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ऐंटी ड्रोन सिस्टम क्या होता है? कैसे काम करता है, चीन के खतरे के बीच जापान का ब्रह्मास्त्र मिशन

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ऐंटी ड्रोन सिस्टम क्या? कैसे काम करता है, चीनी खतरे में जापान का ब्रह्मास्त्र

Last Updated:August 27, 2026, 18:14 IST

जापान की तरफ से चीन की मिलिट्री से जुड़ी ऐक्टिविटी को देश के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा करार दिया गया है. लगातार बढ़ते सैन्य खतरे और आक्रामक रुख को देखते हुए जापान ने अब हथियारों की खरीद के मामलों में तेजी लाने का फैसला किया है. जापान ने डिफेंस डील के तीन महीनों के अंदर ही इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम को चुन लिया है. ऐंटी ड्रोन सिस्टम क्या? कैसे काम करता है, चीनी खतरे में जापान का ब्रह्मास्त्र Zoomऐंटी ड्रोन सिस्टम

Anti Drone System Technology: चीन की तरफ से लगातार बढ़ते सैन्य खतरे और आक्रामक रुख को देखते हुए जापान ने अब हथियारों की खरीद के मामलों में तेजी लाने का फैसला किया है. जापान ने डिफेंस डील के तीन महीनों के अंदर ही इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम को चुन लिया है. जापानी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली क्विजिशन, टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने बताया कि कई सारी कंपनियों में से आखिरकार टेरा बी1 (Terra B1) को खरीदा गया है. आइए समझते हैं कि ये एंटी ड्रोन सिस्टम आखिर होते क्या हैं?

जापान ने डिफेंस वाइट पेपर में मानवरहित सिस्टम पर खास जोर दिया है, जिसे टोक्यो ने भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी बताया है. वाइट पेपर में चीन की मिलिट्री से जुड़ी ऐक्टिविटी को देश के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा करार दिया गया है. इसके साथ ही बीजिंग की तरफ से AI से लैस मानवरहित सिस्टम के तेजी से विकास पर भी चिंता जताई गई है.

एक्सपर्ट्स के अनुसार आधुनिक सेनाओं को ऐसे हथियारों की जरूरत है जिनका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन किया जा सके और जो दुश्मन की नई स्ट्रेटिजी के मुताबिक खुद को ढाल सकें. युद्ध के मैदान के एक्सपीरियंस को तुरंत हथियारों और रणनीतियों में शामिल करना ही जीत की कुंजी है.

क्या है ऐंटी ड्रोन सिस्टम?एंटी-ड्रोन सिस्टम को तकनीकी भाषा में काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) कहा जाता है. यह किसी भी देश की एयर डिफेंस का वो कवच है जो आसमान में मंडरा रहे दुश्मन के ड्रोन्स को पलक झपकते ही ढेर करने की ताकत रखता है. ये एक ऐसी इंटीग्रेटेड तकनीक है, जिसे खासतौर पर आसमान में उड़ने वाले मानवरहित विमानों यानी UAV और ड्रोन का पता लगाने, उनकी पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और फिर आखिर में उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.

अब चूंकि ड्रोन आकार में बहुत छोटे होते हैं और रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते हैं. इसलिए पारंपरिक एयर डिफेंस मिसाइलें उन पर बेअसर साबित होती हैं. ऐसे में ऐंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. एंटी-ड्रोन तकनीक मुख्य रूप से तीन चरणों में काम करती है.

डिटेक्शन और ट्रैकिंग: सिस्टम में लगे हाई-टेक रडार, रेडियो फ्रिक्वेंसी सेंसर, अकाउस्टिक साउंड सेंसर के साथ ही इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड कैमरे आसमान में किसी भी संदिग्ध हरकत को भांप लेते हैं. फिर जैसे ही कोई ड्रोन सीमा के पास आता है तो यह सिस्टम तुरंत सुरक्षा बलों को अलर्ट कर देता है.
एनालिसिस: एडवांस्ड सॉफ्टवेयर की मदद से यह पहचाना जाता है कि ड्रोन किस किस्म का है? उसका सिग्नल कहां से ऑपरेट हो रहा है और वह कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है?
न्यूट्रलाइजेशन: खतरे की पुष्टि होने के बाद यह सिस्टम दो मुख्य तरीकों से दुश्मन के ड्रोन का काम तमाम करता है. ये होते हैं सॉफ्ट किल और हार्ड किल. अब न्यूट्रलाइजेशन की इन दोनों तकनीक को समझते हैं.
सॉफ्ट किल: इसमें दुश्मन ड्रोन के रेडियो सिग्नल्स या GPS कनेक्शन को इलेक्ट्रॉनिक जैमर के जरिए जाम कर दिया जाता है. संपर्क कटने के बाद ड्रोन या तो जमीन पर गिर जाता है या जहां से उड़ा था, वहीं वापस लौट जाता है.
हार्ड किल: ड्रोन अगर नहीं मानता है तो एंटी-ड्रोन गन, लेजर बीम या फिर मिसाइल इंटरसेप्टर का इस्तेमाल करके उसे हवा में ही गोला बनाकर नष्ट कर दिया जाता है.

क्यों पड़ी इसकी जरूरत? 

कम लागत में बड़ा नुकसान: पारंपरिक मिसाइलों और युद्धक विमानों की तुलना में ड्रोन बेहद सस्ते होते हैं, लेकिन ये किसी बड़े सैन्य ठिकाने या बुनियादी ढांचे को करोड़ों का नुकसान पहुंचा सकते हैं.
सीमा पार तस्करी और आतंकवाद: भारत जैसे देशों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, ड्रग्स और गोला-बारूद भेजने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं.
अचानक हमले का खतरा: आधुनिक युद्ध की स्थिति में ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (सुसाइड ड्रोन) कई घंटों तक आसमान में मंडराकर सही मौके का इंतजार करते हैं, जिनसे निपटने के लिए हर समय ऐक्टिव रहने वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत होती है.
About the Authorऐश्वर्य कुमार राय

ऐश्वर्य कुमार राय नेटवर्क 18 ग्रुप में जर्नलिस्ट हैं. वह यहां डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर देश और दुनिया के घटनाक्रमों पर विस्तृत रिपोर्ट्स कवर करते हैं. न्यूज 18 हिंदी में दिसंबर 2025 से जुड़े ऐश्वर्य यहां न…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 27, 2026, 18:14 IST

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