बार-बार निकल रहे हैं पिंपल? वजह सिर्फ ऑयली स्किन नहीं, विज्ञान से जानें स्किन-माइंड का पूरा कनेक्शन

चेहरे पर पिंपल नजर आते ही टेंशन होने लगती है. तुरंत लगता है कि कोई क्रीम लगाई जाए, या क्या नया सीरम खरीदा जाए. पर क्या सच में आपके चेहरे पर नजर आने वाली ये परेशानियां सिर्फ ब्यूटी और स्किन से ही जुड़ी हैं? क्या आप जानते हैं कि आप अपनी त्वचा देखकर ये बता सकते हैं कि आपके शरीर में क्या चल रहा है? असल में स्किन आपके शरीर का सबसे बड़ा अंग होती है. आपकी त्वचा चाहे दमक रही हो, या फिर मुरझा रही हो, इसका कनेक्शन ऊपर से कहीं ज्यादा भीतर से होता है. दरअसल आपकी त्वचा ये बताती है कि आपके शरीर के भीतर क्या चल रहा है.
क्या तनाव और भावनाएं वाकई त्वचा को प्रभावित करती हैं?
इस सवाल का जवाब है हां, बिल्कुल. कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित किया है कि मानसिक तनाव और भावनाएं त्वचा की स्थिति पर गहरा असर डालती हैं. उदाहरण के लिए, 2016 के एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग माइंडफुलनेस का अभ्यास करते हैं, उनमें सामाजिक तनाव कम होता है और त्वचा की गुणवत्ता में सुधार होता है. इस अध्ययन में 120 त्वचा रोगियों पर रिसर्च की, जिसमें 33.4% लोगों ने सोशल एंग्जाइटी की शिकायत की. शोधकर्ताओं ने देखा कि कम माइंडफुलनेस वाले लोगों में अपनी त्वचा को लेकर शर्मिंदगी की भावना ज्यादा थी.
इसके अलावा, तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और कॉर्टिकोस्टीरोन त्वचा के स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित करते हैं. जैसे त्वचा की कोशिकाओं का निर्माण, चोटों का ठीक होना, त्वचा में जलन या सूजन, त्वचा में झुर्रियां और ढीलापन. एग्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों में मानसिक तनाव और डिप्रेशन जैसी परेशानी साफ देखने को मिलती है.
2013 के एक दूसरे अध्ययन में 85% त्वचा रोगियों ने माना कि मानसिक तनाव का प्रबंधन उनकी त्वचा की स्थिति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण है. 2007 के शोध में पाया गया कि 30% त्वचा रोगियों में मानसिक समस्याओं के लक्षण दिखाई देते हैं, और यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता कि समस्या की जड़ त्वचा है या मन. ऐसे में माइंडफुलनेस न केवल त्वचा की दिखावट को बेहतर बनाती है, बल्कि यह घावों को ठीक करने में भी मदद करती है.
कैसे बेहतर हो सकती है आपकी स्किन हेल्थ?
वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की राय के आधार पर, त्वचा की देखभाल के लिए एक होलिस्टक अप्रोच अपनाना जरूरी है. Healthline की रिपोर्ट के अनुसार आयुर्वेद विशेषज्ञ कैटी सिल्कॉक्स कहती हैं, “त्वचा हमारे आंतरिक स्वास्थ्य का एक दर्पण है.” वे कहती हैं कि त्वचा की समस्याएं अक्सर हमारी भावनाओं और तनाव का परिणाम होती हैं. नेचुरोपैथिक डॉक्टर चार्ल्स टैबोन का कहना है कि त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है और यह पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों के खिलाफ पहली रक्षा पंक्ति है.
आपकी गट हेल्थ और त्वचा का संबंधआंत और त्वचा का गहरा संबंध है. 2021 के एक अध्ययन में पाया गया कि त्वचा की बीमारियां आंत और त्वचा के माइक्रोबायोम को बदल देती हैं. आंत के माइक्रोबायोम में असंतुलन सूजन को बढ़ाता है, जो एक्जिमा, सोरायसिस, मुंहासे, और डैंड्रफ जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है. 2019 के एक शोध में यह भी पाया गया कि तनाव और अवसाद आंत के माइक्रोबायोम को बदलकर त्वचा की सूजन को बढ़ाते हैं.



