अस्पताल खुद चलकर आएगा मरीज के पास, बन गई दुनिया की ‘पहली सोलर एम्बुलेंस’, गाड़ी में ही मिलेगा पूरा इलाज

Last Updated:August 29, 2026, 16:52 IST
अफ्रीका के कई इलाकों में किसी मरीज के लिए अस्पताल पहुंचना आज भी आसान नहीं है. करीब एक-तिहाई अफ्रीकी आबादी ऐसी जगहों पर रहती है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में दो घंटे से ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए स्पेशल एम्बुलेंस तैयार की जा रही है. इसमें एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड और वैक्सीन को ठंडा रखने के लिए फ्रिज जैसी मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं.Stella Juva (Bart van Overbeeke / STE)
अफ्रीका के लोगों को ने ऐसी एम्बुलेंस बनाई है कि मरीजों को अस्पताल नहीं जाना होगा, बल्कि अस्पताल उनके पास आएगा. नीदरलैंड के 23 छात्रों की कड़ी मेहनत से बनी एम्बुलेंस अब यहां के लोगों के लिए वरदान साबित होगी. अफ्रीका के कुछ इलाकों में आज भी लाखों लोग ऐसे हैं, जिन्हें अस्पताल पहुंचने के लिए घंटों का सफर तय करना पड़ता है. बिजली की कमी के कारण वहाँ के कई छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाएँ और मेडिकल उपकरण काम नहीं कर पाते हैं.
नीदरलैंड के छात्रों की और से स्टेला जुवा नाम की एक ऐसी गाड़ी बनाई है, जिसे दुनिया की पहली सोलर एम्बुलेंस कहा जा रहा है. यह आम एम्बुलेंस की तरह सिर्फ मरीजों को ढोने का काम नहीं करती, बल्कि खुद एक चलता-फिरता अस्पताल है. इस गाड़ी की छत पर लगे सोलर पैनल इसे चलते समय भी चार्ज करते रहते हैं. जब यह रुकती है, तो इसके पैनल पंखों की तरह फैल जाते हैं और धूप से दोगुनी बिजली खींचने लगते हैं.
फ्यूल या चार्जिंग स्टेशन की नहीं जरूरत
स्टेला जुवा में एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड और वैक्सीन को ठंडा रखने के लिए फ्रिज जैसी मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं. सबसे खास बात यह है कि इन उपकरणों को चलाने के लिए वाहन को फ्यूल या चार्जिंग स्टेशन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. यानी जहां बिजली की लाइन नहीं पहुंची, वहां सूरज की रोशनी ही इस मोबाइल क्लीनिक की बिजली बन सकती है. इस महीने नीदरलैंड्स के 23 छात्रों की टीम ने केन्या में स्टेला जुवा को टेस्ट किया. यह टेस्ट अमरेफ हेल्थ अफ्रीका के साथ मिलकर किया गया.
टीम ने वाहन को केन्या में 800 किलोमीटर से ज्यादा चलाया. इसमें कई ऐसे रास्ते भी शामिल थे, जहां धूल, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के बीच सफर करना पड़ा. टीम मोसिरो के एक ऐसे स्वास्थ्य केंद्र तक भी पहुंची, जहां बिजली की सुविधा नहीं है. वहां पहुंचने के लिए कई घंटे तक खराब कच्ची सड़क पर वाहन चलाना पड़ा. लेकिन जिस नतीजे ने छात्रों को सबसे ज्यादा चौंकाया, वह इसकी ऊर्जा क्षमता थी.
सारे मेडिकल उपकरण चलाने के बाद भी बची ऊर्जा
टेस्ट के दौरान जब स्टेला जुवा एक जगह खड़ी थी. उसके सभी मेडिकल उपकरण एक साथ चलाए गए, तब भी सोलर पैनलों ने जितनी ऊर्जा पैदा की. वह वाहन की खपत से ज्यादा थी. छात्रों के मुताबिक, इससे साबित होता है कि स्टेला जुवा दूरदराज इलाकों में बिना पारंपरिक ईंधन और बिना चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के भी काम कर सकती है. टेस्ट के दौरान मरीजों पर उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया गया.
गर्भवती महिलाओं के लिए भी बड़ी मदद
मोसिरो जैसे इलाकों में बिजली की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ता है. खासकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. अगर मेडिकल उपकरण लेकर ऐसी सोलर एंबुलेंस दूरदराज इलाकों तक पहुंच सके, तो वहां रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
मैं इस समय App टीम का हिस्सा हूं. App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…
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August 29, 2026, 16:47 IST



