सावन में पालक-चौलाई से लेकर दूध तक क्यों छोड़ देते हैं लोग? पुरानी परंपरा के पीछे छिपी है हैरान करने वाली वजह

फरीदाबाद: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस महीने में लोग पूजा-पाठ और व्रत के साथ अपने खानपान का भी खास ध्यान रखते हैं. घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर सावन में कुछ चीजें खाने से मना करते हैं. इनमें पत्तेदार सब्जियां, दही, दूध, बैंगन, प्याज और लहसुन जैसी चीजें शामिल हैं. इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ मौसम से जुड़ी कुछ वजहें भी बताई जाती हैं. बारिश के मौसम में शरीर का पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है, इसलिए हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है.
पत्तेदार सब्जियों से क्यों करें परहेज
Local18 से बातचीत में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सावन के महीने में पालक, चौलाई और दूसरी पत्तेदार सब्जियों को खाने से परहेज करना चाहिए. बारिश के दिनों में जमीन में नमी और पानी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से कई तरह के कीड़े-मकोड़े बाहर निकलते हैं और पत्तेदार सब्जियों पर चिपक जाते हैं. ऐसे में इन सब्जियों को साफ करना भी मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से पुराने समय से सावन में साग नहीं खाने की परंपरा चली आ रही है.
सावन में साग और भादो में दही
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि हमारे यहां एक कहावत भी काफी प्रचलित है कि सावन में साग और भादो में दही नहीं खाना चाहिए. इसके पीछे मौसम और खानपान से जुड़ी पुरानी समझ मानी जाती है. बारिश के मौसम में ज्यादा भारी या जल्दी खराब होने वाली चीजों से बचने की सलाह दी जाती है. सावन को सात्विक महीना माना गया है, इसलिए इस दौरान भोजन भी सादा और हल्का रखने की परंपरा है.
दूध का सेवन भी कम करने की सलाह
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सावन में दूध का इस्तेमाल भी कम करना चाहिए. बारिश के दिनों में गाय हरी घास और दूसरी वनस्पतियां खाती हैं, जिन पर छोटे कीड़े-मकोड़े हो सकते हैं. धार्मिक मान्यता में भी सावन के दौरान दूध को भगवान शिव के अभिषेक से जोड़ा गया है. इसी वजह से इस महीने में दूध का सेवन कम करने की बात कही जाती है और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा भी है.
सात्विक भोजन पर दें जोर
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सावन भगवान शिव की आराधना का महीना है, इसलिए इस दौरान सात्विक भोजन करना ज्यादा उचित माना जाता है. नॉनवेज, प्याज और लहसुन जैसी चीजों से भी इस महीने में परहेज करने की धार्मिक परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा भोजन शरीर में भारीपन और आलस्य बढ़ा सकता है. इसलिए सावन में लोग हल्का और सात्विक भोजन करते हैं, जिससे पूजा-पाठ और व्रत के दौरान शरीर भी सहज बना रहे.
गुड़ को बताया बेहतर विकल्प
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सावन में खाने के लिए गुड़ एक अच्छी चीज मानी जाती है. आयुर्वेद में भी गुड़ के कई गुण बताए गए हैं. सावन के महीने में गुड़ का सेवन जरूर करना चाहिए. हालांकि किसी भी चीज का सेवन अपनी जरूरत और शरीर की स्थिति के अनुसार ही करना चाहिए.
पुरानी परंपराओं में छिपी मौसम की समझ
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि हमारे पूर्वजों ने मौसम के हिसाब से खानपान की कई परंपराएं बनाई थीं. सावन में साग, भादो में दही और दूसरे महीनों में कुछ विशेष चीजों से परहेज करने की बातें इसी पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं. आज भले ही बहुत से लोग इन नियमों को नहीं मानते हैं, लेकिन सावन में ताजा, साफ और हल्का भोजन करना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है.



