कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल? कई बड़े विभागों की थी कमान, सरकार ने अचानक क्यों कर दिया APO?

जयपुर. राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है. कार्मिक विभाग ने 28 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया है. आदेश में प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शिखर अग्रवाल को आगामी आदेशों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखने के निर्देश दिए गए हैं. यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि शिखर अग्रवाल राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उनके पास अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर की जिम्मेदारियों के साथ कई महत्वपूर्ण संस्थाओं का प्रभार भी था. ऐसे में अचानक एपीओ किए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई है. शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं.
हालांकि, सरकार की ओर से जारी आदेश में इस फैसले के पीछे प्रशासनिक कारणों के अलावा किसी अन्य वजह का उल्लेख नहीं किया गया है. अब नई नियुक्ति मिलने तक शिखर अग्रवाल को पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा करनी होगी. शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे. इसके अलावा उनके पास राजकीय उपक्रम विभाग और विनियोजन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी थी. प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थे. राजस्थान में निवेश को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से संबंधित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती थी.
रीको और राजसीको जैसे संस्थानों की भी संभाल रहे थे कमान
शिखर अग्रवाल के पास राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी थी. इसके साथ ही वह राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसीको) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के पद पर भी कार्यरत थे. दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी उनके पास थी. इसके अलावा वह भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण में विशेषाधिकारी के रूप में कार्यरत थे. इन जिम्मेदारियों के कारण प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश संबंधी प्रशासनिक कार्यों में उनकी अहम भूमिका थी.
प्रवासी राजस्थानी और निवेश संवर्धन विभाग का भी था प्रभार
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी कार्य विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. इसके अलावा निवेश संवर्धन ब्यूरो से जुड़े कार्य भी उनके पास थे. राजस्थान में निवेशकों को आकर्षित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व उनके पास थे. ऐसे में उन्हें एपीओ किए जाने का फैसला नौकरशाही में चर्चा का विषय बना हुआ है.
संपत्ति को लेकर चर्चाओं के बीच आया आदेश
शिखर अग्रवाल की संपत्ति को लेकर पूर्व में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं, जिसके बाद वह चर्चाओं में रहे थे. हालांकि, 28 अक्टूबर को जारी कार्मिक विभाग के आदेश में संपत्ति संबंधी किसी जांच, आरोप या कार्रवाई का कोई उल्लेख नहीं है. आदेश में केवल प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया है. इसलिए उनके एपीओ किए जाने को संपत्ति संबंधी चर्चाओं से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा. सरकार ने इस निर्णय के पीछे किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
अब नई पोस्टिंग का इंतजार
कार्मिक विभाग के आदेश के बाद शिखर अग्रवाल को आगामी पदस्थापन आदेश जारी होने तक प्रतीक्षा में रहना होगा. राज्य सरकार की ओर से उन्हें आगे किस विभाग या पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, यह नए आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा. राजस्थान की नौकरशाही में वरिष्ठ अधिकारी को एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाकर एपीओ किए जाने के इस फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. हालांकि, इस निर्णय के पीछे आधिकारिक रूप से केवल प्रशासनिक कारण ही बताए गए हैं.



