अशोक गहलोत की जादूगिरी के खेल का राहुल गांधी अभी तक नहीं ढूढ पाए कोई तोड़

जयपुर. नगरीय निकाय चुनाव के बाद राजस्थान में कांग्रेस पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस चुनाव आयुक्त के मसले पर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रही है. लेकिन इस जंग के बीच कांग्रेस अपने ही घर में एक महाभारत से जूझ रही है. कांग्रेस आलाकमान के सामने राजस्थान कांग्रेस की कलह फिर मुश्किल बन गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में कांग्रेस में कलह और गुटबाजी के चलते बीजेपी ने सभी निकायों पर कब्जा कर लिया. अब यह कलह खुलकर मैदान में आ गई. पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग में हार का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा पर फोड़ा है. मसला सिर्फ हार की लड़ाई तक नहीं रहा. विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा पर सोशल मिडिया के जरिए व्यक्तिगत हमले भी किए. उन्होंने डोटासरा को भ्रष्ट बताते हुए पार्टी से कार्रवाई की मांग की है. कांग्रेस में यह चर्चा तेज है कि आखिर विश्वेंद्र किसके इसारे पर डोटासरा को घेर रहे हैं. वो भी ऐसे समय जब कांग्रेस एक तरफ चुनाव आयुक्त मसले पर जंग का ऐलान कर चुकी है. वहीं राजस्थान में पंचायत चुनाव का शंखनाद भी किसी भी वक्त हो सकता है.
डोटासरा के जन्मदिन के जश्न के रंग में पड़ा भंगराजस्थान में आज कांग्रेस में जगह जगह प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का जन्मदिन मनाया जा रहा है. जयपुर से किशनगढ़ की यात्रा के दौरान कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में डोटासरा को पगड़ी और माला पहनाने की होड़ रही. लेकिन जन्मदिन के जश्न के रंग में भंग डाला अशोक गहलोत के करीबी नेता और पूर्व मंत्री विश्वेद्र सिंह ने. विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मिडिया पर एक पोस्ट की. पोस्ट में निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस की शिकस्त के लिए सीधे प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जिम्मेदार ठहराया. विश्वेंद्र सिंह सिर्फ हार का ठीकरा फोड़ने तक सीमित नहीं रहे बल्कि डोटासरा पर रीट पेपर लीक में भ्रष्टाचार से लेकर अपने बेटे बहू को राजस्थान सिविल सेवा में इंटरव्यू में अच्छे मार्क्स दिलाकर पास करवाने का आरोप भी लगाया. विश्वेंद्र ने डोटासरा पर वो सभी आरोप लगाए जिनका इस्तेमाल बीजेपी डोटसरा पर हमले के लिए करती रही है.
विश्वेन्द्र सिंह ने अपनी पहली पोस्ट में यह कहाभरतपुर और डीग में कांग्रेस का बंटाधारा का जिम्मेदार कौन? दोनों जिला अध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे. असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया. जनता ने सबक सिखा दिया. पहले जनता तो कब्र में दफनाया लेकिन अब जनता भी तैयार बैठी है. इन दोनों जिला अध्यक्षों और इन्हें बचाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को कब्र में दफनाने के लिए.
विश्वेन्द्र सिंह ने दूसरी पोस्ट यह लिखाश्रीमान डोटासरा की हकीकत,2018 की भर्ती में डोटासरा जी की पुत्रवधु प्रतिभा पूनिया और पुत्रवधु के भाई गौरव पूनिया तथा बहन प्रज्ञा पूनिया को इंटरव्यू में समान 80-80 अंक दिए गए. सत्ता का दुरुपयोग कर समान अंक दिलवाए. सभी के समान अंक आना गभीर संदेह पैदा करता है. 2016 में डोटासरा के बेटे अविनाश डोटासरा का आरएएस में चयन हुआ. उसमें ओबीसी प्रमाण पत्र नोन क्रीमीलेयर का बनवाकर लाभ लिया. डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते REET परीक्षा में धांधली हुई. मैं सीएम से निवेदन करता हूं कि डोटासरा के खिलाफ गहनता से जांच की जाए. डोटासरा अगली बार भरतपुर आएंगे तो रास्ता बताएंगे और चंद्रभान से बढ़िया स्वागत सत्कार करेंगे. ऐसे भष्ट नेताओं को तत्काल अपना इस्तीफा दे देना चाहिए और पार्टी को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.
निकाय चुनाव के टिकट बंटवारे में विश्वेंद्र सिंह रहे थे दरकिनारइस पूरे घटनाक्रम से पहले समझते हैं आखिर विश्वेंद्र सिंह के डोटासरा के खिलाफ मोर्चा खोलने की वजह आखिर क्या है? दरअसल भरतपुर और डीग दोनों जिलों में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विश्वेंद्र के पसंद के नहीं हैं. निकाय चुनाव के टिकट बंटवारे में विश्वेंद्र सिंह की दोनों ही जिलों में नहीं चली. दोनों जिलों में न कांग्रेस न बीजेपी को बहुमत मिला. दोनों ही पार्टियों की तुलना में सभी निकायों में निर्दलीय पार्षद अधिक जीत कर आए. भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है. इसी वजह से बीजपी ने भरतपुर नगर निगम समेत सभी दस निकायों में निर्दलीयों को साधकर अपना बोर्ड बना लिया. यानी नगरपालिका अध्यक्ष से लेकर नगर निगम के मेयर पद पर बीजेपी ने कब्जा जमाया.
