8 साल बाद ‘सैंडपेपरगेट’ की छांव में भिड़ेंगे दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया, वर्ल्ड चैंपियन और टेबल टॉपर की टक्कर आज से

नई दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट क्रिकेट की बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक भिड़ंत एक बार फिर से मैदान पर लौटने को तैयार है. डरबन में शुक्रवार से शुरू होने वाले इस मुकाबले के साथ ही दक्षिण अफ्रीका अपनी धरती पर उस ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी कर रहा है, जिसके खिलाफ साल 2017-18 का चर्चित ‘सैंडपेपरगेट’ दौरा आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे काले अध्यायों में गिना जाता है. इस बार मुकाबला सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करने का नहीं है, बल्कि मैदान पर वर्चस्व कायम करने की एक नई जंग है.
दोनों टीमों के बीच इस समय प्रतिष्ठा दांव पर है. दक्षिण अफ्रीका मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन के रूप में मैदान पर उतरेगा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम इस वक्त चैंपियनशिप पॉइंट टेबल में शीर्ष पर काबिज है. इसके अलावा, दोनों टीमों को पहले टेस्ट से ठीक पहले अपनी प्लेइंग इलेवन और खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़े कई पेचीदा सवालों के जवाब तलाशने होंगे.
डब्ल्यूटीसी फाइनल और पुरानी घरेलू जीत की यादेंपिछले साल लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर इस प्रतिद्वंद्विता में अपनी बढ़त मजबूत की थी. वहीं, अगर घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका की पिछली सीरीज जीत की बात की जाए, तो वह 2017-18 में आई थी, जो उनके घरेलू इतिहास में 48 सालों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली सीरीज जीत थी.
सैंडपेपरगेट का काला अध्याय और डरबन टेस्टवह सीरीज उस कुख्यात घटना का पर्याय बन गई थी जब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को गेंद की स्थिति बदलने के लिए सैंडपेपर का इस्तेमाल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. उस घटना के कारण डरबन में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान गेंद को अजीब और खतरनाक रिवर्स स्विंग मिलने में मदद मिली थी. उस समय इस बड़े विवाद के बाद तत्कालीन कप्तान स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर और कैमरून बैनक्रॉफ्ट पर लंबे प्रतिबंध लगाए गए थे.
ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजी आक्रमण में पुराने चेहरेहालांकि, वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में उस 2017-18 दौरे के चार प्रमुख सदस्य आज भी शामिल हैं, जिनमें कप्तान पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेज़लवुड और ऑफ स्पिनर नाथन लियोन हैं. इन चारों में से किसी पर भी उस समय गेंद से छेड़छाड़ की घटना में शामिल होने का आरोप नहीं लगा था और न ही इन्हें प्रतिबंधित किया गया था.
विवादों को पीछे छोड़कर मैदान पर ध्यानदोनों ही दलों के खिलाड़ी और प्रबंधन इस पुराने विवाद को अब और हवा नहीं देना चाहते. दौरे से पहले पैट कमिंस ने साफ किया कि वह बहुत पुराना समय हो चुका है और उस पर अब और ज्यादा कुछ कहने के लिए नहीं बचा है. दक्षिण अफ्रीकी कोच शुकरी कोनार्ड ने भी पुष्टि की कि उनकी टीम की तैयारियों में इस पुराने विवाद का कोई जिक्र नहीं रहा है. कोनार्ड ने कहा कि उनकी टीम पूरी तरह से अपनी क्रिकेट स्किल्स के दम पर मेहमान टीम को हराने के लिए प्रतिबद्ध है.
घरेलू दर्शकों के स्वागत पर कोच का बयानइसके साथ ही उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि घरेलू दर्शक ऑस्ट्रेलियाई टीम का मैदान पर पुरजोर विरोध करेंगे, लेकिन उन्होंने दर्शकों से यह अपील भी की कि विरोध का यह तरीका पूरी तरह से मर्यादित और सम्मानजनक होना चाहिए.
कगिसो रबाडा की फिटनेस पर असमंजसमैदान के अंदर दक्षिण अफ्रीका के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चिंता उनके प्रमुख तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा की फिटनेस को लेकर है. रबाडा ने मई के बाद से कोई भी आधिकारिक मैच नहीं खेला है, हालांकि उन्होंने पिछले हफ्ते एक दो दिवसीय इंट्रा-स्क्वॉड मुकाबले में हिस्सा लिया था और बिना किसी परेशानी के अपना स्पेल पूरा किया था. बल्लेबाजी कोच एशवेल प्रिंस ने कहा कि टीम रबाडा की उपलब्धता पर फैसला लेने के लिए मैच से ठीक पहले तक का इंतजार करेगी.
स्पिनर्स के अनुकूल डरबन की पिच और कॉम्बिनेशन की चुनौतीरबाडा की फिटनेस दक्षिण अफ्रीका के लिए बेहद अहम है क्योंकि डरबन की पिच पिछले कुछ सत्रों में स्पिन गेंदबाजों के अनुकूल रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए मेजबान टीम केशव महाराज और साइमन हार्मर दोनों स्पिनरों को एक साथ मैदान पर उतारने का मन बना रही है. यह कॉम्बिनेशन आजमाने से बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मार्को जेनसेन के साथ केवल एक ही विशेषज्ञ तेज गेंदबाज के लिए जगह बचेगी, जिससे अगर कोई अन्य खिलाड़ी चोटिल होता है तो टीम के पास विकल्प बहुत सीमित रह जाएंगे. दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजी विभाग पहले से ही हैमस्ट्रिंग की इस ‘महामारी’ जैसी स्थिति से जूझकर कमजोर हुआ है.
ऑस्ट्रेलियाई खेमे में चोट की समस्याएंदूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया की अपनी समस्याएं हैं. जोश इंगलिस उंगली की चोट के कारण श्रृंखला से बाहर हो चुके हैं, जबकि कैमरून ग्रीन पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते अनुपलब्ध हैं. कंगारू टीम को भी यह तय करना होगा कि यदि डरबन की पिच एक बार फिर स्पिनरों की मददगार साबित होती है, तो वे अपनी गेंदबाजी आक्रमण का संतुलन कैसे बनाएंगे. हालांकि, कमिंस, स्टार्क और हेज़लवुड का उनका स्थापित तेज गेंदबाजी तिकड़ी और साथ में नाथन लियोन की मौजूदगी उन्हें उस 2017-18 के दौरे की याद दिलाती है, लेकिन टीम के पास आज की परिस्थितियों के अनुकूल प्रदर्शन करने की चुनौती है.



