल 2 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने के एक साल बाद भी कई सरकारी स्कूलों की हालत नहीं सुधरी है. जिला मुख्यालय के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की इमारत जर्जर होने के कारण छात्राएं खतरे के साए में पढ़ रही हैं. कमरों की कमी के कारण एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं. बार-बार प्रस्ताव भेजने के बाद भी अधिकारियों द्वारा सुनवाई नहीं की जा रही है, जिससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है.

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Karauli School News: करौली जिले में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. पिछले वर्ष मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुए सरकारी विद्यालयों की मरम्मत के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिले के 737 विद्यालयों के लिए प्रति विद्यालय दो-दो लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था. नियमानुसार, इनमें से 281 विद्यालयों में शिक्षा विभाग तथा 456 विद्यालयों में पंचायती राज विभाग के माध्यम से मरम्मत कार्य कराया जाना था. लेकिन लगभग एक वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बाद भी जिले के कई स्कूलों में काम या तो अधूरा है या अभी तक शुरू ही नहीं हो सका है, जिसका खामियाजा हजारों छात्र-छात्राएं भुगत रहे हैं.

ऐसा ही एक गंभीर मामला जिला मुख्यालय पर स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का सामने आया है. यहाँ विद्यालय भवन के कई हिस्से लंबे समय से पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी सुध नहीं ली गई है. दीवारों में दरारें और छतों की जर्जर स्थिति के बावजूद छात्राएं इन्हीं कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. अब एक बार फिर बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं.

सुरक्षा के लिए बंद करना पड़ता है स्कूल का एक हिस्साविद्यालय की प्रधानाचार्य ने बताया कि भवन की मरम्मत कराने के लिए उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित में प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक बजट या मरम्मत कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है. स्थिति इतनी विकट है कि तेज बारिश के दौरान छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय के एक पूरे हिस्से को बंद करना पड़ता है, ताकि कोई अप्रिय घटना या बड़ा हादसा न हो जाए.

जगह के अभाव में एक ही कमरे में बैठती हैं तीन कक्षाएंभवन के कई कमरों के अनुपयोगी और खतरनाक घोषित होने के कारण विद्यालय में कक्षाओं के संचालन के लिए कमरों की भारी कमी हो गई है. जगह के अभाव में विद्यालय प्रशासन को मजबूरन एक ही कमरे के भीतर तीन-तीन अलग-अलग कक्षाओं की छात्राओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है. इससे न केवल छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि शिक्षकों को भी अध्यापन कार्य कराने में भारी असुविधा और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

अभिभावकों में रोष, सर्वे कराकर मरम्मत की मांगस्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में सरकार और संबंधित विभाग की ढिलाई पर गहरा रोष व्यक्त किया है. उनका कहना है कि जब आपदा प्रबंधन के तहत बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका था, तो फिर अब तक कार्य पूरा क्यों नहीं किया गया? अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी जर्जर और खतरनाक स्कूली भवनों का तुरंत नए सिरे से सर्वे कराया जाए और प्राथमिकता के आधार पर उनकी मरम्मत कराई जाए ताकि बच्चे एक सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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