डोटासरा बोले- बीजेपी दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर वार कर रही हैबीजेपी ने सिर्फ निर्दलीयों को ही नहीं साधा बल्कि कांग्रेस की गुटाबाजी का फायदा उठाकर उसके पार्षदों में भी सेंधमारी की थी. चर्चा है कि अंदरखाने कांग्रेस के एक गुट ने बीजेपी की मदद की थी. उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विश्वेंद्र सिंह का नाम लिए बगैर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर वार कर रही है. डोटासरा ने कहा कि उनकी काबिलियत पर हाईकमान को भरोसा है तभी वो छह साल से प्रदेश अध्यक्ष हैं.
कौन है विश्वेंद्र सिंह और डोटासरा पर हमले के लिए ये वक्त क्यों चुना?कांग्रेस में इस कलह की असली वजह क्या है? क्या विश्वेंद्र सिंह का यह हमला राजस्थान कांग्रेस में गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बीच चल रही जंग का ही अगला पार्ट है. इसको समझने के लिए पहले विश्वेंद्र सिंह को समझना होगा. विश्वेंद्र सिंह भरतपुर के पूर्व महाराजा और कांग्रेस का भरतपुर तथा डीग समेत बृज क्षेत्र में एक दशक से चेहरा बने हुए हैं. वे अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं. भरतपुर से तीन बार सांसद और तीन बार ही विधायक रहे. 2018 में गहलोत सरकार में पायलट कोटे से मंत्री बने. फिर गहलोत के खिलाफ बगावत कर मानेसर गए पायलट समर्थक 19 विधायकों में शामिल थे.
चुनाव नतीजों के बाद अब टीम गहलोत डोटासरा पर हमलावर हैगहलोत ने विश्वेंद्र सिंह समेत पायलट समर्थकों को बगावत के बाद मंत्रीमंडल से हटा दिया था. लेकिन बाद में विश्वेंद्र सिंह पाला बदल कर गहलोत कैंप में चले गए और फिर मंत्री बनाए गए. एक वजह विश्वेंद्र सिंह और उनके बेटे अनिरुद्ध सिंह के बीच आपसी कलह भी है. बेटा अनिरुद्ध पायलट समर्थक है और विश्वेंद सिंह गहलोत समर्थक. राजस्थान में निकाय चुनाव में कांग्रेस में टिकट बंटवारे की कमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के पास थी. लेकिन कई जिलों में क्षेत्रीय नेता गहलोत समर्थक हैं. चुनाव नतीजों के बाद अब टीम गहलोत हमलावर है. जहिर है बीजेपी के लिए कांग्रेस की ये गुटबाजी वरदान से कम नहीं है.
मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने दिखाई विश्वेन्द्र सिंह के प्रति सहानुभूतिकांग्रेस में चल रही इस गुटबाजी पर बृज क्षेत्र के बीजेपी नेता और सीएम भजनलाल शर्मा के करीबी गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम बोल रहे हैं कि कांग्रेस हताशा में है. अंदरुनी लड़ाई चरम पर है. गालियां चल रही है. यह कांगेस के कल्चर में है. सीताराम केसरी के कुर्ते फाड़े हैं. अब एक दूसरे पर तंज कस रहे हैं. गहलोत डोटासरा पर और डोटासरा गहलोत पर तंज कर रहे हैं. डोटासरा को ये कहने की क्या जरुरत है कि मैं प्रदेशाध्यक्ष हूं. महाराज विश्वेंद्र सिंह का राजस्थान में बड़ा कद है. कांग्रेस की ओर से जैसे उनकी उपेक्षा की जा रही है वो ठीक नहीं है.
राहुल दो कदम आगे बढ़ते हैं और फिर कोई नया बवाल हो जाता है
दरअसल निकाय चुनाव के बाद राजस्थान में इसी महीने से पंचायत चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में डोटासरा विरोधी गुट डोटासरा को कटघरे में खड़ा कर पंचायत चुनाव में टिकट बंटवारा की कमान छीनना चाहते हैं. हालांकि इस जंग से फिलहाल सचिन पायलट गुट दूरी बनाए हुए हैं. राहुल गांधी जैसे ही सोचते ही कि वो बीजेपी को घेरने में दो कदम आगे बढ़ चुके इतने में पंजाब के बाद राजस्थान कांग्रेस की कलह की नई कहानी याद दिला देती है कि बीजेपी से जंग से पहले खुद का घर ठीक करना राहुल गांधी के लिए उससे भी बड़ी चुनौती है.



