मैच के दौरान गर्लफ्रेंड को मैसेज भेजते हुए पकड़ा गया क्रिकेटर, बीसीसीआई ने ठोका भारी जुर्माना

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर अनुशासन और नियमों की अनदेखी किसी भी खिलाड़ी के करियर और जेब दोनों पर भारी पड़ सकती. ऐसा ही एक दिलचस्प और सबक देने वाला मामला तमिलनाडु प्रीमियर लीग के दौरान सामने आया है. मैदान पर मैच चलने के दौरान अपनी गर्लफ्रेंड को मैसेज करना तमिलनाडु के एक उभरते युवा बल्लेबाज को काफी महंगा पड़ गया. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की एंटी करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिटने सख्त कदम उठाते हुए खिलाड़ी पर नियम उल्लंघन के तहत 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका है.
तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) के एक हालिया मुकाबले के दौरान यह घटना घटी. मैच के दौरान ‘खिलाड़ी और मैच अधिकारी क्षेत्र’ यानी PMOA (Players and Match Officials Area) में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना पूरी तरह से वर्जित होता है. लेकिन यह 26 वर्षीय युवा बल्लेबाज मैच के दौरान अपने फोन का मोह नहीं छोड़ पाया और अपनी गर्लफ्रेंड को टेक्स्ट मैसेज भेजते हुए पकड़ा गया. चूंकि यह एंटी-करप्शन प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन था, इसलिए मामला तुरंत बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के संज्ञान में लाया गया.
मैच के बीच गर्लफ्रेंड से चैटिंग पड़ गई महंगी.
खिलाड़ी की पहचान और टीएनसीए का रुखतमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल खिलाड़ी के नाम का औपचारिक खुलासा नहीं किया है. संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया, ‘ जांच अभी जारी है, इसलिए हम खिलाड़ी के नाम का खुलासा नहीं कर सकते. हालांकि, हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि वह एक बाएं हाथ का बल्लेबाज है, जिसने पिछले रणजी ट्रॉफी सत्र में तमिलनाडु के लिए दो महत्वपूर्ण अर्धशतक जड़े थे. उसने मैच के दौरान अपनी महिला मित्र को संदेश भेजा था. उस पर भ्रष्टाचार या फिक्सिंग जैसा कोई आरोप नहीं है, लेकिन पीएमओए में फोन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसलिए यह सुरक्षा नियमों और प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन है.’
2 साल का बैन टला, जुर्माने पर बनी सहमतिप्रारंभिक जांच के दौरान बोर्ड और सुरक्षा इकाई ने इस लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया था. शुरुआत में अनुशासन समिति इस 26 वर्षीय खिलाड़ी पर दो साल का कड़ा प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही थी. यदि ऐसा होता, तो इस युवा क्रिकेटर का खिलता हुआ करियर अधर में लटक सकता था. हालांकि, विस्तृत छानबीन के बाद अधिकारियों ने पाया कि इसके पीछे कोई सट्टेबाजी, फिक्सिंग या भ्रष्टाचार की मंशा नहीं थी. यह केवल एक व्यक्तिगत लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला था. अपराध की प्रकृति को बहुत गंभीर न मानते हुए, अधिकारियों ने कड़ा रुख थोड़ा नरम किया और खिलाड़ी पर 2 साल के बैन के बजाय 1 लाख रुपये का वित्तीय जुर्माना लगाकर छोड़ दिया.
क्या है PMOA प्रोटोकॉल और क्यों है यह इतना सख्त?क्रिकेट में भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी को रोकने के लिए बीसीसीआई और आईसीसी (ICC) ने बेहद सख्त दिशानिर्देश तय किए हैं.
मोबाइल बैन: मैच के दिन जैसे ही खिलाड़ी स्टेडियम के ‘पीएमओए’ (डगआउट, ड्रेसिंग रूम, मैच ऑफिसर्स एरिया) में प्रवेश करते हैं, उन्हें अपने सभी संचार उपकरण (मोबाइल, स्मार्टवॉच, लैपटॉप आदि) एंटी-करप्शन अधिकारियों के पास जमा कराने होते हैं.
बाहरी संपर्क पर रोक: मैच खत्म होने तक कोई भी खिलाड़ी या अधिकारी किसी भी बाहरी व्यक्ति से फोन, इंटरनेट या मैसेज के जरिए संपर्क नहीं कर सकता. चाहे मंशा अपनी गर्लफ्रेंड को मैसेज भेजने की ही क्यों न हो, ड्रेसिंग रूम या डगआउट से बाहरी दुनिया में संपर्क साधना सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़ी सेंध माना जाता है.
राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर पर भी गिर चुकी है गाजमैच के दौरान फोन का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई का यह कोई पहला मामला नहीं है. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पिछले सीजन में भी ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है. राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर और युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के अभिभावक के रूप में नियुक्त रोमी भिंडर पर भी आईपीएल मैच के दौरान टीम डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने का दोषी पाया गया था. उस समय बीसीसीआई ने उन पर भी 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था.


