Unique Temple: नाखूनों से खोद डाली झील, फिर भी अधूरा रह गया प्यार, सिरोही के इस मंदिर में क्यों मारे जाते हैं पत्थर?

होमताजा खबरधर्म
नाखूनों से खोदी झील, फिर भी अधूरा रहा प्यार, मंदिर में क्यों मारते हैं पत्थर?
Last Updated:October 29, 2026, 06:37 IST
Mount Abu Unique Rasiya Balam Temple: राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां भक्त पूजा-अर्चना के साथ पत्थर मारने की परंपरा भी निभाते हैं. सिरोही जिले के देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित रसिया बालम और कुंवारी कन्या मंदिर करीब 5 हजार वर्ष पुराना बताया जाता है. लोकमान्यता के अनुसार, इस मंदिर का संबंध रसिया बालम और राजकुमारी की अधूरी प्रेम कहानी से है. कहा जाता है कि राजकुमारी की मां ने छल करके दोनों का विवाह रुकवा दिया था. इसी घटना के विरोध में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद पत्थरों के ढेर पर कंकड़ फेंकते हैं. मान्यता है कि इसके नीचे राजकुमारी की मां की प्रतिमा दबी हुई है. खास बात यह है कि नवविवाहित जोड़े, प्रेमी युगल और महिलाएं भी इस परंपरा को निभाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से उनके प्रेम और वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती.
सिरोही. राजस्थान की एकमात्र हिल स्टेशन आबू राज में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां भक्त पत्थर मारकर एक खास परंपरा को पूरा करते हैं. जी हां, हम बात कर रहे है रसिया बालम और कुंवारी कन्या मंदिर की. माउंट आबू के दिलवाड़ा क्षेत्र स्थित यह मंदिर करीब 5 हजार वर्ष पुराना है. मंदिर में एक स्थान ऐसा है जहां भक्त और खास तौर पर कुंवारी कन्याएं और विवाहित महिलाएं पत्थर मारती है. यहां पत्थर का वादा ढेर भी लगा हुआ है.
माना जाता है कि इस ढेर के नीचे एक प्रतिमा है, जिसे पत्थर मारकर लोग रसिया बालम और कुंवारी कन्या का प्यार अधूरा रहने के पीछे षड्यंत्र रचने वाली महिला के प्रति विरोध जताते हैं. इसी ढेर के नीचे राजकुमारी की उस कपट करने वाली मां की पत्थर की मूर्ति दबी हुई है, जिन्होंने इस प्रेम कहानी को अधूरा छोड़ने के लिए छल किया था.
नाखून से बनाई थी झील, छल की वजह से अधूरा रहा प्यार
लोक कथा के अनुसार माउंट आबू के एक शिल्पकार रसिया बालम को यहां की राजकुमारी से प्रेम हो गया था. राजकुमारी के पिता आने रसिया बालम के सामने शर्त रख दी थी कि अगर एक रात में बिना किसी औजार के अगर यहां झील खोद पाओगे तभी उसका वजवाह उनकी बेटी से हो सकेगा. राजा की शर्त पूरी करते हुए अपने नाखूनों से रातों-रात नक्की झील खोद दी, तब राजकुमारी की मां ने विवाह रोकने के लिए सुबह होने से पहले ही मुर्गे की झूठी बांग दे दी थी. इस धोखे के कारण यह प्रेमी जोड़ा कभी एक न हो सका. यहाँ आने वाले लोग आज भी उस छल के प्रति अपना आक्रोश और विरोध जताने के लिए उस स्थान पर पत्थर मारते हैं. वहीं मंदिर में आने वाले नवविवाहित जोड़े और प्रेमी जोड़े विशेष रूप से इस परंपरा का पालन करते हैं. माना जाता है कि यहाँ उस कपटी रूपी पत्थर पर कंकड़ या पत्थर मारने से उनके अपने प्रेम जीवन या वैवाहिक जीवन में कभी किसी का छल, व्यवधान या नजर नहीं लगती.
दूर-दराज से दर्शन करने आते हैं भक्त
स्थानीय भक्त रघुनाथ सिंह ने बताया कि दिलवाड़ा का रसिया बालम मंदिर अति प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर का इतिहास नक्की झील के निर्माण और रसिया बालम और कुंवारी कन्या के प्रेम से जुड़ा है. आज भी राजस्थान के लोकगीतों में रसिया बालम की अधूरी प्रेम कहानी का बखान किया जाता है. इस वजह से यहां राजस्थान ही नहीं बल्कि गुजरात और अन्य राज्यों से भी काफी वक्त दर्शन करने आते हैं.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
और पढ़ेंLocation :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 29, 2026, 06:37 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



