कोमल जैन क्यों बनना चाहती हैं साध्वी? जानें वजह

Last Updated:May 04, 2026, 07:14 IST
Sirohi Hindi Newsचार्टर्ड अकाउंटेंट से बैंक मैनेजर बनने तक का सफल करियर बनाने वाली कोमल जैन ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है. जहां लोग बेहतर नौकरी और ऊंची सैलरी के सपने देखते हैं, वहीं कोमल ने भौतिक जीवन को त्यागकर संयम और आध्यात्म का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि लंबे समय से उनका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन की ओर था, जिसने अंततः उन्हें यह बड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया. परिवार और समाज में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन कोमल अपने निर्णय को लेकर पूरी तरह स्पष्ट और संतुष्ट हैं.
गुजरात के सूरत में ड्रेस मेटेरियल का व्यवसाय करने वाले पुखराज परमार और मंजुला की तीन पुत्रियों में से एक पुत्री कोमल जैन यह दीक्षा दीक्षादानेश्वरी आचार्य भगवंत गुणरत्नसूरी के शिष्यरत्न सुरीमंत्र समाराधक आचार्यदेव रविरत्नसूरी और जयेशरत्नसूरी आदि की निशा में ग्रहण करेगी. पिता पुखराज ने बताया कि सिरोही जिले का भटाना गांव गुजरात सीमा के नजदीक है और इस गांव में दीक्षा लेने वाली यह 8वीं मुमुक्षा है. एक युवक ने भी दीक्षा लेकर वे मुनिराज हेमकीर्तिविजय महाराज बने.
मुमुक्षा कोमल ने बताया कि संसार एक सपना है, संयम का मार्ग सत्य का मार्ग हैं. पालीतणा में उपधान करने पर कोमल को वहां विराजित दादा आदिनाथ आशीर्वाद मिला और उनका मन संयम के मार्ग की तरफ बढ़ने लगा. उन्होनें संस्कृत ज्ञान, कर्मग्रन्थ, जीवीचार एवं नवतत्व को पढ़ा समझा और अध्यात्म की राह चुन लीं. कोमल ने दीक्षा से पहले बताया कि माता-पिता से उत्तम संस्कार मिले, देव-गुरु और धर्म की पहचान करवाई और सभी स्वार्थो को एक तरफ रखते हुए उन्हें आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की स्वीकृति दी.
जैन संघ भटाना के प्रवक्ता महेन्द्र परमार ने बताया कि इस कार्यक्रम में 6 मई को दीक्षा विधि के साथ सोमवार में 8 बजे प्रभु दर्शन बान्दोली और प्रभु भक्ति का कार्यक्रम पिण्डवाडा के संगीतकार नमन जैन की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी. दीक्षा महोत्सव में दीक्षार्थी के स्वागत एवं विदाई के लिए बडी संख्या में दक्षिण भारत में कार्यरत व्यवसायी भी पहुंच रहे हैं गांव में 100 घरो की जैन बस्ती हैं। गावं को विशेष रूप से सजाया सवारा गया हैं.
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दीक्षार्थी कोमल तपस्वीरत्न साध्वी श्री धर्मांगरेखाश्री की शिष्या बनेगी. गुरुमाता प्रवर्तिनी पुण्यरेखाश्री की देश भर में 496 शिष्या हैं. अब दीक्षार्थी कोमल 497वीं शिष्या होगी. कोमल की गुरुदेव साध्वी धर्मांगरेखाश्रीजी की 100वीं ओली यानि 900 दिन तक लुखा-अलूखा भोजन करने के तप का पारणा भी भटाणा मे इस दीक्षा महोत्सव के शुभ अवसर पर होगा. इस कार्यक्रम के साक्षी भटाना व रेवदर तहसील के जैन समाज के सैकड़ो लोग होंगे.
दीक्षार्थी कोमल जैन ने बताया कि उनके बड़े पापा की पुत्री ने भुवनभानु समुदाय में दीक्षा ली थी. उन्होंने चार्टेड एकाउन्टेट की शिक्षा ग्रहण करने एवं बैंक में नौकरी करने के बाद भी जैन धर्म से उनका लगाव व धर्म को जानने समझने का जुनून गजब का था और इसी जुनून ने उन्हें दीक्षा ग्रहण करने का फैसला लेने में मदद की.



