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Vaibhav Sooryavanshi-Hasan Raza: वैभव सूर्यवंशी नहीं… इस क्रिकेटर के नाम है सबसे कम उम्र में डेब्यू का रिकॉर्ड, गुमनामी के अंधेरे में खोया

नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में उम्र सिर्फ एक संख्या है, लेकिन जब कोई 15 साल का बच्चा 22 गज की पट्टी पर देश का प्रतिनिधित्व करने उतरता है, तो इतिहास खुद ब खुद लिखा जाता है. भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने शनिवार को मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में अपनी भारतीय कैप हासिल की. इस डेब्यू के साथ ही उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड्स को मटियामेट कर दिया. वह न केवल भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा पुरुष खिलाड़ी बने, बल्कि किसी आईसीसी पूर्ण सदस्य देश के लिए टी20 फॉर्मेट में खेलने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष क्रिकेटर भी बन गए. लेकिन, क्रिकेट की इस जादुई दुनिया में कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स भी हैं जिन्हें तोड़ पाना नामुमकिन सा लगता है. महज़ 15 साल और 99 दिन की उम्र में डेब्यू करने के बावजूद, सूर्यवंशी किसी पूर्ण सदस्य देश के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले दूसरे सबसे युवा पुरुष क्रिकेटर ही बन पाए. उनसे करीब तीस साल पहले, यानी अक्टूबर 1996 में पाकिस्तान ने एक होनहार दाएं हाथ के बल्लेबाज हसन रज़ा को जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट मैच में मौका दिया था, जिन्होंने सबसे युवा पुरुष क्रिकेटर का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था.

वैसे अगर हम एसोसिएट या गैर-पूर्ण सदस्य देशों की बात करें, तो वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) टॉप-10 में भी जगह नहीं बना पाते हैं.छोटे यूरोपीय देश हर साल सैकड़ों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हैं, जिनमें से कई अर्ध-पेशेवर खिलाड़ियों द्वारा खेले जाते हैं, जिससे सटीक रिकॉर्ड रखना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रोमानिया के मारियन घेरासिम पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सिर्फ 14 साल और 16 दिन की उम्र में डेब्यू किया था. घेरासिम ने कुल 12 मैच खेले और साल 2022 में वे आखिरी बार मैदान पर दिखे थे.

वैभव सूर्यवंशी नहीं तोड़ पाए हसन रजा का रिकॉर्ड.

महिला क्रिकेट का इतिहास तो और भी हैरान करने वाला है. पाकिस्तान की साजिदा शाह ने 23 जुलाई 2000 को आयरलैंड के खिलाफ वनडे मैच में जब डेब्यू किया, तब उनकी उम्र महज 12 साल और 171 दिन थी. यह रिकॉर्ड उन्हें आज भी क्रिकेट इतिहास का सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी (महिला और पुरुष दोनों में) बनाता है.

पूर्ण सदस्य देशों में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले टॉप खिलाड़ियों की बात करें, तो पाकिस्तान के हसन रज़ा का नाम सबसे ऊपर है, जिन्होंने 24 अक्टूबर 1996 को जिम्बाब्वे के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट में 14 साल 227 दिन की उम्र में कदम रखा था. इसके ठीक छह दिन बाद, 30 अक्टूबर 1996 को उन्होंने क्वेटा में जिम्बाब्वे के खिलाफ ही 14 साल 233 दिन की उम्र में अपना वनडे डेब्यू भी कर लिया. लिस्ट में तीसरे स्थान पर भारत के वैभव सूर्यवंशी आते हैं, जिन्होंने 26 जून 2026 को आयरलैंड के बेलफास्ट में 15 साल 99 दिन की उम्र में टी20 डेब्यू किया. बांग्लादेश के मोहम्मद शरीफ ने 7 अप्रैल 2001 को हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल 116 दिन की उम्र में अपना वनडे डेब्यू किया था, जो इस लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं.

इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाले इन सितारों का भविष्य कैसा रहा?खासकर हसन रजा और साजिदा शाह के साथ क्या हुआ, यह कहानी बेहद दिलचस्प और थोड़ी भावुक करने वाली है. हसन रजा पाकिस्तान के घरेलू सर्किट में एक बेहद सफल और रन बनाने वाली मशीन थे. उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 44.70 की शानदार औसत से 36 शतकों के साथ 13,949 रन बनाए. लेकिन, इतना बेहतरीन घरेलू रिकॉर्ड होने के बावजूद उनका करियर बेहद छोटा और उतार-चढ़ाव भरा रहा. वह 1996 से 2005 के बीच नौ सालों तक पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के अंदर-बाहर होते रहे और खराब फॉर्म के कारण केवल 7 टेस्ट और 16 वनडे मैच ही खेल सके. लगातार मौकों की कमी से निराश होकर, रज़ा ने 2007 में अनधिकृत ‘इंडियन क्रिकेट लीग’ (ICL) का दामन थाम लिया, जिसने उनके राष्ट्रीय टीम में वापसी के सारे रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिए. बाद में 2018 में उनका नाम एक बड़े विवाद में आया, जब एक अंडरकवर डॉक्यूमेंट्री में वे कथित मैच फिक्सरों के साथ पिच से छेड़छाड़ की योजना पर चर्चा करते कैमरे में कैद हुए. हालांकि उन्होंने इसमें अपनी सीधी संलिप्तता से इनकार किया, लेकिन उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचा. आज 44 वर्ष से अधिक की उम्र के हो चुके हसन रज़ा पूरी तरह से लाइमलाइट से दूर गुमनामी का जीवन जी रहे हैं.

दूसरी ओर, रिकॉर्ड्स की मल्लिका साजिदा शाह का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब दस साल से ज्यादा चला, जिसमें उन्होंने 2 टेस्ट, 60 वनडे और 8 टी20 मैच खेले. साजिदा ने साल 2003 में जापान के खिलाफ मात्र 4 रन देकर 7 विकेट चटकाए थे, जो आज भी महिला वनडे क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी विश्लेषण है. लेकिन इतने बड़े रिकॉर्ड्स और इतनी कम उम्र में शुरुआत करने के बावजूद उनका करियर भी समय से पहले खत्म हो गया. साल 2010 में जब उन्होंने पाकिस्तान के लिए अपना आखिरी मैच खेला, तब उनकी उम्र महज 22 साल थी. इसके बाद वे चयनकर्ताओं की नजरों से दूर होती गईं और आज वे पेशेवर खेल से पूरी तरह संन्यास ले चुकी हैं.

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