कम उम्र से ही हड्डियां क्यों होने लगती है कमजोर, ऑस्टियोपोरोसिसस न हो इसके लिए पहले से क्या करना चाहिए

Osteoporosis Symptoms: हड्डियां कमजोर होना जिंदगी को दूभर करने जैसा है. कमजोर हड्डियों के सहारे आप कोई भी शारीरिक काम सही से नहीं कर सकते हैं. हड्डियों की एक गंभीर बीमारी होती है ऑस्टियोपोरोसिस. आमतौर पर यह बुजुर्गों में होती है. लेकिन आजकल 40-50 साल की उम्र में भी लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी होने लगी है. इसमें हड्डियां हमेशा चटकती रहती है और क्षणभंगुर हो जाती है.यहां तक कि चलने में और खड़ा होने में भी दिक्कत होने लगती है. आखिर इसकी समय से पहले पहचान क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है. आइए इसके बारे में जानते हैं.
ऑस्टियोपोरोसिस है क्या
मायो क्लीनिक के मुताबिक हमारी हड्डियां लगातार टूट-फूट के दौर से गुजरती रहती है लेकिन हर बार अपने आप टूटी-फूटी कोशिकाओं की जगह नई बना लेती है. ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी तब होता है जब जिस रफ्तार से पुरानी हड्डियों में टूट-फूट होती है, उस रफ्तार उसकी जगह नई हड्डियों की कोशिकाएं नहीं बनती है. पुरुषों में 60 साल के बाद और महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह ज्यादा होती है. ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां इतनी कमजोर और क्षणभंगुर हो जाती हैं कि हल्का सा गिरना या झुकने और खांसने जैसे मामूली प्रेशर से भी फ्रैक्चर हो सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े फ्रैक्चर सबसे आम तौर पर कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी में होते हैं.
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण
ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती चरणों में हड्डियों के कमजोर होने के अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं लेकिन जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती है. इसमें अचानक रीढ़ की हड्डी टूटने या दबने के कारण पीठ में दर्द करता है, समय के साथ लंबाई में कमी आ जाती है, लोग झुककर चलने लगते हैं, मामूली झटके या गिरने पर हड्डियां बहुत आसानी से टूटने लगती है.
ऑस्टियोपोरोसिस का कारण क्या है
हमारे शरीर में हड्डियों की कोशिकाएं लगातार मरती है और लगातार बनती रहती है. जहां नई हड्डियां बनती हैं और पुरानी हड्डियां टूटती हैं. युवावस्था में नई हड्डियां तेजी से बनती हैं, लेकिन 30 वर्ष की उम्र में पीक बोन मास पर पहुंच जाती है. इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ पुरानी हड्डियों के नष्ट होने की दर नई हड्डियों के बनने से तेज हो जाती है. इस स्थिति में ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपनी युवावस्था में कितना पीक बोन मास हासिल किया है. यह जितना अधिक होगा, उम्र बढ़ने पर ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा उतना ही कम होगा. यानी 30 वर्ष की उम्र से पहले यदि आपकी हड्डियों का घनत्व ज्यादा विकसित होगा तो बाद में आपको ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी का खतरा भी कम रहेगा. लेकिन इस उम्र में यदि हड्डियों का घनत्व कम रह जाता है तो बाद में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा होगा. इसलिए कहा जाता है कि बचपन में हड्डियों का मजबूत होना बहुत जरूरी है.
किन लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क ज्यादा
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा होता है. इसके अलावा कुछ लोगों में इसके लिए जीन भी जिम्मेदार होता है. इसे हम बदल नहीं सकते हैं. वहीं ज्यादातर मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस के लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा उन लोगों में सबसे ज्यादा होता है जिनके शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन ज्यादा होता है. इसके अलावा खानपान में कैल्शियम की कमी, ईटिंग डिसऑर्डर, वजन कम होना और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में भी इसका खतरा रहता है. वहीं प्रेडनिसोन जैसी कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाओं और मिर्गी, कैंसर या अर्थराइटिस जैसी मेडिकल स्थितियों के लंबे समय तक शिकार रहने वाले लोगों में भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है. हमारी कुछ गंदी आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार है. जैसे सुस्त जीवनशैली, एक्सरसाइज नहीं करना, शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना, अत्यधिक शराब पीना और तंबाकू का किसी न किसी रूप में सेवन करना भी हड्डियों के कमजोर होने और इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाने में काफी बड़ा फेक्टर है.
कैसे ऑस्टियोपोरोसिस से बचें
ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के सबसे पहले आपको बैलेंस डाइट की जरूरत होगी. खासकर 30 साल की उम्र तक. इसके बाद रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल जीना होगा. अपनी उम्र के अनुसार पर्याप्त कैल्शियम, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोया उत्पाद का सेवन करें. विटामिन डी के लिए धूप में 15 मिनट के लिए कम से कम रहे. कॉड लिवर ऑयल, फोर्टिफाइड अनाज या डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए. साथ ही, मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने वाले स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वॉकिंग, रनिंग जैसे वेट-बेयरिंग और संतुलन बनाने वाले जैसे ताई ची एक्सरसाइज नियमित रूप से करने चाहिए. वहीं सिगरेट और शराब का सेवन कभी न करें. तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन न करें.



