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नागौर में प्रकृति का अनोखा करिश्मा! जून में फूलों से लदा केर, ग्रामीण भी हैरान

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नागौर में प्रकृति का अनोखा करिश्मा! जून में फूलों से लदा केर, ग्रामीण भी हैरान

Last Updated:June 16, 2026, 06:52 IST

Ker Flowers: नागौर जिले में मानसून पूर्व बारिश और मौसम में आए बदलाव का असर अब वनस्पतियों पर भी दिखाई देने लगा है. आमतौर पर मार्च-अप्रैल में फूल और फल देने वाला केर का पौधा इस बार जून महीने में भी लाल-नारंगी फूलों से लदा नजर आ रहा है. खेतों की मेड़ों, चारागाहों और बंजर भूमि पर खिले ये फूल ग्रामीणों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले हुई बारिश, बढ़ी नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण केर में नई बढ़वार और पुष्पन की प्रक्रिया सक्रिय हुई है.

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नागौर. मानसून से पहले हो रही बारिश और मौसम में आए बदलाव का असर अब प्रकृति पर भी साफ दिखाई देने लगा है. नागौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों केर की झाड़ियां लाल-नारंगी फूलों से लदी नजर आ रही है. आमतौर पर मार्च-अप्रैल में फूल और फल देने वाला केर इस बार जून माह में भी फल और फूल दे रहा है. नागौर में बहुतायत मात्रा में केर की झाड़ियां पाई जाती है. ऐसे में लाल-नारंगी फूलों से लदी झाड़ियां बहुत सुंदर नजर आने लगी.

ग्रामीणों का कहना है कि जून महीने में केर पर इस तरह फूलों की बहार बहुत कम देखने को मिलती है. खेतों की मेड़ों, चारागाहों और बंजर भूमि पर उगी केर की झाड़ियां इन दिनों रंग-बिरंगे फूलों से सजी हुई दिखाई दे रही हैं. कई लोगों के लिए यह नजारा बहुत हैरान कर देने वाला है. वहीं, पर्यावरण और वनस्पति से जुड़े जानकार इसे बदलती जलवायु परिस्थितियों का प्रभाव मान रहे हैं.

अनुकूल नमी के कारण हो रहा ऐसा

पर्यावरण प्रेमी अजित सिंह ने बताया कि केर एक ऐसी वनस्पति है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में आसानी से विकसित होती है. सामान्य रूप से इसमें मुख्य पुष्पन वसंत ऋतु के दौरान होता है और मार्च-अप्रैल में फल लगते हैं. हालांकि अनुकूल नमी, समय से पहले हुई बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण इसमें नई बढ़वार और पुष्पन की प्रक्रिया अन्य महीनों में भी सक्रिय हो सकती है.

ग्रामीण प्राकृतिक बदलाव के मान रहे संकेत

इस वर्ष पश्चिमी विक्षोभ और लगातार सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण क्षेत्र में सामान्य से अधिक प्री-मानसून बारिश दर्ज की गई है. इसके चलते वनस्पतियों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है. केर की झाड़ियों पर जून में आए फूल इसी प्राकृतिक बदलाव का संकेत माने जा रहे हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो केर की अच्छी बढ़वार के साथ फल उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.

केर की बनती है सब्जी और अचार

केर के पौधे अधिकांश राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है. इस पर लगने वाले फल से मुख्य रूप से अचार और सब्जी बनाई जाती. वहीं, इसके फूल भी औषधीय गुणों के लिए काम में लिए जाते हैं. राजस्थान में बनने वाली केर और सांगरी की पारंपरिक सब्जी बहुत स्वादिष्ट होती है. राजस्थान घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों को यह सब्जी बहुत पसंद आती है. केर और सांगरी को सूखकर सालभर इनकी सब्जी बनाई जा सकती है.About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Nagaur,Rajasthan

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