अचलगढ़ की अरावली पहाड़ियों में स्थित मां काली की रहस्यमयी गुफा, जहां राजा गोपीचंद ने की थी 12 साल कठोर तपस्या

Last Updated:October 15, 2026, 08:02 IST
Achalgarh Kali Temple Mount Abu: राजस्थान के माउंट आबू स्थित अचलगढ़ में अरावली पहाड़ियों पर मां काली की एक प्राचीन गुफा है. समुद्र तल से 1450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में 550-600 साल पहले राजा गोपीचंद ने राजपाठ त्याग कर 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. प्रसन्न होकर मां काली ने उन्हें इसी गुफा में दर्शन दिए थे. गुफा में प्राकृतिक चट्टान को उकेर कर बनाई गई मां काली की साढ़े छह फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है. नवरात्रि में यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पैदल चढ़कर आते हैं.
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Mount Abu: राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के अचलगढ़ क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 1450 मीटर की ऊंचाई पर एक अति प्राचीन प्राकृतिक गुफा स्थित है. यह पवित्र गुफा न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी बहुत अधिक है. अरावली पर्वतमाला की दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसी इस गुफा में मां काली का एक प्राचीन और सिद्ध मंदिर बना हुआ है. नवरात्रि के दौरान यहां देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक माता के दर्शन के लिए दुर्गम पहाड़ी पर पैदल चढ़ाई करके पहुंचते हैं.
इस स्थान का इतिहास कई सदियों पुराना माना जाता है. स्थानीय लोककथाओं और मान्यताओं के अनुसार लगभग 550 से 600 वर्ष पूर्व मालवा के राजा गोपीचंद ने अपना संपूर्ण राजपाठ त्याग दिया था. संसार की मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने वैराग्य धारण किया और अचलगढ़ की इस प्राकृतिक गुफा में शरण ली. उन्होंने यहां लगातार 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की. उनकी घोर साधना से प्रसन्न होकर मां काली ने उन्हें इसी गुफा के भीतर अपने दिव्य रूप में दर्शन दिए थे. इस पवित्र स्थल का संबंध राजा गोपीचंद के मामा, अमर राजा भर्तृहरि से भी जुड़ा हुआ है. गुफा के सामने पहाड़ी की तलहटी में स्थित प्रसिद्ध मंदाकिनी कुंड के निकट राजा भर्तृहरि का महल बना हुआ है. कहा जाता है कि मामा राजा भर्तृहरि और भांजे राजा गोपीचंद दोनों ने राजकाज छोड़कर इस शांत और आध्यात्मिक वातावरण में ईश्वर भक्ति और कठोर तप किया था. मंदिर परिसर में आज भी राजा गोपीचंद की प्रतिमा श्रद्धा के साथ स्थापित है.
चट्टान पर तराशी गई मां काली की 6.5 फीट ऊंची प्रतिमाइस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित मां काली की प्रतिमा है. गुफा के भीतर मां काली की लगभग साढ़े छह फीट ऊंची भव्य और अद्भुत प्रतिमा विराजमान है. यह प्रतिमा किसी अलग पत्थर से बनाकर स्थापित नहीं की गई है, बल्कि जिस विशाल प्राकृतिक चट्टान पर माता प्रकट हुई थीं, उसी जीवित चट्टान पर बारीक नक्काशी करके इस मनमोहक विग्रह को उकेरा गया है. गुफा का आंतरिक वातावरण बेहद संकरा और शांत है. अचलगढ़ की भीषण गर्मी और तेज धूप में भी गुफा के भीतर ठंडक बनी रहती है. प्राकृतिक रूप से ठंडी रहने वाली यह गुफा अध्यात्म और ध्यान के लिए उत्तम स्थान है. मंदिर के ऊपरी भाग में मेवाड़ के पराक्रमी शासक महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित अचलगढ़ किला और मां चामुंडा देवी का प्राचीन मंदिर भी स्थित है. यहां से अचलगढ़ के नयनाभिराम दृश्यों को देखा जा सकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 15, 2026, 08:02 IST



