मिट्टी की दीवारों वाला वो किला, जिसे तोपें भी नहीं तोड़ सकीं! यह लोहागढ़ किला आज भी है अजेय

Last Updated:May 09, 2026, 19:42 IST
Loharh Fort Of Bharatpur : भरतपुर का लोहागढ़ किला राजस्थान की वीरता और अद्भुत रणनीति का अनोखा प्रतीक माना जाता है. 18वीं सदी में महाराजा सूरजमल द्वारा बनवाया गया यह किला अपनी खास बनावट के कारण कभी पूरी तरह जीता नहीं जा सका. मिट्टी और चूने से बनी इसकी मजबूत दीवारें तोपों के हमलों को भी बेअसर कर देती थीं, जिससे यह किला इतिहास में अजेय कहलाया.
लोहागढ़ किले का निर्माण 18वीं सदी में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था इस किले को इस तरह डिजाइन किया गया कि दुश्मन के लिए इसे जीतना लगभग नामुमकिन हो जाए इसकी दीवारें पत्थर की बजाय मिट्टी और चूने से बनाई गई थीं जिससे तोपों के गोले भी बेअसर हो जाते थे यही कारण हैं कि यह किला कई बड़े हमलों के बावजूद अडिग खड़ा रहा.
भरतपुर का लोहागढ़ किला राजस्थान के उन ऐतिहासिक किलों में शामिल है. जिसने अपनी मजबूती और अजेयता के दम पर अलग पहचान बनाई है. यह किला न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है. बल्कि वीरता और अजेय रणनीति का प्रतीक भी माना जाता है. इतिहास के कई हमलों को झेलने के बावजूद यह किला कभी पूरी तरह जीता नहीं जा सका यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
लोहागढ़ किले की सबसे खास बात इसकी सुरक्षा व्यवस्था थी किले के चारों ओर गहरी खाई बनाई गई थी जिसमें पानी भरा रहता था यह खाई दुश्मनों को किले की दीवारों तक पहुंचने से रोकती थी साथ ही किले के मुख्य द्वार भी बेहद मजबूत और रणनीतिक तरीके से बनाए गए थे जिससे दुश्मनों के लिए अंदर प्रवेश करना बेहद कठिन हो जाता था.
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आज के समय में लोहागढ़ किला भरतपुर की पहचान बन चुका है और यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. यह किला न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए खास है. बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है. किले की विशालता और उसकी मजबूती लोगों को आज भी हैरान कर देती है.
किले के भीतर कई महत्वपूर्ण संरचनाएं मौजूद हैं, जिनमें किशोरी महल, महल खास, और जवाहर बुर्ज प्रमुख हैं. जवाहर बुर्ज को विजय के प्रतीक के रूप में बनाया गया था जहां महाराजा सूरजमल ने अपनी जीत का जश्न मनाया था इसके अलावा फतेह बुर्ज भी किले की शान बढ़ाता है. जो दुश्मनों पर जीत की याद दिलाता है और इतिहास की गौरवगाथा सुनाता है.
लोहागढ़ किला सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं बल्कि साहस बुद्धिमत्ता और स्वाभिमान का प्रतीक है. यह किला यह सिखाता है कि मजबूत इरादों और सही रणनीति से किसी भी बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है. भरतपुर का यह गौरवशाली किला आज भी अपनी अजेयता की कहानी सुनाता है.और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा.
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